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गौशालाओं को आहार के लिए अब 25 की जगह 50 रूपए और मुफ्त में मिलेगी जमीन

Last Modified - April 10, 2018, 8:30 pm

रायपुर। छत्तीसगढ़ में गौशालाओं में गायों की मौत के बाद राज्य सरकार ने सुविधा बढ़ाने का फैसला लिया है। गौ शालाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उप समिति की अंतिम बैठक तमाम विषयों पर चर्चा हुई।  

कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया कि गौ शालाओं को पोषण आहार के लिए प्रति पशु प्रति दिन 25 रूपए की जगह 50 रूपए दिया जाए। गांवों में संचालित गौशालाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए 5 से 10 एकड़ जमीन चारागाह के लिए निःशुल्क दी जानी चाहिए। शहरी क्षेत्रों की गौशालाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन दी जाए। प्रदेश के 40 विकासखण्डों में नई गौशालाएं स्थापित करने के लिए चिन्हित जमीन को सुरक्षित करने के लिए व्यवस्था की जाए। गौ शालाओं में तैयार वर्मी कम्पोस्ट एवं जैविक खाद का मानक परीक्षण इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय अथवा अन्य मानक निर्धारण करने वाली संस्था से कराए जाने के बाद बीज निगम के माध्यम से दर निर्धारित करने का सुझाव देने का निर्णय लिया है।

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खेती-किसानी में उपयोग होने वाले पशुओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गौशालाओं को पशुधन संख्या के आधार पर शेड एवं अन्य कार्य के लिए दी जा रही राशि में बढ़ोतरी की जाए। गोबर और गौमूत्र की गुणवत्ता युक्त संकलन, प्रसंस्करण के साथ-साथ औषधि जीवामृत, अमृतपानी, कीट नियंत्रक, गोनाइल और जैविक खाद बनाने व उनके विपणन के लिए गौशालाओं का चयन किया जाए। चयनित गौशालाओं को इसके लिए प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित करने जरूरी अधोसंरचनाएं बनाई जाए। गौशालाओं में सौर ऊर्जा से पशुओं के पेयजल तथा चारा उत्पादन के लिए सिंचाई व्यवस्था के लिए सौर सुजला योजना में शामिल किया जाए। गोबर, गौ-मूत्र तथा गौशाला से निकलने वाले अन्य अपशिष्टों पर आधारित उद्योग लगाने हेतु उद्योग विभाग की ओर से विशेष कार्य योजना बनाई जाए।

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गौशालाओं में सुव्यवस्थित कार्य के लिए आवश्यक उपकरण जैसे-चाफ कटर, स्प्रेयर, ग्रॉस कटर, गोबर स्क्रेपर, छोटी ट्रेक्टर ट्रॉली के अलावा सिंचाई उपकरण के लिए कृषि विभाग से अनुदान की व्यवस्था की जाए। गौशालाओं से संबंधित गांवों के स्थानीय इच्छुक व्यक्तियों को प्राईवेट कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण दिया जाए। गौशाला में पशुधन संरक्षण एवं संवर्धन कार्य बेहतर ढंग से किया जा सके। उप समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों, प्रांतीय राजमार्गों, जिला मार्गों और मुख्य सड़कों पर दुर्घटना ग्रस्त पशुओं के बेहतर इलाज के लिए और जप्त किए गए पशुओं को तात्कालिक रूप से उचित सुविधा देने के लिए सभी जिलों में काउकेचर के साथ विशेष परिसर (एनीमल होल्डिंग प्रिमाईसेस) बनवाए जाए। सुझाव बैठक में पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर, संसदीय सचिव श्रीमती रूप कुमारी चैधरी, छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष बिशेषर पटेल उपस्थित थे।

 

वेब डेस्क, IBC24


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