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करोड़ों खर्च फिर भी प्रदेश में 5 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित, सरकार के रवैये पर भड़के जोगी

Last Modified - February 13, 2018, 9:56 pm

रायपुर। छत्तीसगढ़ में साल 2017 में कुपोषण की रोकथाम के लिए करीब 465 करोड़ रूपए खर्च किए जा चुके हैं लेकिन अब भी प्रदेश में 5 लाख 35 हजार बच्चे कुपोषित हैं। यह खुलासा मरवाही विधायक अमित जोगी के प्रश्न पर विधानसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रमशीला साहू द्वारा दिए गए जवाब से हुआ। अमित जोगी ने मंत्री से पूछा था कि प्रदेश के बच्चों में कुपोषण की रोकथाम के लिए कौन-कौन सी योजनाएं चलाई जा रही हैं और बीते 2 सालों में इन योजनाओं पर कितनी राशि खर्च की गई ? साथ ही पिछले 2 सालों में प्रदेश में कितने कुपोषित बच्चे पाए गए।

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जिसका जवाब देते हुए मंत्री रमशीला साहू ने बताया कि कुपोषण की रोकथाम के लिए शासन द्वारा कुल 7 योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन पर वर्ष 2015 - 2016 में 438 करोड़ 21 लाख खर्च हुए थे जबकि वर्ष 2016 - 2017 में लगभग 465 करोड़ खर्च हो चुके हैं फिर भी नवंबर 2017 के आकड़ों के अनुसार प्रदेश में 5 लाख 35 हजार 75 बच्चे कुपोषित हैं। सबसे ज्यादा 44,005 बच्चे बिलासपुर जिले में कुपोषित हैं। दूसरे नंबर पर मुख्यमंत्री का गृह जिला राजनांदगांव है जहां करीब 36,442 बच्चे कुपोषित हैं। चौकाने वाली बात यह है कि दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों में साल 2016 के मुकाबले साल 2017 में कुपोषित बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है। 

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कुपोषण के आंकड़ों के सामने आने के बाद मीडिया को प्रतिक्रिया देते हुए मरवाही विधायक अमित जोगी सरकार पर जमकर भड़के। जोगी ने कहा कि सरकार द्वारा करोड़ों रूपए कुपोषण की रोकथाम के लिए खर्च किए जा रहे है लेकिन उनसे हासिल कुछ भी नहीं हो रहा है। क्या इन योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वन नहीं हो रहा है या कुपोषण की रोकथाम की आड़ में इन योजनाओं का पूरा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है ? अपने गृह जिले में सर्वाधिक कुपोषित बच्चों की संख्या होने पर अमित जोगी ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामयाबी छुपाने के लिए अमित जोगी द्वारा गोद लिए बच्चों को फर्जी रूप से कुपोषित साबित करने की कोशिश कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि कुपोषण खत्म करना इस सरकार के बस की बात नहीं है। तभी तो मुख्यमंत्री का गृह जिला कुपोषण के मामले में प्रदेश में दूसरे नंबर पर है।

 

 

 

वेब डेस्क, IBC24

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