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राजिम कुम्भ के समापन पर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने किया शौर्य प्रदर्शन

Created at - February 13, 2018, 7:30 pm
Modified at - February 13, 2018, 7:30 pm

31 जनवरी से शुरू हुए राजिम महाकुम्भ कल्प का आज समापन हो गया। साधु-संतों के शाही स्नान के साथ ही सम्पन्न हुए इस कार्यक्रम में और भी अनेक मनोरम दृश्य देखने को मिले।सबसे खास बात ये रही कि  नागा साधुओं के अखाड़े की सवारी जैसे ही निकली तो मंत्री बृजमोहन अग्रवाल भी थोड़े धार्मिक रंग में रंगे दिखाई दिए। उन्होंने नागा साधुओं के साथ शौर्य प्रदर्शन में भी भाग लिया  और तलवार और लाठियों के साथ शौर्य प्रदर्शन  भी किया। 

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  महाशिवरात्रि की सुबह संत समागम स्थल पर सबसे पहले नागा साधुओं ने शस्त्र पूूूजा की। इसके बाद विभिन्न सम्प्रदायों, आश्रमों, अखाड़ों और शक्तिपीठों के साधु-संत अपने निशानों और ध्वजों के साथ शोभा यात्रा में शामिल हुए। धर्मस्व मंत्री अग्रवाल, विधायक उपाध्याय तथा नगर पालिका गोबरा नवापारा अध्यक्ष गोयल भी शोभा यात्रा में शामिल हुए।

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सुबह 7.30 बजे लोमश ऋषि आश्रम के नजदीक संत समागम स्थल से नागा साधुओं सहित अन्य साधु-संतों की शोभा यात्रा निकली तथा नवापारा के नेहरू घाट से नये पुल होकर राजिम पहुंची। शोभा यात्रा राजिम में पण्डित सु दर लाल शर्मा चौक से शास्त्री चौक होते हुए त्रिवेणी संगम पर शाही कुंड पहुंची। इसमें विभिन्न अखाड़ों, आश्रमों, शक्तिपीठों और संप्रदायों के साधु-संत अपने ध्वजों के साथ शामिल हुए।

 

 नागा साधुओं का दल सबसे आगे चल रहा था। अनेक आश्रमों और अखाड़ों के प्रमुख साधु-संत घोड़ों और बग्गियों में सवार होकर शोभा यात्रा के साथ चले। नवापारा और राजिम शहर में लोगों ने जगह-जगह शोभा यात्रा में शामिल साधु-संतों का भव्य स्वागत किया। नागा साधुओं के साथ अन्य साधुओं ने अपने शस्त्रों के साथ जगह-जगह आकर्षक करतब भी दिखाते रहे। राजिम के त्रिवेणी संगम पर स्थित कुलेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर विशेेष पूजा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कुलेश्वर मंदिर, राजीव लोचन मंदिर सहित अन्य मंदिरों मे दिन भर दर्शन के लिए लोगों की भीड़ लगी रही।

 

राजिम कुंभ मेले के दौरान तीन पुण्य स्नान तिथियों माघ पूर्णिमा 31 जनवरी, जानकी जयंती 8 फरवरी तथा महाशिवरात्रि 13 फरवरी को श्रद्धालुओं ने स्नान किया। इस बार के राजिम कुंभ में तीन नए अनूठे कार्यक्रम कराए गए। इन कार्यक्रमों से राजिम कुंभ मेले की शोभा और बढ़ी। नदियों के संरक्षण के लिए आम लोगों ने जागरूकता लाने तीन फरवरी को संगम पर मैराथन का आयोजन किया गया। मेले मे 7 फरवरी को भव्य संत समागम के शुभारंभ अवसर पर तीन लाख साठ हजार से अधिक मिट्टी के दीये जलाए गए। उसके बाद 8 फरवरी को 2100 शंखनाद किया गया।

 वेब न्यूज़ IBC24


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