रायपुर News

छत्तीसगढ़ में राहुल गांधी की आपात लैंडिंग के पीछे पार्टी के अंदरखाने को बड़ा संदेश

Created at - April 16, 2018, 3:15 pm
Modified at - April 16, 2018, 3:15 pm

रायपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरे पर बीजेपी ने चुटकी ली है कि जब-जब वे प्रदेश के प्रवास पर आते हैं, तब-तब प्रदेश कांग्रेस के नेता आपस में लड़ते हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष धरम लाल कौशिक ने भले ही विपक्षी दल पर निशाना साधने के लिहाज से यह बयान दिया हुआ, लेकिन कांग्रेस के अंदरखाने से जो खबरें आ रही है, उससे तो बीजेपी की चुटकी में सच्चाई नजर आ रही है। प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी की अचानक लैंडिंग डैमेज कंट्रोल का हिस्सा है, वरना उनका छत्तीसगढ़ आने का कार्यक्रम फिलहाल नहीं था, लेकिन ऐन चुनाव के वक्त पीसीसी के बड़े नेताओं की खींचतान के कारण उन्होंने 24 अप्रैल को छत्तीसगढ़ आने का कार्यक्रम बनाया। ऐसा माना जा रहा है कि वे अपने इस कार्यक्रम के जरिए कांग्रेसियों को एकला चलो की राजनीति और अहम को छोड़कर पार्टी हित में काम करने की घुट्टी पिलाने आ रहे हैं। 

छत्तीसगढ़ में इस साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। बीजेपी चौथी बार सरकार बनाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है। बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व की प्रदेश पर पैनी नजर है। ऐसे में छत्तीसगढ़ कांग्रेस की चुनावी तैयारी कमजोर पड़ती नजर आती है। हालांकि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व का छत्तीसगढ़ के प्रति गंभीरता का अंदाजा पिछले कुछ महीनों की गतिविधियों से लगाया जा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश में कांग्रेस की गुटबाजी और बड़े नेताओं के बीच मतभेद को भांपकर साल भर पहले ही विभिन्न समितियों का गठन कर कामकाज बांट दिया है। सभी बड़े नेताओं को महत्व देने के संदेश के साथ नए को भी आगे बढ़ाया गया है, ताकि बड़े नेता आपसी लड़ाई से ऊबर कर अपने काम में ध्यान लगाएं। लेकिन दिल्ली की यह कोशिश सफल होते नहीं दिख रही है। 

यह भी पढ़ें - मुस्लिम समुदाय ने नहीं तोड़ा 'राम मंदिर' बनाने के लिए बनना होगा राम - भागवत

पीसीसी नेताओं की मानें तो पिछले दिनों बड़े नेताओं के बीच खटपट की भनक दिल्ली को लग गई है। उसमें चुनाव अभियान समिति की बैठक में पीसीसी चीफ भूपेश बघेल और पूर्व केन्द्रीय मंत्री की बीच तनातनी प्रमुख है। माना जा रहा है कि दोनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई काफी समय से चल रही है और गाहे बगाहे बैठकों में देखने को मिलती है। बघेल के पीछे दो कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति से भी उनकी भौंहे टेढ़ी हुई है। पार्टी के फैसलों पर दोनों कार्यकारी अध्यक्ष और अध्यक्ष के बीच टकराहट की गूंज सुनाई देती रहती है। 

प्रदेश नेताओं की खटपट ने राष्ट्रीय नेतृत्व के कान खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि राहुल गांधी का चार राज्यों के पंचायती राज्य सम्मेलन के लिए आनन फानन में रायपुर का कार्यक्रम बनाया गया। इसमें कोई दो राय नहीं कि वे यहां कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करने के लिए आ रहे हैं, लेकिन इसके पीछे वे प्रदेश नेताओं को एकजुट रहने की नसीहत दे सकते हैं, ताकि जो चर्चा पार्टी के भीतर और सत्ताधारी दल से निकल कर रही है, उसे रोका जा सके।

वेब डेस्क, IBC24


Download IBC24 Mobile Apps

Trending News

IBC24 SwarnaSharda Scholarship 2018

Related News