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जानिए क्या है बस्तर विजय का मोदी प्लान

Created at - April 13, 2018, 9:39 pm
Modified at - April 13, 2018, 10:46 pm

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर बस्तर आ रहे हैं। बीजापुर के जावंगा में उनका व्यस्त प्रोग्राम है। एक प्रधानमंत्री का देश के किसी हिस्से में आना वैसे भी खास मौका होता है, पर नक्सल प्रभावित बीजापुर में उनका ये दौरा कई मैजेस दे रहा है । इस दौरे का एक सियासी संदेश भी है, जाहिर तौर पर..2018 के चुनाव को लेकर बीजेपी की जो जमीनी तैयारी चल रही है, उसका एक अहम हिस्सा है ये दौरा है। पर इस दौरे से बीजेपी को क्या हासिल होगा, और क्यों बस्तर पर केंद्रीय नेतृत्व का फोकस बढ़ा है। 

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बीजापुर का जांगला गांव इस वक्त सेंटर ऑफ अट्रेक्शन बना हुआ है, भारी भरकम प्रशासनिक अमला, हजारों सुरक्षाकर्मी और मीडिया का जमावड़ा यहां लगा हुआ है। जांगला अचानक ही एक वीआईपी गांव बन गया, क्योंकि शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी गांव में आने वाले है। यहां वो आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत करेंगे। वे बस्तर नेट के जरिए यहां के सारे सरकारी अस्पतालों को ऑनलाइन जोड़ने के प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी दिखाने वाले हैं। महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप से मिलेंगे और भी कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री का बीजापुर दौरा आम दौरे से कई मायनों में अलग है क्योंकि एक तो ये नक्सल डॉमिनेटेड एरिया है और दूसरा हाल ही में यहां बड़ी नक्सली वारदात हो चुकी है, तीसरा नक्सली लगातार उनके दौरे का विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद पीएम ने जोखिम उठाते हुए यहां के दौरे को टाला नहीं, जो एक संदेश है देश को यह बताने की, कि बस्तर में सब कुछ अंडर कंट्रोल है। इस साल के आखिर में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव है, इस लिहाज से इस दौरे का अपना सियासी अर्थ भी है। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी चैथी बार बस्तर आ रहे हैं। 

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इस वक्त बस्तर की देश और प्रदेश के लोगों के जेहन में जो इमेज उभरती है, वह है एक हिंसाग्रस्त पिछड़े इलाके की अपने इस दौरे के जरिए प्रधानमंत्री बस्तर की इस छवि को बदलना चाहते हैं। जांगला जैसे रिमोट में बसे गांव में जाकर वो ये दिखना चाहते हैं, कि बस्तर के कोने-कोने तक सरकार की पहुंच है, और विकास की बुनियाद यहां रखी जा चुकी है। मकसद ये दिखाने का भी है कि केंद्र की बड़ी और महात्वाकांक्षी योजनाओं का सीधा लाभ आज बस्तर जैसे पिछड़े इलाके के समस्याग्रस्त गांवों तक भी पहुंच रही है । 

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इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण 2013 के इलेक्शन में बीजेपी को यहां कई सीटों का नुकसान हुआ था, 2008 में यहां की 12 में से 11 सीटें उसके पास थीं। जबकि 2013 में ये घटकर 4 रह गई, और 8 सीटें कांग्रेस के खाते में चली गईं, ये अकसर कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ में जीत की राह बस्तर विजय से ही निकलती है, पिछली बार तो मैदानी सीटों में मिली बड़ी बढ़त ने रमन सरकार को बचा लिया था। लेकिन हर बार ऐसा हो, जरूरी नहीं, ऐसे में अपनी चैथी जीत के लिए रमन सरकार को बस्तर में वोटर्स का दिल जीतना बहुत जरूरी है। इस जमीनी सच्चाई को देखते हुए ये कह सकते हैं कि इस बार प्रधानमंत्री का यहां आना पार्टी की रणनीति का भी एक हिस्सा है। 

 

ब्यूरो रिपोर्ट, IBC24


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