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जनता मांगे हिसाब: भरतपुर-सोनहत की जनता ने मांगा हिसाब

Last Modified - April 10, 2018, 2:10 pm

रायपुर। IBC24 की खास पेशकश 'जनता मांगे हिसाब' में सोमवार शाम छत्तीसगढ़ के भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र की जन मुद्दों की गूंज सुनाई दी। 

 

भरतपुर-सोनहत की भौगोलिक स्थिति

सबसे पहले हम बात करेंगे, छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में आने वाले भरतपुर सोनहत विधानसभा की. 2008 में परिसीमन के बाद ये सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। बीजेपी की चंपा देवी पावले यहां की मौजूदा विधायक हैं। इस सीट सबसे ज्यादा संख्या आदिवासियों की है। जो हर चुनाव में उम्मीदवारों के हार-जीत में अहम भूमिका निभाते हैं। आने वाले विधानसभा चुनाव में यहां का सियासी समीकरण कैसा रहेगा। आपको बताएंगे। लेकिन पहले भरतपुर-सोनहत विधानसभा की भौगोलिक स्थिति पर डालते हैं एक नजर 

भरतपुर सोनहत विधानसभा सीट जंगल, पहाड़ों और कोयला खदानों से घिरा ये इलाका छत्तीसगढ़ का मुकुट कहलाता है। सरगुजा संभाग का ये इलाका भौगोलिक दृष्टि से काफी कठिन है। लेकिन फिर यहां की जनता काफी मुखर है। यहां रहने वालों में सबसे ज्यादा संख्या आदिवासियों की है। जो अपने हक को लेकर आवाज उठाती रही है। 2008 में परिसीमन के बाद भरतपुर सोनहत विधानसभा सीट आदिवासी के लिए रिजर्व है। इस विधानसभा में 2 नगर पंचायत, और 64 ग्राम पंचायत आती हैं। वहीं जनसंख्या 2 लाख 56 हजार 825 है। भरतपुर सोनहत विधानसभा में 78,370 पुरुष मतदाता  और 77770 महिला मतदाता हैं। जो चुनाव में प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करते हैं। वर्तमान में सीट पर बीजेपी का कब्जा है। 

भरतपुर-सोनहत की सियासत

भरतपुर-सोनहत की सियासत की बात की जाए तो यहां बीजेपी में टिकट के लिए कई दावेदार हैं। 2008 में पार्टी को जीत दिलाने वाले फूलचंद सिंह और मौजूदा विधायक चंपा देवी पावले इस दौड़ में सबसे आगे हैं। जबकि दो बार से लगातार चुनाव हार रही कांग्रेस में भी कमोबेश वही हालात हैं। वहीं जोगी कांग्रेस का चुनाव मैदान में उतरना भी यहां के सियासी समीकरण को दिलचस्प बना दिया है। 

भरतपुर सोनहत विधानसभा सीट के दावेदारों की बात करें तो कांग्रेस से 2013 में हारे हुए प्रत्याशी गुलाब कमरो को टिकट मिल सकती है। दरअसल पूर्व कांग्रेस विधायक और दिग्गज गुलाब सिंह के जोगी कांग्रेस का दामन थामने के बाद गुलाब कमरो का दावा सबसे मजबूत है।जिला पंचायत सदस्य और कृषि विभाग के सभापति शरण सिंह भी कांग्रेस के उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि गुलाब कमरो की पत्नी वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य है जिसकी वजह से वो इलाके की जनता से लगातार जुड़े हुए हैं। वहीं उनका चरणदास महंत के करीब होना भी उनकी दावेदारी  मजबूत करता है। 

दूसरी ओर बीजेपी में वर्तमान विधायक और संसदीय सचिव चंपा देवी पावले टिकट दावेदारी में सबसे आगे हैं। पावले के अलावा पूर्व विधायक फूलचंद सिंह भी उम्मीदवार के लिए अपना दावा पेश कर सकते हैं। वर्तमान में फूलचंद पार्टी कार्यक्रमों में लगातार शिरकत कर रहे हैं। इसके अलावा लगातार क्षेत्र का दौरा भी कर रहे हैं. हालांकि वर्तमान विधायक चंपा देवी का सहज और सरल मिलनसार छवि उनकी दावेदारी को मजबूत करता है। 

अब जब विधानसभा चुनाव होने में कुछ ही महीने बचे हैं ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी के सामने चुनौती होगी कि वो सही उम्मीदवार को टिकट दें। हालांकि दोनों ही दलों के लिए यहां जीत की राह आसान नहीं होगी। क्योंकि पिछले चुनाव में अच्छी वोट लाने वाला गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने श्याम सिंह मरकाम को प्रत्य़ाशी घोषित कर एक बार फिर चुनाव मैदान में टक्कर देने के मूड में है। वहीं जोगी कांग्रेस भी यहां अपना जनाधार बनाने की कोशिश में है।   

 

क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र के कई इलाके आज भी छत्तीसगढ़ से ज्यादा मध्य प्रदेश पर निर्भर हैं। दरअसल क्षेत्र के कई गांवों में बिजली मध्य प्रदेश से मिलती है। वहीं विकास कार्यों में भ्रष्टाचार भी यहां बड़ा चुनाव मुद्दा बन सकता है। यहां की जनता अपने जनप्रतिनिधि के काम की सराहना तो करते हैं, लेकिन अधिकारियों के बेलगाम होने पर आक्रोशित भी हैं।ऐसे में आने वाले चुनाव में क्षेत्र की जनता इन मुद्दों ध्यान में रखकर ही वोट डालेगी। 

भरतपुर सोनहत विधानसभा कुदरती तौर पर ये क्षेत्र काफी धनी है। लेकिन सुविधाओं की बात करें तो जीरो पावर कट वाले छत्तीसगढ़ के इस विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में बिजली मध्यप्रदेश के भरोसे मिलती है। जिसे लेकर यहां की जनता ने कई बार आवाज तो उठाई। लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

सड़कों की खस्ताहाल हालत भी आगामी चुनाव में जनप्रतिनिधियों के लिए मुसीबत का कारण बन सकता है। कोरिया जिला मुख्यालय से क्षेत्र की दूरी करीब 110 किमी होने के  बावजूद यहां पहुंचने में लोगों को दिक्कतें होती है। क्षेत्र की वर्तमान विधायक चंपा देवी पावले का निवास भी इसी इलाके में हैं। मगर आज भी कई ऐसे गांव हैं जो पहुंचविहिन हैं। 

जंगल की कटाई और नदियों से रेत का अवैध उत्खनन भी यहां आम बात है। जिसे लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत की है। लेकिन कार्रवाई नहीं होती।  पुरानी कोयला खदानों के बंद होने से यहां पलायन की स्थिति बनी हुई है और इसके लिए भी कोई ठोस उपाय नहीं किया जा रहा है। कुल मिलाकर भरतपुर-सोनहत में मुद्दों की कोई कमी नहीं जाहिर यहां सत्तापक्ष की कड़ी परीक्षा होने वाली है।

 

 

 

 

 

वेब डेस्क, IBC24


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