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ज्ञान क्रांति और हरित क्रांति की राह पर चल पड़ा नक्सल हिंसा पीडि़त जिला

Last Modified - March 12, 2018, 8:10 pm

छत्तीसगढ़ का आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जिला अब नक्सल हिंसा और आतंक के साये से तेजी से मुक्त हो रहा है। यह जिला अब शिक्षा के जरिए ज्ञान क्रांति और जैविक खेती के जरिए हरित क्रांति के रास्ते पर चल पड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेशव्यापी लोक सुराज अभियान 2018 के तहत जब इस जिले का दौरा किया, तो उन्हें वहां विकास की तेज गति से बहती बयार के बीच जिले की बदलती तस्वीर भी देखने को मिली। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आज कहा कि जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा के पास ग्राम जावंगा में राज्य सरकार द्वारा स्थापित एजुकेशन सिटी अपने जिले का और राज्य का भी नाम रौशन कर रही है। ग्लोबल ऑडिट यूनिट केपीएमजी ने इस एजुकेशन सिटी को दुनिया की सौ नवाचारी संरचनाओं में शामिल किया है।

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    यह विशाल शैक्षणिक परिसर एक सौ एकड़ से ज्यादा रकबे में संचालित है, जहां करीब एक सौ करोड़ रूपए की लागत से निर्मित भवनों में 20 से ज्यादा स्कूल और कॉलेज संचालित हो रहे हैं। परिसर में पूर्व प्राथमिक (यूकेजी) से लेकर आईटीआई, पॉलीटेकनिक और डिग्री कॉलेज तक सर्वश्रेष्ठ शिक्षा की सुविधाएं विकसित की गई हैं। एक ही परिसर में प्राथमिक, मिडिल, हाईस्कूल, हायर सेकेण्डरी और कॉलेज का संचालन इस संस्था को एक नई पहचान दे रहा है। यह परिसर पांच हजार से ज्यादा विद्यार्थियों की चहल-पहल से गुलजार रहता है। स्कूली बच्चों के लिए वहां आवासीय सुविधा भी है। परिसर में विद्यार्थी हुनरमंद बनते हुए अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। दंतेवाड़ा की इस एजुकेशन सिटी परिसर का नामकरण देश के पूर्व प्रधानमंत्री और छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर किया गया है। इस परिसर में दिव्यांग बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ का पहला बाधारहित सक्षम विद्यालय भी संचालित किया जा रहा है।   

    इस बीच जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विस्तार के लिए ‘पढ़े दंतेवाड़ा-लिखे दंतेवाड़ा’ नाम से एक नये शैक्षणिक प्रकल्प की भी शुरूआत हो चुकी है। जिले के बच्चे धारा प्रवाह हिन्दी पढ़ और लिख सके और गणित की सामान्य बातों को भी आसानी से सीख सकें, यह इस नये प्रकल्प का उददेश्य है। इसके अंतर्गत मोबाइल एप्प के जरिए प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग की जा रही है। जिले के 36 हजार से ज्यादा बच्चों को इस प्रकल्प का लाभ मिल रहा है। इससे बच्चों में सीखने की क्षमता भी काफी तेजी से बढ़ रही है। इस प्रकल्प में बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े प्रोफाइल को भी शामिल किया गया है। आश्रम शालाओं और छात्रावासों तथा अन्य आवासीय स्कूलों में पढ़ाई कर रहे 19 हजार बच्चों के स्वास्थ्य की निःशुल्क जांच करने का प्रावधान भी इस प्रकल्प में किया गया है। 

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इन बच्चों के हीमोग्लोबिन टेस्ट रिपोर्ट भी पोर्टल में अपलोड की जा रही है, ताकि कमजोर बच्चों को चिन्हांकित कर अच्छे स्वास्थ्य के लिए उन्हें पौष्टिक आहार देने की भी पहल की जा सके। अधिकारियों ने बताया कि ‘पढ़े दंतेवाड़ा-लिखे दंतेवाड़ा’ प्रकल्प में हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने वाले बच्चों के लिए टेस्ट सीरिज भी शुरू किया गया है। इसके फलस्वरूप दसवीं और बारहवीं बोर्ड की परीक्षाओं के उत्साहजनक नतीजे आ रहे हैं। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा के बच्चों के लिए ‘छू लो आसमान’ प्रकल्प भी काफी उपयोगी साबित हो रहा है। इस प्रकल्प में नवमीं से बारहवीं तक की नियमित पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें जेईई, आईआईटी और नीट जैसी प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग दी जाती है, ताकि बच्चे देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश ले सकें। इस परियोजना के तहत अब तक 19 विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के लिए और 155 विद्यार्थियों का चयन इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए हो चुका है। इनके अलावा मेडिकल कॉलेज के लिए तीन विद्यार्थियों का चयन हुआ है।

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    इसी तरह दंतेवाड़ा जिले के चार हजार से ज्यादा किसानों ने जैविक खेती से जुड़कर हरित क्रांति के एक नये युग की भी शुरूआत कर दी है। इनमें अधिकांश आदिवासी किसान हैं। राज्य सरकार ने जैविक खेती के लिए मोचो बाड़ी परियोजना के तहत किसानों को खेतों की फेंसिंग के लिए भी मदद कर रही है। इन किसानों ने ‘भूमगादी’ नामक अपनी कंपनी बनाकर जैविक खेती में तैयार चावल और अन्य उत्पादों का कारोबार भी शुरू कर दिया है। किसानों की कंपनी ‘भूमगादी’ ने अपने जैविक उपजों का ब्राण्ड नेम ‘आदिम’ रखा है। उनके खेतों के चावल तथा अन्य उपजों की मांग देश के महानगरों में बढ़ती जा रही है। अपनी कम्पनी के जरिए किसानों ने धान और अन्य लघु धान्य फसलों का प्रसंस्करण का काम भी शुरू किया है। इससे उन्हें अब तक 50 लाख रूपए से ज्यादा की आमदनी हो चुकी है।  

 

वेब टीम IBC24


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