News

मुख्यमंत्री ने की घोषणा समिति प्रबंधको का मानदेय 12 हजार से बढ़ाकर किया 15 हजार

Last Modified - March 21, 2018, 7:29 pm

   रायपुर,--मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का आयोजन साईंस कॉलेज परिसर स्थित पण्डित दीनदयाल उपाध्याय परिसर में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज व्यापार एवं विकास सहकारी संघ द्वारा किया गया। 

ये भी पढ़े - छत्तीसगढ़ के कोई भी कांग्रेसी नेता नहीं करेंगे मुख्यमंत्री रमन सिंह के साथ मंच साझा

 

इस अवसर पर  मुख्यमंत्री ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के प्रबंधको का मासिक मानदेय 12 हजार रूपए से बढ़ाकर 15 हजार रूपए करने और 10 हजार तेन्दूपत्ता फड़ मुंशियों को निःशुल्क सायकिल देने की घोषणा की है। समारोह की अध्यक्षता वन मंत्री श्री महेश गागड़ा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में पर्यावरण विद् और पद्मभूषण से सम्मानित श्री चण्डी प्रसाद भट्ट, उत्तराखण्ड राज्य ग्राम्य विकास एवं पलायन नियंत्रण आयोग के अध्यक्ष डॉ.एस.एस.नेगी, छत्तीसगढ़ राज्य वनौषधि बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री श्रीनिवास राव मद्दी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर लघु वनोपज की बोनस राशि प्रदाय के पोस्टर एवं ब्रोशर का विमोचन किया। उन्होंने लघु वनोपज के प्रचार-प्रसार के लिए तैयार की गई रथ को भी रवाना किया।

 

 

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मुख्य अतिथि की आसंदी से कहा कि धरती के अस्तित्व को बचाने के लिए वनों का होना जरूरी है। ये वन न केवल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से बल्कि लोगों की आजीविका के लिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ में सामाजिक वानिकी संबंधी प्रयोग काफी सफल हुए हैं। हरियाली के साथ-साथ इसके आस-पास रहने वाले ग्रामीणों की आमदनी का अच्छा जरिया भी बने हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे राज्य में 44 प्रतिशत भू-भाग में जो जंगल हैं, उनके असली संरक्षक उनमें रहने वाले आदिवासी हैं। वे जंगलों को नुकसान नहीं पहुंचाते। उन्हें मालूम है कि उनका जीवन जंगल पर ही पूर्ण रूप से निर्भर है। जीवन से लेकर मरते दम तक उनका जंगल से रिश्ता होता है। उन्होंने कहा कि जंगलों में रहने वाले आदिवासी शहरी लोगों की तुलना में वनों को बेहतर तरीके से समझते हैं। 

ये भी पढ़े -  हाथी से बच कर भागे ग्रामीण तो भालू ने किया हमला

अपर मुख्य सचिव वन श्री सी.के.खेतान ने कहा कि विश्व के विभिन्न देशों में वनों के महत्व को समझाने के लिए विश्व वानिकी दिवस मनाया जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के लिए ये दिवस इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसका 44 फीसदी हिस्सा वन है। उन्होंने कहा कि वनों की पांच किलोमीटर की परिधि में राज्य के आधे से ज्यादा गांव आते हैं। उनके लिए छोटे-छोटे काम करके उनके जीवन में खुशहाली ला सकते हैं। श्री खेतान ने बताया कि राज्य में 1900 करोड़ रूपए केवल तेन्दूपत्ता बोनस के रूप में बांट चुके हैं जो कि संभवतया पूरे देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि औसत रूप से प्रत्येक संग्राहक परिवार को 15 हजार के आस-पास मिलती है। यह राशि किसी आम ग्रामीण परिवार के लिए बड़े काम की है। श्री खेतान ने बताया कि बोनस का इंतजार किए बगैर बोनस की राशि लघु वनोपज के मूल्य में शामिल करने का ऐलान किया था। इसलिए अब पहले से ही बोनस की राशि को शामिल करके लघु वनोपज का मूल्य निर्धारण किया गया है। विशेष अतिथि के रूप में मौजूद उत्तराखण्ड ग्राम्य विकास एवं पलायन नियंत्रण आयोग के अध्यक्ष श्री एस.एस. नेगी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वनोपज संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण और जीविकोपार्जन तक बेहतर संतुलन बनाया गया है। लघु वनोपज यहां से बाहर भी भेजे जा रहे हैं, उनके ब्राण्डिग पर भी विचार किया जाना चाहिए।

 

 

 

 

वेब टीम IBC24

Trending News

Related News