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अमृतधारा जलप्रपात पर्यटकों के लिए दर्शनीय और मनोरम 

Created at - February 9, 2018, 7:26 pm
Modified at - February 9, 2018, 7:26 pm

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य कोरिया जिला प्राकृतिक सौंदर्य से अटा पड़ा है। एक ओर जहॉ घने वनों की हरियाली हर किसी के मन को मोह लेती है, वही दूसरी ओर जिले के अनेक छोटे-बडे नदी नालों के आसपास की नैसर्गिक छटा और एक दर्जन से ज्यादा जलप्रपातों का अनुपम संग्रह जिले की प्रमुख विशेषता है। जिले के विकासखंड सोनहत के ग्राम मेण्ड्रा से निकलने वाली हसदो नदी द्वारा बनाये गए प्राकृृतिक मनोरम जलप्रपातों की अनूठी छटा है। हसदो नदी पर अमृतधारा प्राकृतिक जलप्रपात दर्शनीय और पर्यटन स्थल के रूप में गिना जाता है। यहॉ पहाडो से चटटानों पर गिरने वाले झरनेका संगीत है, तो पत्थर यहॉ गीत गाते है।

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अमृतधारा जलप्रपात जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर से 45 किलोमीटर दूर बैकुण्ठपुर - मनेन्द्रगढ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम लाई से 8 किलोमीटर और कोरिया जिले की प्रमुख व्यापारिक नगरी मनेन्द्रगढ से 28 किलोमीटर दूर स्थित है। इस जलप्रपात तक पहुचने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पक्की सडक का निर्माण कराया गया है। जिले के विशिष्ट पर्यटन केन्द्र के रूप में पहचान बना चुके अमृतधारा जलप्रपात में पानी एक सौ बीस-फीट की उचाई से गिरता है। इतनी उचाई से गिरती जलधारा की दुधिया अनुपम छटा देखते ही बनती है। आसपास के घने जंगल के बीच बना जलप्रपात मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है। जलप्रपात के समीप जनजातियों से बसे गांव का नाम भी अमृतधारा है। इस जलप्रपात का पुराना नाम विसवाही था जिसे बाद में कोरिया रियासत के राजा ने अमृतधारा नाम दिया। जलप्रपात में साल भर पर्यटक और शैलानी आते है। जो मनमोहक दृश्य का आनंद उठाते है। अमृतधारा जलप्रपात का मनोहारी प्राकृतिक सौंदर्य किसी को भी अपनी ओर बरबस आकृष्ट करने में सक्षम है। जो भी यहॉ आकर इसकी मनोरम छटा केा देखता है, वह यहॉ के सौंदर्य के प्रति ऋणी होकर रह जाता है। ग्रीष्मऋतु का मौसम हो या फिर नववर्ष का स्वागत हजारों प्रकृति प्रेमी पर्यटक सैर करने और पिकनिक हेतु इस रमणीय स्थल में आते है। हसदो नदी का किनारा व इससे लगा घना वन क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को मानो बार-बार आने का न्यौता देता है।

अमृतधारा का प्राकृतिक आभा तथा नियति का अप्रतिम वरदान यह अदभुत निरंतर सौंदर्य दर्शकों को आल्हादित करने में सक्षम है। हसदेव नदी के तट पर प्रदेश के एकमात्र चंदन वन क्षेत्र अमृतधारा जलप्रपात में स्थित है। यह स्थान नैसर्गिक दृष्टिकोण से मनोरम होने के कारण पर्यटन स्थल के रूप में प्रदेश में विख्यात है। यहॉ पर्यटकों के लिए विश्राम गृह का निर्माण कराया गया है और साथ ही रेस्टोरेंट भी बनाया गया है।अमृतधारा में एक यात्री प्रतीक्षालय भी बनाया गया है। अमृतधारा जलप्रपात में प्रकाश व्यवस्था की व्यवस्था की गई है। प्रकाश की व्यवस्था होने से पर्यटकों के लिए रमणीय स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। पर्यटकों के लिए आवश्यक जगहों पर रेलिंग लगाई गई है। इसके अलावा बच्चों के मनोरंजन लिए पार्क, झूला आदि की भी व्यवस्था की गई है। उल्लेखनीय है कि अमृतधारा धार्मिक स्थल भी है साथ ही इस क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व भी है। इस जगह में कोरिया रियासत के समय का अतिप्राचीन भगवान शिव व हनुमान जी का मंदिर है। महाशिवरात्रि में हर वर्ष हजारों लोग इस पवित्र जलप्रपात में स्नान कर भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करते है। यहॉ प्रत्येक शिवरात्रि व मकर संक्राति में मेला भी लगता है। जिसमें क्षेत्र के लोग धार्मिक भाव से इकटठे होते है।

web team IBC24


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