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नक्सलगढ़ में मोदी ने साधे एक तीर से कई निशाने...

Last Modified - April 14, 2018, 7:25 pm

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी छत्तीसगढ़ में अपने चार साढ़े चार घंटे का प्रवास पूरा कर लौट चुके हैं। इस छोटे से प्रवास में उन्होंने देश और छत्तीसगढ़ को एक साथ कई संदेश देने की कोशिश की। उनके दौरे और भाषण से एक बात तो बिल्कुल साफ है कि वे चुनाव को लेकर पूरी तरह फोकस्ड हैं। इस एक कार्यक्रम के जरिए उन्होंने आदिवासी-दलित जैसे ज्वलंत राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दे से लेकर छत्तीसगढ़ की नक्सलवाद समस्या पर संदेश देने की कोशिश की। बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती के दिन अपनी सबसे महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना को शुरू करने का और पीएम बनने का पूरा क्रेडिट बाबा को ही दिया। उन्होंने यह बताने की भी कोशिश की है कि बीजेपी दलित विरोधी नहीं, बल्कि बाबा साहब के आदर्शों पर चलने वाली पार्टी है। जाहिर है कि छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसे आदिवासी इलाके जांगला में जय भीम के नारे के साथ उनके भाषण की शुरूआत और बाबा साहब की बातें बस्तर या छत्तीसगढ़ के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए था। 

छत्तीसगढ़ की नक्सल समस्या पर उन्होंने कड़े लेकिन टचिंग अंदाज में अपनी बात रखी। कड़ा इसलिए क्योंकि उन्होंने एक तरह से माओवादियों की पोल खोल दी। उनका सीधी मकसद यह था कि बाहरी लोग यानी आदिवासियों को (जो भोलेभाले माने जाते हैं) भ्रमित कर रहे हैं और मरने के लिए छोड़ रहे हैं। टचिंग इसलिए था कि उन्होंने बताया कि माओवादी न तो आपके समाज के हैं और न ही आपके इलाके के हैं। उनके अपने निजी स्वार्थ हैं। आपके हितों से उनका कोई लेना देना नहीं है। हम यानी सरकारें आपकी बात करते हैं, जाहिर है कि आपसे हमारा जुड़ाव है। विकास से जुड़ने की अपील कर उन्होंने सरकार के लिए समर्थन मांगा है, क्योंकि सरकार स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और सड़क जैसी सुविधाओं के जरिए उनका विकास करना चाहती है। 

आदिवासी इलाके में इतने बड़े आयोजन के पीछे यह एक संदेश राजनीतिक भी है। दरअसल, आदिवासियों के पास पिछले कुछ बरसों से माओवादी ही एक विकल्प के रूप में नजर आ रहे हैं। इलाके के स्थानीय जनप्रतिनिधि लगातार आदिवासियों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में मोदी का वहां जाना स्थानीय जनप्रतिनिधियों को संदेश हैं उन्हें आदिवासियों के साथ समाज, परिवार की तरह खड़ा होना पड़ेगा। 

छत्तीसगढ़ के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर मोदी ने साफ संकेत दिया कि प्रदेश में फिलहाल डॉ रमन सिंह ही एकमात्र विकल्प हैं। प्रदेश में किसी तरह की उठापटक की गुंजाइश न अभी है और न ही चुनाव के बाद। उन्होंने रमन सिंह को जहां लोकप्रिय मुख्यमंत्री कहा, वहीं उनके कामकाज की भी जमकर तारीफ की। उनके इस बात रमन विरोधियों को जरूर झटका लग सकता है।

 

समरेन्द्र शर्मा, कंटेंट हेड, IBC24


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