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जनता मांगे हिसाब: IBC24 की चौपाल में मनेंद्रगढ़ के मुद्दे की गूंज

Last Modified - April 11, 2018, 10:54 am

शुरुआत करते हैं छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में आने वाले मनेंद्रगढ़ विधासनभा से। मध्य प्रदेश की सीमा से लगे राज्य के सबसे छोटे विधानसभा क्षेत्रों में शामिल इस सीट पर हमेशा दिलचस्प सियासी जंग के हालत बनते आए हैं। यही वजह है कि मनेद्रगढ़ विधानसभा सीट पर सभी की नजरें रहती हैं। लंबे समय से मनेंद्रगढ़ को अलग जिला बनाने की मांग उठती रही है।

मनेंद्रगढ़ की भौगोलिक स्थिति-

सबसे पहले मनेंद्रगढ़ विधानसभा की भौगोलिक स्थिति पर नजर डालते हैं।

कोयला नगरी के नाम से मशहूर

एक नगर निगम, एक नगर पालिका और एक नगर पंचायत शामिल

कुल जनसंख्या- 2 लाख 11हजार334

पुरुष मतदाता- 67,255 

महिला मतदाता- 62,613 

परिसीमन के बाद आदिवासी से सामान्य हुई सीट 

परिसीमन के पहले सीट पर था कांग्रेस का दबदबा

वर्तमान में बीजेपी के श्याम बिहारी जायसवाल विधायक

मनेंद्रगढ़ की सियासत-

मनेंद्रगढ़ के सियासत की बात करें तो यहां पार्टियां हर बार अपने कैंडिडेट का चेहरा बदल देती है। पिछली बार बीजेपी ने अपने विधायक दीपक पटेल का टिकट काटकर श्याम बिहारी जायसवाल को टिकट दिया था। लेकिन इस बात भी तय नहीं है कि विधायक श्याम बिहारी को फिर से टिकट मिलेगी या नहीं। जाहिर है एक नगर निगम,एक नगर पालिका और एक नगर पंचायत को अपने में समेटे इस विधानसभा क्षेत्र में हर बार दिलचस्प समीकरण बनते हैं।

 

हरे भरे पहाड़ों के बीच बलखाती सड़कें, अलसाए से गांव कस्बे और काला हीरा यानी कोयले की खानें। मनेंद्रगढ़ विधानसभा की पहली तस्वीर फिल्मी सी नजर आती है। राज्य के सबसे छोटे विधानसभा क्षेत्रों में से एक मनेंद्रगढ़ में एक नगर निगम, एक नगर पालिका और एक नगर पंचायत के साथ 36 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इस तरह इसका ज्यादातर इलाके को शहरी माना जा सकता है।

महेंद्रगढ़ के सियासी इतिहास की बात की जाए तो ये इलाका लंबे समय तक कांग्रेस के कब्जे में रहा। परिसीमन के पहले 1998 और 2003 में हुए चुनाव में कांग्रेस के गुलाब सिंह दो बार लगातार विधायक बने। 2008 में आदिवासी से सामान्य सीट बनी मनेंद्रगढ़ के चुनाव में बीजेपी के दीपक पटेल यहां से विधायक निर्वाचित हुए, जिन्होंने एनसीपी के रामानुज अग्रवाल को हराया था..कांग्रेस ने इस चुनाव में एनसीपी को अपना समर्थन दिया था।इसके बाद 2013 में बीजेपी ने यहां से सर्वश्रेष्ठ विधायक के रूप में पुरस्कृत दीपक पटेल का टिकट काटकर खड़गवां के जनपद उपाध्यक्ष रहे श्याम बिहारी जायसवाल को मैदान में उतारा, जिन्होंने दो बार के विधायक रहे कांग्रेस के गुलाब सिंह को हराया। एक बार फिर बीजेपी की तरफ से दीपक पटेल और श्याम बिहारी जायसवाल सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं।इनके अलावा बीजेपी किसान मोर्चा के प्रदेश मंत्री लखनलाल श्रीवास्तव भी प्रमुख अपना दावा ठोक रहे हैं। 

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के सामने वापस इस सीट को अपने पाले में करने की चुनौती है।दावेदारों की संभावित लिस्ट में कई नाम शामिल है...इसमें नगरपालिका अध्यक्ष राजकुमार केशरवानी, डॉक्टर विनय जायसवाल और अधिवक्ता रमेश सिंह इस दौड़ में सबसे आगे हैं..वहीं इस बार जनता कांग्रेस भी यहां अपना दमखम दिखाने के लिए तैयार है। कयास लगाए जा रहे है कि कांग्रेस छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़कर महापौर बनने वाले डमरु रेड्डी को यदि कांग्रेस टिकट नही देती है तो वे जनता कांग्रेस से मैदान में उतर सकते है।इसके अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से पार्टी के जिला अध्यक्ष आदित्य राज डेविड भी यहां से मैदान में उतर सकते हैं। 

हालांकि मनेंद्रगढ़ में जाति समीकरण खास मायने नहीं रखते हैं। अलबत्ता यहां उम्मीदवार की छवि और विकास कार्य जरूर नतीजों को प्रभावित करते आए हैं और इस बार भी मनेंद्रगढ़ को वही जीत पाएगा जो लोगों के दिलों को जीत पाएगा 

मनेंद्रगढ़ के मुद्दे-

मनेंद्रगढ़ में यूं तो राजनीति हमेशा से ही लोगों पर हावी रही है। लेकिन यहां की कुछ समस्याएं ऐसी हैं जिनको लेकर लंबे समय तक स्थानीय लोगों को आंदोलन भी करना पड़ा है।इनमें से एक है मनेंद्रगढ़ को जिला घोषित करना। इसके अलावा भी यहां कई ऐसे मुद्दे हैं जिनका सीधा सरोकार जनता से है और इन मुद्दों की वजह से ही यहां एक ही पार्टी अपने प्रत्याशी लगातार बदलती रहती है। 

छत्तीसगढ़ का मनेंद्रगढ़ काला हीरा यानी कोयला के खदानों के लिए जाना जाता है।इन खदानों ने बरसों से हजारों लोगों को रोजगार दिया है..लेकिन अब इन खदानों के बंद होने से यहां बेरोजगारी बढ़ी है..और यहां के ग्रामीण रोजगार की तलाश में क्षेत्र से पलायन कर रहे हैं। लेकिन इनकी समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है। वहीं मनेंद्रगढ़ में मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग भी काफी पुरानी है। इस मुद्दे पर कोई भी जनप्रतिनिधि अब तक जनता के साथ खड़ा होता नहीं दिखाई देता..जिसे लेकर स्थानीय लोगों की नाराजगी देखी जा सकती है। वहीं राज्य सरकार ने खुद बुंदेली में पावर प्लांट लगाने की घोषणा की थी..जो एक दशक बीत जाने के बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाया है। 

स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, सफाई व्यवस्था, मलेरिया, उद्योग कारखानों की कमी सहित बुनियादी सुविधाओं की कमी मनेंद्रगढ़ की प्रमुख समस्याएं हैं...जंगली क्षेत्र होने के कारण हाथियों के आतंक से भी जनता परेशान है.. कुल मिलाकर मनेंद्रगढ़ में मुद्दों की कमी नहीं है..जाहिर है आने वाले चुनाव में सत्तापक्ष की कड़ी परीक्षा होने वाली है।

 

 

वेब डेस्क, IBC24


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