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जनता मांगे हिसाब: IBC24 की चौपाल में रायगढ़ की जनता ने गिनाई अपनी समस्याएं

Last Modified - April 19, 2018, 4:49 pm

IBC24 की खास मुहिम 'जनता मांगे हिसाब' कार्यक्रम में बुधवार को छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नगरी रायगढ़ की जनता ने अपनी आवाज बुलंद की। जनता ने iBC24 के मंच पर अपनी समस्याओं और मुद्दों को सामने रखा।

रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र की औद्योगिक स्थिति

सबसे पहले बात करते हैं छत्तीसगढ़ की रायगढ़ विधानसभा की..

रायगढ़ जिले के अंतर्गत आती है सीट

जनसंख्या- 4 लाख 3 हजार 412

कुल मतदाता- 2 लाख 41 हजार 314

आदिवासी बाहुल्य इलाका

40 वर्ग किमी में फैला है रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र

केलो नदी है रायगढ़ की जीवनदायिनी नदी

जिंदल, अडानी, हिंडाल्को, एनटीपीसी जैसी दर्जन भर पावर और स्टील कंपनियां

चौहान व सतनामी समाज के वोटरों की संख्या तकरीबन 25 फीसदी

वर्तमान में सीट पर बीजेपी का कब्जा

बीजेपी के रोशनलाल अग्रवाल हैं वर्तमान विधायक 

रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र की सियासत

रायगढ़ की राजनीति की बात करें तो..कभी ये सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था..लेकिन 2003 और फिर 2013 के चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस के इस किले में सेंध लगाने में कामयाब हुई..वर्तमान में बीजेपी के रोशनलाल अग्रवाल यहां से विधायक हैं..अब जब चुनाव में कुछ महीनों का वक्त बचा है ..तो बीजेपी और कांग्रेस के नेता सक्रिय नजर आ रहे हैं..हालांकि इस बार दोनों पार्टियों के लिए जनता कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार चुनौती देने के लिए तैयार हैं। 

रायगढ़ विधानसभा में इस बार बीजेपी और कांग्रेस के अलावा जनता कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी ताल ठोकने के लिए तैयार है..छत्तीसगढ़ की इस महत्वपूर्ण विधानसभा सीट पर वर्तमान में बीजेपी का कब्जा है.. वैसे तो रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है..लेकिन बीजेपी ने पहले 2003 और फिर 2013 में इसमें सेंध लगाने में कामयाबी हासिल की। 

रायगढ़ के सियासी इतिहास की बात की जाए तो ..1952 में यहां से कांग्रेस के बैजनाथ मोदी विधायक चुने गए ...1957 में रामकुमार अग्रवाल ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता...इसके बाद 1962 के चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की और निरंजन लाल शर्मा ने चुनाव जीता...1967 में रामकुमार अग्रवाल ने एक बार फिर प्रजासोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता..लेकिन 1972 और 1977 का चुनाव उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीता ...इसके बाद 1980 से 1998 तक कुष्ण कुमार गुप्ता ने कांग्रेस के टिकट पर लगातार पांच चुनाव यहां से जीते ...

लेकिन राज्य बनने के बाद 2003 में भाजपा ने पहली बार कांग्रेस के इस किले में सेंध लगाई ...और विजय अग्रवाल ने कृष्ण कुमार गुप्ता को मात दी .. 2008 में परिसीमन के बाद यहां के सियासी समीकरण बदल गए ..सरिया विधानसभा को विलोपित कर रायगढ़ में मिला दिया गया ..और कांग्रेस ने शक्राजीत नायक ने विजय अग्रवाल को मात देकर एक बार फिर ये सीट कांग्रेस की झोली में डाल दी .. 2013 में एक बार फिर जनता ने भाजपा पर भरोसा जताया और रोशनलाल अग्रवाल को 20 हजार से अधिक वोटों से जीत दिलाई। लेकिन इस बार बीजेपी के लिए जीत की राह आसान नहीं होगी क्योंकि जनता कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी मे हैं। अगर दावेदारों की बात करें तो भाजपा से वर्तमान विधायक रोशनलाल अग्रवाल तो टिकट की दौड में हैं इसके अलावा महामंत्री उमेश अग्रवाल भी टिकट की दौड में सबसे आगे हैं। वहीं जिला भाजपा अध्यक्ष जवाहर नायक भी इस सीट से चुनाव लडने के मूड में है। कोलता समाज से डा प्रकाश नायक और विलीश गुप्ता की भी दावेदारी है। वहीं कांग्रेस से डॉक्टर राजू अग्रवाल, प्रकाश नायक और दिलीप पांडेय के नामों की चर्चा है। जबकि जनता कांग्रेस ने विभाष सिंह को इस सीट से प्रत्याशी पहले ही घोषित कर दिया है। आम आदमी पार्टी से भी राजेश त्रिपाठी और विनय पांडेय टिकट की दौड में हैं। ऐसे में इस विधानसभा सीट में इस बार घमासान मचना तय है।

रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

रायगढ़ विधानसभा में मुद्दों की बात करें तो.. पावर हब के रुप में तेजी से विकसित हुए इस क्षेत्र में वक्त के साथ समस्याएं भी बढी है। उदयोगों के स्थापना के बाद यहां विकास नजर आता है लेकिन प्रदूषण से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। इसके अलावा यहां सड़क, पेयजल  जैसे मूलभूत समस्याएं बनी हुई है.. जाहिर है आने वाले चुनाव में इन मुद्दों की गूंज जरूर सुनाई देगी

रायगढ़..जिसकी पहचान आज एक पावर हब के तौर पर होती है..यहां विकास तो नजर आता है..लेकिन उस विकास की कीमत यहां की जनता को लगातार चुकानी पड़ रही है.. दरअसल विकास के नाम पर यहां जमकर उद्योगों की स्थापना की गई है..जिससे निकलने वाले धुएं से रायगढ़ में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। हालांकि प्रदूषण बढ़ाने में उन खस्ताहाल सड़कों का भी काफी योगदान है..जिनपर कई सालों से निर्माण कार्य चल रहा है। सारंगढ़ से सराईपाली तक जाने वाली एनएच 216 की हालत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है..  तीन साल पहले इसका निर्माण शुरू हुआ था..जो आज तक 50 फीसदी भी पूरा नहीं हो पाया है। यहां सडक हादसे के मामले भी  लगातार बढ़ रहे हैं। साल 2017 में सिर्फ सडक हादसे मे मरने वालों की संख्या 235 थी । इसके अलावा आदिवासी किसानों की जमीनों की बेनामी खरीदी बिक्री का मामला यहां प्रमुख चुनावी मुद्दा बनता नजर आ रहा है। 

रायगढ़ में किसानों के लिए सिंचाई सुविधा भी अब तक पूरी नहीं हो पाई है।  2010 में केलो नदी पर 596 करोड की लागत से प्रस्तावित केलो डेम की लागत आज बढकर 920 करोड हो चुकी है.... पर अब तक केलो डेम की नहरें तैयार नहीं हो पाई है। 

उद्योगों के नाम पर किसानों से बडे पैमाने पर जमीन का अधिग्रहण किया लेकिन उन्हें रोजगार और उचित मुआवजे के साथ बोनस की राशि भी नही मिली। किसानों को चिट फंड कंपनियो ने भी 500 करोड से अधिक की चपत लगाई है लेकिन उस पर भी शासन प्रशासन कोई हल नही कर पाई। जिले में बेरोजगारी भी एक बडी समस्या है।  बडी संख्या में युवा बेरोजगार  रोजगार की आस में पलायन करने को मजबूर हैं।  इसके अलावा शहरी क्षेत्रो में ओडीएफ निर्माण के नाम पर हुआ फर्जीवाडा और सफाई की कमी की वजह से बडे पैमाने पर फैला डेंगू इस बार लोगों की शिकायत और चुनावी मुद्दा बनेगा.इसकी पूरी संभावना है।  

 

वेब डेस्क, IBC24


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