भोपाल News

जनता मांगे हिसाब: नागौद और पेटलावद की जनता ने बुलंद की आवाज

Last Modified - April 11, 2018, 11:38 am

अब बात करते हैं मध्यप्रदेश के नागौद विधानसभा की..यहां हर चुनाव में  चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है..आंकड़ों पर नजर डाले तो एक बार निर्दलीय.. दो बार बीजेपी तो एक बार कांग्रेस के विधायक रहे हैं। पहले नजर डालते हैं विधानसभा के प्रोफाइल पर  

नागौद विधानसभा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति

सतना जिले की विधानसभा सीट

वर्तमान कांग्रेस विधायक हैं यादवेंद्र सिंह

90 फीसदी मतदाता किसान

मतदाता-2 लाख 521

पुरुष मतदाता-1 लाख 5 हजार 728

महिला मतदाता- 94 हजार 801 

ब्राह्मण और कुशवाहा समाज के सबसे ज्यादा वोटर

नागौद की सियासत

नागौद विधानसभा में सियासी इतिहास की बात करें..  मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही रहा है.. यहां की जनता ने बारी बारी से दोनों पार्टियों को जीत का सेहरा पहनाया है.. यहां की जनता लोक लुहावने वादों के आधार पर नहीं बल्कि व्यक्ति विशेष की लोकप्रियता और साफ स्वच्छ छवि देख कर बोट करती है.. यही वजह है की दोनों ही पार्टियां अपना उम्मीदवार ऐसा चुनती है जो जनता की उम्मीदों की कसौटी में खरा उतरे ।

सतना जिले का नागौद विधानसभा यहां की राजनीति राजघरानों से शुरू होकर महलों में ही खत्म होती है. चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही पार्टियां जीत के लिए राज परिवारों पर भरोसा करते हैं...2003 और 2008 विधासनभा चुनाव की बात करें तो बीजेपी के नागेंद्र सिंह यहां से विधायक चुने गए..वहीं मौजूदा विधायक यादवेंद्र सिंह भी राजघराने से ही आते हैं..और पूरी संभावना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी उन्हें रिपीट करे..हालांकि उम्र के लिहाज से पार्टी गाइडलाइन में फिट नहीं बैठने के बावजूद इलाके मे जनाधार और जनता में पकड़ उनकी दावेदारी को मजबूत करता है। कांग्रेस यहां पूर्व सांसद स्व सुखलाल कुशवाहा के पुत्र सिद्धार्थ को भी मौका दे सकती है..दरअसल विधान सभा क्षेत्र में कुशवाहा समाज का बड़ा वोट बैंक है। वहीं मृगेंद्र सिंह पिपरोखर भी दावेदारों की लिस्ट में शामिल हैं जिनको अजय सिंह का करीबी माना जाता है और इन दिनों क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं।

वहीं दूसरी ओर बीजेपी की बात की जाए तो आने वाले चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों की लंबी लिस्ट है।इसमें खजुराहो सांसद नागेंद्र सिंह का नाम पहले नंबर पर आता है.. वहीं पूर्व प्रत्याशी गगनेंद्र सिंह और पिछड़े वर्ग से जिला पंचायत उपाध्यक्ष रश्मि सिंह का दावा भी मजबूत है..। कुल मिलाकर दोनों ही पार्टियों में दावेदारों की कोई कमी नहीं है..और सही उम्मीदवार का चुनाव करना बड़ी चुनौती .. ऐसे में बीजेपी की कोशिश होगी कि वो ऐसे उम्मीदवार को टिकट दे जो यहां बीजेपी की वापसी करा सके ...वहीं कांग्रेस के लिए भी यहां अपनी जड़े मजबूत करने की बड़ी चुनौती है।

नागौद के प्रमुख मुद्दे-

नागौद विधानसभा में मुद्दों की बात करें ..तो चारों तरफ से कठिनाईयों से घिरा नजर आत है...यहां लोग बुनियादी सुविधाओं की कमी से तो जूझ ही रहे हैं...साथ ही इलाके में कोई बड़ा उद्योग नहीं लगने से बेरोजगारी यहां सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है...वहीं दूसरा बड़ा मुद्दा यहां पीने के पानी को लेकर है..पानी की किल्लत को लेकर कई योजनाएं बनीं..लेकिन धरातल पर उसका असर दिखाई नहीं देता। 

नागौद विधानसभा में मुद्दों की बात करें ..तो चारों तरफ से कठिनाईयों से घिरा नजर आत है...यहां लोग बुनियादी सुविधाओं की कमी से तो जूझ ही रहे हैं...साथ ही इलाके में कोई बड़ा उद्योग नहीं लगने से बेरोजगारी यहां सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है...वहीं दूसरा बड़ा मुद्दा यहां पीने के पानी को लेकर है..पानी की किल्लत को लेकर कई योजनाएं बनीं..लेकिन धरातल पर उसका असर दिखाई नहीं देता। 

जनता मांगे हिसाब: पेटलावद की जनता ने बुलंद की आवाज

अब बात मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले की पेटलावद विधानसभा की..अपनी अनूठी संस्कृति और आदिम सभ्यताओं के लिए जाना जाता है...सीट के मुद्दों और सियासी समीकरण की बात करें..लेकिन पहले इसके भौगोलिक स्थिति पर डालते हैं एक नजर..

पेटलावद की भौगोलिक स्थिति-

झाबुआ जिले की प्रमुख विधानसभा सीट

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र

मालवा का प्रवेश द्वार माना जाता है पेटलावद

टमाटर और शिमला मिर्च की बंपर पैदावार

रामा और पेटलावद को मिलाकर बनी है विधानसभा सीट

132 ग्राम पंचायतें और 368 गांव 

जनसंख्या-करीब 3.50 लाख

मतदाता- 2 लाख 19 हजार 578

पेटलावद की सियासत-

झाबुआ जिले की पेटलावद विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा है और वर्तमान विधायक हैं निर्मला भूरिया...अब विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है तो  विधायक की टिकट के लिए दावेदार एक-एक कर सामने आने लगे हैं ।बीजेपी हो या कांग्रेस दावेदारों की लिस्ट लंबी दिखाई दे रही है। विधायक की टिकट की आस लिए नेता अब विधानसभा में सक्रिय हो चले हैं.

विधानसभा चुनाव नजदीक हैं तो विधायक की टिकट के लिए दावेदार सक्रिय दिखाई देने लगे हैं ।बीजेपी हो या कांग्रेस दावेदारों की लाइन में खड़े हैं नेता... बीजेपी में दावेदारों की लिस्ट में सबसे पहला नाम है निर्मला भूरिया का जोकि वर्तमान बीजेपी विधायक हैं..और इस बार भी टिकट की लिए दावेदारी कर रही हैं ।निर्मला भूरिया के अलावा जीएस डामोर और धनसिंह बारिया भी दावेदारों की लाइन में हैं । जीएस डामोर की बात करें पीएचई विभाग में प्रमुख अभियंता के रूप में कार्य कर चुके हैं और अब विधायक की टिकट के लिए विधानसभा में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं । दावेदारों में से एक हैं धनसिंह जोकि झाबुआ नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष रह चुके हैं लेकिन अब विधायक के उम्मीदवार के तौर पर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं । ये तो हुई बीजेपी के दावेदारों की लिस्ट। बात कांग्रेस की करें तो कांग्रेस की भी लिस्ट लंबी है अब तक कांग्रेस से दावेदारों में प्रमुख तीन नाम सबसे आगे हैं। 

पहले हैं पूर्व विधायक वलसिंह मेडा.. दूसरी हैं कलावती गहलोत और सुरसिंह डामोर । वालसिंह मेडा पूर्व विधायक हैं. लेकिन 2013 में पराजय का सामना करना पड़ा था ।इसके अलावा कलावती गहलोत भी कांग्रेस से विधायक की टिकट के लिए दावेदारी कर रही हैं...जोकि जिला पंचायत सदस्य रह चुकी है ।सुरसिंह डामोर भी प्रबल दावेदारों की लिस्ट में शामिल हैं । इन सब दावेदारों के बीच विधायक की टिकट की रेस में कौन जीतेगा ये तय होगा चुनावी समर में ।

पेटलावद के मुद्दे-

और अब बात पेटलावद के मुद्दों की...पेटलावद में विकास की रफ्तार तो छोड़िए पानी तक के लिए तरस रही है जनता शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार सभी मोर्चो पर फेल नजर आता है पेटलावद. एक नहीं कई समस्याओं से जूझ रहे हैं लोग

पेटलावद विधानसभा में विकास के वादे और दावे तो किए गए लेकिन सच यही है कि आज भी बुनियादी सुविधाओं तक के लिए तरस रहा है पेटलावद।समस्याओं की बात करें तो बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है..क्योंकि उद्योग और रोजगार के संसाधन हैं ही नहीं नतीजा पलायन कर रहे हैं लोग...स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा बदहाल नजर आती है..हालत ये है कि स्कूल से लेकर कॉलेज तक स्टॉफ की कमी से जूझ रहे हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं.

पेटलावद में जलसंकट से भी जूझ रहे हैं लोग..गांवों में तो स्थिती बेहद खराब है एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं लोग...पम्पावती नदी को माही नदी से लिंक करने का वादा तो किया गया लेकिन हुआ कुछ नहीं । नतीजा किसानों के खेतों की प्यास अब तक बुझ नहीं पाई है । इसके अलावा सड़कों की हालत भी खस्ता है ।

टमाटर की बंपर पैदावार के लिए मशहूर है पेटलावद लेकिन फिर भी किसान परेशान है..देश विदेश तक पेटलावद का टमाटर जाता है इसके बावजूद भी किसान लागत मूल्य के लिए तक तरस जाता है । इसके अलावा कोल्ड स्टोरेज की मांग सालों से की जाती रही है लेकिन अब तक पूरी नहीं हो सकी है । ये वो समस्याएं है जिनसे दो-चार हो रहा है पेटलावद ।

 

वेब डेस्क, IBC24


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