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पंचायती राज की ताकत के समक्ष झुकी सरकार-अमित जोगी

Created at - February 5, 2018, 2:24 pm
Modified at - February 5, 2018, 2:24 pm

रायपुर- जैसा कि आप सभी को ज्ञात है कि  मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह द्वारा वर्ष 2017-2018 के बजट में प्रदेश के 45 लाख लोगों को स्मार्टफोन देने की घोषणा की गयी थी। योजना का ऐलान करते समय सरकार ने विधानसभा में कहा था कि इन मोबाइल फोनों को मोबाइल कनेक्टिविटी देने के लिए मोबाइल कंपनियां अपने खर्च पर टावर स्थापित करेंगी। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से 28 नवंबर 2017 को हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार द्वारा सरकारी खर्च पर टावर लगाने का निर्णय ले लिया गया और इसके लिए 600 करोड़ रूपए मोबाइल कंपनियों को देने का निर्णय लिया गया था।  यह राशि 14वें वित्त आयोग के मद में केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि मे से दी जा रही है।

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 इस विषय में मरवाही विधायक अमित जोगी ने आपत्ति उठाते हुए मुख्यमंत्री को 10 जनवरी 2018 को पत्र लिख कर कहा था कि 14वें वित्त आयोग की राशि ग्राम पंचायतों के विकास के लिए सीधे पंचायतों को दी जाती है। इस मद को मोबाइल टावर स्थापित करने में खर्च किया जाना नियमों के उलंघन के दायरे में आता है। जोगी ने कहा था कि 14 वे वित्त आयोग के समक्ष छत्तीसगढ़ सहित सभी राज्य सरकारों ने सर्वसम्मति से यह स्वीकृति दी थी कि 14 वे वित्त आयोग की राशि का उपयोग ग्राम पंचायतों के द्वारा ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के आधार पर किया जाएगा। इस सम्मति के पश्चात 14 वे वित्त आयोग की राशि के सन्दर्भ में मंत्रालय की भूमिका सिर्फ एक पोस्टमैन की रह गयी है इसलिए शासन का 14 वे वित्त आयोग की राशि को मोबाइल टावर के निर्माण में खर्च करना अवैधानिक है। अमित जोगी ने मुख्यमंत्री से मांग की थी कि सरकार अपने इस निर्णय को वापस ले जिससे 14 वे वित्त आयोग से जारी राशि का उपयोग ग्राम पंचायतों द्वारा ग्राम सभा में पारित प्रस्तावों के लिए किया जा सके।

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इस विषय पर अमित जोगी का कहना है कि उनकी  पहल आज रंग लायी और मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने आज यह घोषणा करी कि 14 वे वित्त आयोग की राशि का उपयोग मोबाइल टावर के निर्माण के लिए नहीं किया जाएगा। इसके लिए राज्य बजट से राशि जारी करी जायेगी। अमित जोगी की पहल पर पंचायतों को लगभग 600 करोड़ रूपए की राशि मिलेगी जिसका उपयोग वे ग्रामों के विकास कार्यों में कर सकेंगे।

 वेब टीम IBC24

 


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