जनता मांगे हिसाब में छत्तीसगढ़ की प्रेमनगर विधानसभा सीट का मिजाज

Reported By: Aman Verma, Edited By: Aman Verma

Published on 16 Apr 2018 05:04 PM, Updated On 16 Apr 2018 05:04 PM

आईबीसी24 के खास कार्यक्रम जनता मांगे हिसाब में चुनावी साल में हमने छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के सभी विधानसभाओं की जमीनी हालात से आपको रूबरू होने का बीड़ा उठाया है। आज हम बात करेंगे सूरजपुर जिले की विधानसभा नंबर चार प्रेमनगर की जो पहले सूरजपुर का ही हिस्सा था। आजादी के बाद 1967 मे अस्तित्व में आई यह विधानसभा अपने गठन के बाद से आदिवासियों के लिए आरक्षित था। लेकिन 2007 के परिसीमन के बाद प्रेमनगर सीट सामान्य के लिए आरक्षित हो गया लेकिन वर्तमान में यहां आदिवासी विधायक ही काबिज है। प्रेमनगर विधान सभा अढाई विकासखण्ड को मिलाकर बनाया गया जिसमें प्रेमनगर, रामानूजनगर और सूजरपुर का आधा हिस्सा शामिल है। 

 

प्रेमनगर की भौगोलिक स्थिती....

प्रेमनगर विधानसभा कोयले की खदानों से घिरा हुआ

घने जंगलों से आच्छादित

वनोपज से भरा और कई पर्यटन स्थल शामिल है। 

इस विधानसभा में एक नगर पालिका सूरजपुर दो नगर पंचायतें विश्रामपुर व प्रेमनगर हैं।

इनके अलावा रामानुजनगर विकासखण्ड की 73 ग्राम पंचायतें प्रेमनगर ब्लॉक की 45 और सूरजपुर का आधा हिस्सा इसी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं ।

विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार प्रेमनगर में मतदाताओं की संख्या दो लाख चार हजार है। 

 

 

प्रेमनगर विधानसभा की सियासत 

प्रेमनगर नाम की ये विधान सभा सीट 1967 में अस्तित्व में आई तब से आज तक के तमाम विधानसभा चुनाव पर एक नजर डालते है। 1967 से 1972 तक सहदेव सिंह, जनसंघ से 1972 से 1977 तक भूनेश्वर सिंह, जनसंघ से 1977 से 1980 तक सहदेव सिंह, जनता पार्टी से 1980 से 1985 तक चंदन कांग्रेस से 1985 से 1990 तक तूलेश्वर सिंह भाजपा 1990 से 1991 तक सेखेलसाय सिंह, इसी बीच खेलसाय के लोकसभा में चले जाने के कारण 1991 में फिर विधान सभा चुनाव हूआ। जिसमे 1991 से 1993 तक निरंजन सिंह भाजपा से 1993 से 1998 तक तूलेश्वर सिंह कांग्रेस से 1998 से 2003 तक तूलेश्वर सिंह कांग्रेस से 2003 से 2008 तक रेणूका सिंह भाजपा से 2008 से 2013 तक रेणूका सिंह भाजपा से विधायक पद पर काबिज है। 2013 से अब तक कांग्रेस के खेल साय सिंह विधायकी कर रहे हैं। अब तक हुए कुल बारह विधान सभा चुनावों में से सात बार भाजपा ने इस सीट पर जीत हासिल की, जबकी पांच बार कांग्रेस ने इस सीट की कमान संभालीं है। उस लिहाज से माना जाये तो इस सीट पर भजपा का पलड़ा भारी रहा है। लेनिक वर्तमान में कांग्रेस का कब्जा हैे। परिसीमन के बाद सामान्य सीट होने के बावजूद 2008 और 2013 के चुनाव में आदिवासी महिला को टिकट देकर पार्टी ने प्रेमनगर की विधायक रेणूका सिंह पर ही विश्वास जताया था। जिससे सामान्य कोटे के दावेदारो की उम्मीद पर पानी फिर गया था, कांग्रेस की बात करें तो जिले के दोनांे सामान्य सीट में एक पर पैलेस का वर्चस्व कायम रखने की पूरी तैयारी कर ली गई है तो वही भाजपा से पूर्व पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष भीमसेन अग्रवाल, बाबुलाल अग्रवाल और भाजपा जिला अध्यक्ष सामान्य कोटे के प्रबंल दावेदार हैै। जबकी कांग्रेस से वर्तमान विधायक खेल साय सिंह का ही इस सीट से लड़ना तय माना जा रहा है, हालांकी उम्रदराज होने के कारण वे खुद चाहें तब दुसरे का नम्बर आ सकता है। प्रेमनगर सीट के सियासी इतिहास की बात की जाए तो यहां हमेशा से ही कांग्रेस भाजपा में कड़ी टक्कर रही है ..यहां का जाति समीकरण भी नतीजों पर असर डालता रहा है, लिहाजा एक बार फिर दोनों पार्टियां सारे सिसासी गणित को साधने की कोशिश में जुट गईं हैं..विधानसभा चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहा है.. सियासी पैंतरेबाजी भी जोर पकड़ने लगी है।

 

प्रेमनगर विधानसभा के प्रमुख मुद्दे 

सूरजपुर जिले के प्रेमनगर विधानसभा में वैसे तो कई ऐसी गंभीर समस्याएं हैं, जो आने वाले चुनाव में मुद्दे बनकर गूंजेंगे, लेकिन यहां की जनता की सबसे बड़ी शिकायत है। कि वो अपने विधायक खेलसाय सिंह से मिल नहीं पाते, प्रेमनगर विधानसभा क्षेत्र में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो उनके कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं। यहां गांवों और कस्बों में लोग खुलेआम कहते हैं कि विधायक सिर्फ वोट के वक्त आते हैं और उसके बाद उनका कोई अता पता नहीं रहता..ऐसे में लोगों का ये गुस्सा आने वाले  चुनाव में उनके खिलाफ जा सकता है। .प्रेमनगर विधानसभा क्षेत्र में एक नगर पालिका सहित दो नगर पंचायत शामिल है..ऐसे में यहां बड़ा वर्ग शहरी मतदाताओँ का है..जो अपने विधायक से खासे नाराज नजर आ रहे हैं।

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वेब डेस्क, IBC24

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