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बच्चों और मजदूरों का मनोबल बढ़ा रमन के गोठ से

Created at - February 12, 2018, 12:41 pm
Modified at - February 12, 2018, 12:41 pm

रायपुर-मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कल आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से प्रसारित अपनी मासिक रेडियो वार्ता रमन के गोठ की 30वीं कड़ी प्रस्तुत की जिसमे बच्चो की  परीक्षा से लेकर बज़ट और महिला स्वास्थ सब पर चर्चा हुई। इन सब के बावजूद एक बात देखने मिली की छत्तीसगढ़ का हर ग्रामीण रमन के गोठ सुनने के लिए उत्साही था। आपको बता दें कि राजधानी रायपुर के गांधी मैदान के पास चावड़ी में आने वाले मजदूर भी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मासिक रेडियो वार्ता कार्यकम ’रमन के गोठ’ के नियमित श्रोता बन गए हैं। रायपुर शहर के विभिन्न मोहल्लों से रोजी-मजदूरी के लिए चावड़ी में इकट््ठा श्रमिकों ने आज भी रेडियो से रमन के गोठ को प्रसारण सुना। चावड़ी में श्री भुवन साहू, श्री हिरामन सोनवानी, श्री संजय निषाद, श्री अवध साहू, श्री गजानंद विश्वकर्मा सहित अन्य श्रमिकों ने ’रमन के गोठ’ में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की बातें रूचि लेकर सुनी।

 

इसके साथ ही तेलीबांधा चौक गुरूनानक द्वार के पास काम की तलाश में आये लोगों ने बड़े ही उत्साहपूर्वक रमन की बात सुनी श्रीमती गोदावरी चौहान ने महिला पुलिस स्वयं सेविका योजना चेतना को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सरकार का उचित कदम बताया और कहा कि उसे सभी जिलों में लागू करना चाहिए। राजेन्द्र नगर निवासी श्री बामनो निहाल ने रमन सरकार को किसान हितैषी सरकार बताया। 

 

 इस बात रमन सिंह ने  परीक्षाओं के इस मौसम को ध्यान में रखते हुए, जहां छात्र-छात्राओं का उत्साह बढ़ाया, वहीं उन्हें परीक्षा के दिनों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से कई उपयोगी टिप्स भी दिए। उन्होंने बच्चों को स्वामी विवेकानंद की जिन्दगी से लिए गए दो प्रेरक उदाहरण दिए और कहा कि एकाग्रता बहुत जरूरी है। डॉ. सिंह ने बच्चों को परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं दी।  उन्होंने बच्चों के अभिभावकों से कहा- परीक्षा देने जा रहे बच्चों को प्यार, सहानुभूति और हिम्मत बढ़ाने वाले वातावरण की जरूरत होती है। उन्होंने बच्चों को परीक्षाओं के इस मौसम में टाईमटेबल बनाकर पढ़ाई करने, खान-पान, नींद, आराम और थोड़ा व्यायाम करने की भी सलाह दी है। 

डॉ. सिंह ने बच्चों को परीक्षा के दिनों में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कम्प्यूटर, टी.व्ही., रेडियो आदि से दूर रहने और बहुत जरूरी होने पर ही इनका उपयोग करने की नसीहत दी है और कहा है कि अगर पढ़ते-पढ़ते बोरियत या झुंझलाहट हो रही हो तो झपकी ले या थोड़ा टहल लें। इससे ज्यादा लाभ मिलेगा। आंखों का आराम और ठंडक देने का ख्याल रखें। मुख्यमंत्री की रेडियो वार्ता की आज की कड़ी को लेकर भी विगत 29 कड़ियों की तरह राज्य के गांवों और शहरों में लोगों में काफी उत्साह देखा गया।

शांति से योजना बनाकर परीक्षा की करें तैयारी

    मुख्यमंत्री ने कहा-जहां तक परीक्षा के समय के तनाव का सवाल है, तो इसका इलाज जितना बाहर है, उससे ज्यादा खुद के अंदर होता है। अगर संतुलित ढंग से नहीं सोचकर हड़बड़ाएंगे तो तनाव होगा, लेकिन अगर शांति से योजना बनाकर तैयारी करेंगे, तो तनाव से बच सकते हैं। मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा कि पहले तो यह समझ लेना चाहिए कि परीक्षा के बीच में जो समय है, उसका सबसे अच्छा उपयोग कैसे करना है। उसके लिए टाईमटेबल बनाकर पढ़ाई और अन्य गतिविधियों को शामिल करना चाहिए।

डॉ. रमन सिंह ने छात्र-छात्राओं का मनोबल बढ़ाने के लिए जशपुर जिले के ग्राम कोड़ेकेला (विकासखण्ड-पत्थलगांव) निवासी एक गरीब किसान परिवार के बेटे दीपक की सफलता की कहानी भी सुनाई। उन्होंने अपनी रेडियोवार्ता में बताया कि दीपक को रोज चार किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता था। उसे जिला प्रशासन द्वारा संकल्प संस्था के माध्यम से निःशुल्क कोचिंग की सुविधा दी गई। दीपक ने जमकर तैयारी की और आईआईटी दिल्ली के लिए चुन लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा-जब पढ़ाई और परीक्षा की बात आती है तो अक्सर साधन और सुविधाओं की चर्चा होती है। लोग तुलना करने लगते हैं। आखिर दीपक ने साबित कर दिया कि वह सुविधाएं मायने नहीं रखती, बल्कि लगन और इरादा महत्वपूर्ण होता है।

वेब टीम  

 


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