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संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने के विरोध में संत समाज ने घेरा सीएम हाउस

Last Modified - April 6, 2018, 11:01 am

भोपाल। जिन पांच संतो को सरकार ने राज्य मंत्री का दर्जा दिया है, उन्ही संतो में कुछ संत नर्मदा यात्रा की पोलखोल यात्रा निकलने वाले थे, शिवराज सिंह ने उन संतो को लाभ के धंधे में फसाकर अपने मुख्य धंधे से बाहर कर दिया है, यह सीएम की सोची समझी साजिश है, राजनीति में धर्म ठीक है लेकिन प्रशासन में इस तरह का हस्तक्षेप कतई उचित नही है, मैं मुख्यमंत्री से गुजारिश करूंगा कि अपने फैसले पर पुनर्विचार करें, सीएम को सद्बुद्धि आये, साधू महात्माओं का जो काम है करने दें, सीएम अपना काम करें। 

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तल्ख टिप्पणी के साथ यह खुलासा म.प्र. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने किया है, सतना से भोपाल जाते समय अपने अल्प प्रवास पर अजय सिंह ने मीडिया को यह बयान दिया है, कांग्रेस की न्याय यात्रा पीसीसी. या एआईसीसी. की बिना अनुमति शुरू करने के सवाल पर उन्होंने जवाब दिया, कि अनुमति जरूरी नहीं है, न्याय यात्रा में खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मौजूद रहेंगे, म.प्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिहं चैहान ने पांच साधु संतो को राज्य मंत्री का दर्ज देकर एक बार फिर कांग्रेस को हमले का मौका दे दिया है। 

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वैसे इस मामले पर अकेले कांग्रेस ही नहीं बल्कि साधू-संतों के एक धड़े ने भी मोर्चा बुलंद कर दिया है। इस सिलसिले में प्रदेश के कुछ सतांे ने सीएम हाउस का घेराव भी किया। घेराव के दौरान साधू-संतों की पुलिस से झड़पें भी हुई। वहीं नेत्रहीन संत नर्मादानंद ने राज्यमंत्री के दर्जे को धर्मसंगत बताते हुए, सरकार का बचाव किया है।  

 

 

वेब डेस्क, IBC24

 

 

 


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