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जनता मांगे हिसाब: IBC24 की चौपाल में भैंसदेही और देपालपुर की जनता ने मुखर की आवाज

Last Modified - April 17, 2018, 3:34 pm

IBC24 की खास पेशकश जनता मांगे हिसाब में भैंसदेही और देपालपुर की जनता अपन बात रखी. आइए जानते हैं दोनों विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख समस्याएें जिसे लेकर जनता परेशान हैं।

भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र की सियासत-

बैतूल जिले में आने वाली भैंसदेही विधानसभा की राजनीति भी बेहद दिलचस्प रही है...सीट पर वर्तमान में सत्तारुढ़ बीजेपी का कब्जा है..और महेंद्र सिंह चौहान विधायक हैं। सियासी समीकरण की बात करें तो आदिवासी बाहुल्य इलाके में दोनों पार्टियों में दावेदारों की लंबी कतार है। 

भैंसदेही विधानसभा..मध्यप्रदेश के उन सीटों में शामिल है..जो एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है..यहां की जनता ने अब तक किसी एक पार्टी पर भरोसा ना करते हुए बारी-बारी से सभी को मौका दिया है...यहां की जनता ने सबसे ज्यादा कांग्रेस के उम्मीदवार को 6 बार विधानसभा पहुंचाया ..इसके बाद बीजेपी को 5 बार जबकि जन संघ पार्टी, जनता पार्टी और बीजेएस को एक-एक बार मौका दिया...भैंसदेही विधानसभा की सियासी इतिहास की बात की जाए तो...1998 और 2003 में बीजेपी के महेंद्र सिंह चौहान यहां से चुनाव जीते..इसके बाद 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के धरमु सिंह ने महेंद्र सिंह को 6 हजार 384 मतों से मात दी..लेकिन 2013 में हुए चुनाव में महेंद्र सिंह चौहान ने कांग्रेस विधायक धरमु सिंह को 13 हजार 276 वोट से हराकर सीट पर वापस कब्जा किया...साल के आखिरी में होने वाले चुनाव के मद्देनजर यहां सियासी माहौल बनने लगा है....बीजेपी में जहां तीन बार के विधायक महेंद्र सिंह चौहान का नाम सबसे आगे है..वहीं नरेंद्र सिंह तोमर गुट से ताल्लुक रखने वाले वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष सूरज जावरकर और जिला महामंत्री श्रीराम भलावा भी बीजेपी से टिकट मिल सकता है।  

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के संभावित उम्मीदवारों की बात की जाए तो पूर्व विधायक धरमु सिंह का नाम सबसे आगे है। दूसरे नंबर पर पूर्व विधायक राहुल चौहान का नाम भी शामिल है। इसके कांग्रेस यहां से अजय शाह को अपना उम्मीदवार बना सकती है..दरअसल अजय शाह आदिवासियों के मुद्दे को लेकर काफी सक्रिय हैं..और आदिवासी समाज में उनकी छवि अच्छी है। 

जाहिर है दोनों की तरफ से दावदारों की लंबी लिस्ट है और इस लिस्ट में काट छांट करना ही पार्टी के आलाकमान का सबसे बड़ा सिरदर्द है ...और ये भी तय है कि शार्टलिस्टिंग में जो जितनी सावधानी बरतेगा ..भैंसदेही से उसके सफलता के चांस ज्यादा होंगे ।

भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

भैंसदेही में चुनावी साल में सियासी शोरगुल तो खूब सुनाई दे रहा है लेकिन इसी शोरगुल के बीच अब जनता मांग रही है हिसाब..क्योंकि हर बार चुनाव में वादे तो किए गए लेकिन भैंसदेही के हालत नहीं बदले...आज भी जनता कई समस्याओं से जूझ रही है । 

महाराष्ट्र की सीमा से लगा हुआ भैंसदेही आदिवासी बाहुल्य इलाका है..चारों और पहाड़ों से घिरा ये क्षत्र पर्यटन के लिहाज से भी काफी समृद्ध है...जैन समाज की तपोभूमि कहलाने वाले तीर्थस्तल मुक्तागिरी और कुकरू की मनोरम वादियां इस क्षेत्र को खास बनाती है..मध्य भारत का इकलौता काफी बागान भी यहीं है..इन सब खासियतों के बावजूद भैंसेदही में विकास की रफ्तार काफी सुस्त नजर आती है.

यहां की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है..जो हर बार चुनावी मुद्दा बनता है ..ग्रामीण रोजगार की तलाश में क्षेत्र से पलायन को मजबूर हैं..उच्च शिक्षा के साधन नहीं होने की वजह से यहां के छात्र-छात्राओं को मजबूरन पढ़ाई  छोड़नी पड़ती है। टीचरों की कमी से भी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बाधित होती है। वहीं क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय खोले जाने की मांग भी अब तक पूरी नहीं हुई है। जिसे लेकर कई बार आंदोलन किया जा चुका है। स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था और डॉक्टरों की कमी भी इलाके की बड़ी समस्या है...भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र में वन विभाग की लापरवाही की वजह से रोजाना दर्जनों की संख्या में पेड़ कट रहे हैं और घने जंगल वीरान से दिखने लगे है। कईं गांव ऐसे है जहां आज भी पक्की सड़के नहीं बनी है। कुल मिलाकर भैंसदेही में मुद्दों की कोई कमी नहीं है..और आने वाने विधानसभा चुनाव में नेताओं को जनता के मुद्दों को दरकिनार करना इतना आसान नहीं होगा। 

 

देपालपुर विधानसभा क्षेत्र 

अब बात करते हैं मध्यप्रदेश के देपालपुर विधानसभा की..सबसे पहले नजर डालते हैं यहां की भौगोलिक स्थिति पर

इंदौर जिले में आती है देपालपुर विधानसभा

कुल मतदाता- 2 लाख 22 हजार 144

पुरुष मतदाता- 1 लाख 17 हजार 356

महिला मतदाता- 1 लाख 8 हजार 866

क्षेत्र में होती है गेंहूं और सोयाबीन की बंपर पैदावार

बनोडिया जैन तीर्थ देपालपुर की पहचान

प्रदेश का सबसे बड़ा बनेडिया तालाब इलाके में स्थित

वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का है कब्जा

बीजेपी के मनोज पटेल हैं वर्तमान विधायक

देपालपुर विधानसभा क्षेत्र की सियासत

देपालपुर विधानसभा की सियासत की बात करें तो यहां हर चुनाव में दिलचस्प समीकरण बनते हैं...सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है..लेकिन कांग्रेस आगामी चुनाव में विधायक की नाकामियों को लेकर उतरने के लिए तैयार है..वहीं टिकट की रेस में जहां बीजेपी से वर्तमान विधायक मनोज पटेल का दावा सबसे मजबूत हैं..तो कांग्रेस में दावेदारों की लंबी कतार है

दो निकायों और दो तहसीलों को समेटे देपालपुर विधानसभा इंदौर जिले की एक अहम सीटों में से एक है। यहां की राजनीति ने प्रदेश को कई कद्दावर नेता दिए हैं.. इस सीट पर शुरू से ही बाहरी नेताओं का दबदबा रहा है लेकिन यहां किसी भी उम्मीदवार को तभी जीत मिलती है..जब उसे कलोता समाज के लोगों का आशीर्वाद मिलता है। पूरे देपालपुर विधानसभा क्षेत्र में कलोता समाज के 65 हजार से ज्यादा वोटर्स हैं..वहीं दूसरे नंबर पर राजपूत और गायरी समाज का आता है....देपालपुर के सियासी इतिहास की बात की जाए तो.. 2003 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के मनोज पटेल जीते.. 2008 के चुनाव में कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल ने जीत दर्ज की .. तो वहीं 2013 में फिर से बीजेपी से मनोज पटेल ने सीट पर कब्जा जमाया। 

अब जब चुनावी साल है ..तो यहां एक बार फिर सियासी माहौल गरमाने के साथ टिकट पाने की होड़ शुरू हो चुकी है..बीजेपी की बात करें तो वर्तमान विधायक मनोज पटेल का नाम सबसे पहले सामने आता है..मनोज सीएम शिवराज सिंह के सबसे चहेते विधायकों में से एक हैं। वहीं कांग्रेस से पूर्व मंत्री रामेश्वर पटेल के बेटे और पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल टिकट की दौड़ में सबसे आगे हैं..इसके अलावा विशाल पटेल और किसान नेता मोती सिंह पटेल का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है। 

दोनों पार्टियों में दावेदारों की संख्या कम नहीं है। अब देखने वाली बात ये होगी कि दोनों पार्टियां इस सीट को फतह करने के लिए किन नेताओं पर दांव लगाती हैं

देपालपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

देपालपुर में  मुद्दों की बात करें तो हर बार यहां की जनता से हर बार चुनाव से पहले वादे तो किए जाते हैं...लेकिन चुनाव के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि यहां नजर नहीं आता है..यही वजह है कि विकास केवल सरकारी फाइलों में ही नजर आता है. जाहिर है आने वाले चुनाव में भी यहां रोजगारी, स्वास्थ्य और दूसरी बुनियादी मुद्दे ही हावी रहेंगे। 

देपालपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता ने इस उम्मीद के साथ कि उनके इलाके का बेहतर विकास हो..कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टी के प्रतिनिधियों को चुनकर विधानसभा भेजा..लेकिन कोई भी नेता देपालपुर की जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा...यहां मूलभूत समस्याओं के साथ रोड कनेक्टिविटी बड़ी समस्या है..वहीं बेहतर शिक्षा व्यवस्था और कॉलेज में शिक्षकों की कमी की वजह से छात्रों को बड़े शहरों का रूख करना पड़ता है। बेरोजगारी भी क्षेत्र में एक बड़ी परेशानी बनी हुई है.. युवा रोजगार की तलाश में इंदौर और आसपास के बड़े शहरों की ओर पलायन को मजबूर हैं। सफाई को लेकर भी स्थानीय प्रशासन निष्क्रिय नजर आता है स्थानीय लोगों की मानें तो महीनों नालियों की सफाई नहीं होती..इसके अलावा देपालपुर विधानसभा का बस स्टैंड अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है। पेय जल की किल्लत भी देपालपुर की जनता के लिए परेशानी का सबब बन गया है। क्षेत्र में प्रदेश का सबसे बड़ा बनेडिया तालाब होने के बावजूद भी क्षेत्र पानी की किल्ल्तों से दो चार हो रहा है। 18 सौ एकड़ में फैले बनेडिया जलाशय की गहराई 12 फिट से अब 6 फीट ही रह गई जिससे वाटर लेवल कम होने की समस्या भी सामने है। स्थानीय लोगों की माने तो किसी भी पार्टी के नेताओं चाहे वह कांग्रेस से हो या भारतीय जनता पार्टी से पर केवल चुनाव के समय ही वह उन्हें उपलब्ध हो पाते हैं उसके बाद समस्याओं को लेकर किसी का ध्यान जनता की तरफ नहीं रहता। 

 

वेब डेस्क, IBC24


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