बस्तर News

महिला समूह ने मशरूम उत्पादन को बनाया अतिरिक्त आय का जरिया

Last Modified - February 9, 2018, 12:18 pm

दंतेवाड़ा -आज के समय में  मशरूम उच्च वर्ग के किचन की शान बना हुआ है और इस महंगी सब्जी को खरीदने में लोग जपने पॉकेट के तरफ भी नहीं ध्यान देते इसी बात को ध्यान में रख कर सुदूर बस्तर की महिलाओं ने अब मशरूम को अपने आय का जरिया बना लिया है अब वे अपने घर में ही रह कर घर परिवार के साथ साथ अपनी आय भी बढ़ा रही हैं। 

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इन दिनों घर-परिवार के दैनिक कार्य और खेती-किसानी के साथ बडे़ कारली की नंदपुरिन महिला स्व-सहायता समूह की महिलायें मशरूम उत्पादन कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर मशरूम उत्पादन करने सहित मशरूम विक्रय कर उक्त समूह हर महीने करीब 10 हजार रूपए आय अर्जित कर रही है। कृषि विज्ञान केन्द्र गीदम के माध्यम से आर्या परियोजनान्तर्गत मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लेने सहित उक्त महिला समूह ने बीते 3 वर्ष पहले मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिसे अब विस्तार कर रहे हैं। 

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समूह की सचिव नमिता कश्यप ने बताया कि उनके समूह की महिलायें खेती-किसानी से जुड़ी हुई हैं, जो घर-परिवार के दैनिक कार्यों के संपादन के पश्चात अतिरिक्त आमदनी के लिए स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियॉ संचालित करना चाहती थी, इस बीच कृषि विज्ञान केन्द्र गीदम के वैज्ञानिकों द्वारा गांव के किसानों को किसान संगोष्ठी में खेती-किसानी की जानकारी देने सहित मशरूम उत्पादन के बारे में बताया गया। इसी दौरान महिला समूह की महिलाओं ने आर्या परियोजना से लाभान्वित होकर मशरूम उत्पादन करने का निर्णय लिया। कृषि विज्ञान केन्द्र से प्रशिक्षण सहित शेड निर्माण और बीज ईत्यादि भी सहायता दी गयी। इस महिला समूह की अध्यक्ष श्यामबती वेको ने बताया कि उक्त सहायता के माध्यम से समूह की महिलाओं ने मशरूम उत्पादन पर पूरा ध्यान केन्द्रीत किया। वहीं मशरूम उत्पादन की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया। जिससे उत्पादित मशरूम का विक्रय तुरंत होने लगी। उसने बताया कि उनके समूह के मशरूम की मांग गीदम दंतेवाड़ा में होने के कारण गांव में आकर खरीद ले जाते हैं। इसे ध्यान रखते हुए समूह की महिलाओं ने मशरूम उत्पादन का विस्तार करने निर्णय लिया है और इस दिशा में एक में एक नवीन शेड निर्मित कर चुके हैं।

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 जिसमें आगामी दिनों में मशरूम उत्पादन शुरू करेंगे। श्यामबती ने बताया कि समूह की महिलायें अपनी इस आर्थिक गतिविधि से खुश हैं। परिवार के सदस्य भी घर-परिवार के कार्यों के साथ इस आयमूलक गतिविधि को संचालित करने के लिए उत्साहवर्धन करते हैं। समूह की महिलाओं ने उक्त आर्थिक गतिविधि के साथ ही बचत को भी बढ़ावा दिया है। यही कारण है कि समूह के खाते में अभी करीब 80 हजार रूपए है, जिसे समूह की महिलायें आडे़ वक्त ऋण लेकर सुविधानुसार वापस जमा करती हैं। समूह की सामूहिक गतिविधियों से प्रभावित लच्छनदई वेको कहती हैं उक्त गतिविधि आय अर्जित करने के साथ ही हम सभी को सशक्त बनने के लिए ने खेल सहायक साबित हो रही है, बल्कि परिवार को खुशहाली की और अग्रसर करने मदद मिल रही है।

वेब टीम  IBC24 


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