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 जशपुर जिले में मिली पक्षियों की कई दुर्लभ प्रजातियां 

Last Modified - February 1, 2018, 8:18 pm

 

जशपुरनगर -छत्तीसगढ़ में पहली बार ’’बर्ड काउन्ट इंडिया’’ और ’’वन विभाग’’ के सामंजस्य से पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की संख्या जानने के लिए छत्तीसगढ़ के समस्त जिले में पक्षियों का सर्वे किया जा रहा है। जिसमें जशपुर जिले में 24 जनवरी से 29 जनवरी तक के सर्वे में 157 पक्षियों की प्रजातियां प्राप्त हुई है। जिसमें से कई प्रजातियां माईग्रेटेड पक्षियों की भी हैं।

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    ’’बर्ड काउन्ट इंडिया’’ में कार्यरत छत्तीसगढ़ के प्रोजेक्ट एसीसटेंट श्री रवि नायडू, ने बताया कि पहली बार छत्तीसगढ़ में पक्षियों की संख्या जानने के उद्देश्य से सर्वे किया जा रहा है। श्री रवि ने बताया कि इनके द्वारा अब तक 24 जिलों का सर्वे किया जा चुका है। वह जशपुर जिले में 24 जनवरी 2018 से सर्वे कर रहे हैं। सर्वे के दौरान उन्हें 5 दिनों में जिले में कुल 157 प्रजातियां प्राप्त हुई हैं। जशपुर जिले के कई क्षेत्रों में कुछ दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों के रिकार्ड भी प्राप्त हुए है। जो कि जशपुर जिले में हिमालय तथा दुनिया के कई हिस्सों से ठंड और वन क्षेत्रों की उपलब्धता होने के कारण यहां पाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इन दुर्लभ प्रजातियों में ’’रोजीमिनीबेट’’ प्रजाति पाई गई है जो कि छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक जशपुर जिले में प्राप्त हुआ है। साथ ही ’’लौंग टेल्डस्टाªईक ट्राईकलर’’ नामक हिमालय से आने वाली पक्षी भी यहां मिली है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा जिले में ब्लू कैव्ड रौक थ्रस, अल्ट्रा मरीन फ्लाई कैचर, वरी डेंटर फ्लाई कैचर, रूफर्स वुड पैंकर और वेलवैड फ्रन्टेड नट हैज जैसी और भी कई पक्षियों की प्रजातियां प्राप्त हुई हैं।

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    श्री नायडू ने बताया कि जिले में जशपुर जिले में मात्र 43 पक्षियों के प्रजातियों की संख्या उपलब्ध थी। जो कि अभी 24 जनवरी से 29 जनवरी तक के सर्वे के दौरान 157 हो गई हैं। उन्होंने कहा कि जशपुर जिले में लगभग 250 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों की मिलने की संभावना है। इसका कारण उन्होंने बताया कि जशपुर जिला पूरी तरह से वन क्षेत्रों से घिरा हुआ है और यहां का वातारण ठंडा होने से पक्षियों की संख्या अत्यधिक मिल सकती है।

 

    वन मण्डलाधिकरी श्री पंकज राजपूत ने बताया कि इस सर्वे के माध्यम से  जिले में पक्षियों की प्रजातियों के बारे में पूर्ण जानकारी उपलब्ध होगी।  साथ ही उन्होंने कहा कि जिले के कई अंदरूनी इलाकों में ग्रामीण अंज्ञानतावश चिड़ियों का शिकार करते है, उन्हें यह जानकारी नहीं है कि ना सिर्फ यह कानूनन गलत है बल्कि इसके कारण चिड़ियों की कई प्रजातियां विलुप्त भी हो जाती है। जिले में लोगों के अंदर पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता पैदा करने की आवश्यकता है।

 

    पक्षियों को बचाने और लोगों को पक्षियों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वन विभाग के द्वारा 4 फरवरी को राजा विजयभूषण सिंहदेव कन्या महाविद्यालय में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। श्री राजपूत ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य समाज में संरक्षकों को बढ़ावा देना होगा। और पक्षियों को बचाने की इस मुहिम अंतर्गत होने वाली सभी गतिविधियो को वन विभाग द्वारा सहयोग प्रदान किया जाएगा।  इसके अलावा आने वाले महीने मंे विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदर्शनी लगाकर छात्रों को इस मुद्दे के प्रति संवेदनशील करने की कोशिश भी की जाएगी। श्री राजपूत ने कहा कि जिन छात्र-छात्राओं की रूचि होगी उन्हें ’पक्षी मित्र’ बनाया जाएगा। जिससे की वो अपने आस-पास के लोगों को चिड़ियों के शिकार के खिलाफ जागरूक कर सके। प्रदर्शनी तथा कार्यशाला का आयोजन भी किया जाएगा।

 

वेब टीम IBC24

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