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जनता मांगे हिसाब: IBC24 की चौपाल में मरवाही की जनता ने मुखर की आवाज

Last Modified - April 20, 2018, 9:46 pm

मरवाही विधानसभा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति

कार्यक्रम की शुरूआत करते हैं..छत्तीसगढ़ की मरवाही विधानसभा सीट से..मरवाही में क्या है मौजूदा सियासी समीकरण और कौन से ऐसे मुद्दे हैं..जो आने वाले चुनाव में गूंजेंगे..लेकिन सबसे पहले आपको इस सीट की भौगोलिक स्थिति पर नजर डाल लेते हैं।  

बिलासपुर जिले में आती है मरवाही विधानसभा

ST वर्ग के लिए आरक्षित है सीट

क्षेत्रफल- करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर 

जनसंख्या- करीब 3 लाख

कुल मतदाता-  1 लाख 79 हजार 413 

पुरुष मतदाता- 88 हजार 732

महिला मतदाता- 90 हजार 764

पुरुषों की तुलना में महिला वोटर्स की संख्या ज्यादा

गोंड़, कंवर, आदिवासी समाज के लोगों की संख्या ज्यादा 

वर्तमान में सीट पर कांग्रेस का कब्जा

कांग्रेस के अमित जोगी हैं विधायक 

मरवाही विधानसभा क्षेत्र की सियासत

कहते हैं जब अजीत जोगी राज्य के मुख्यमंत्री थे तब मरवाही को वीआईपी विधानसभा क्षेत्र का दर्जा हासिल था ...मरवाही में हमेशा से जोगी परिवार का जादू चलता है..और बीजेपी इस जादू को तोड़ने की अब तक नाकाम रही है ...बीजेपी को यहां इकलौती जीत 1998 में रामदयाल उइके  ने दिलाई थी..जो बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए.. अब जब अजीत जोगी कांग्रेस छोड़कर अपनी अलग पार्टी बना चुके हैं..ऐसे में मरवाही के वोटर्स के सामने असमंजस की स्थिति है कि वो किसे वोट दें..लेकिन इतना तो तय है कि इस बार मरवाही में मुकाबला त्रिकोणीय होगा। 

मरवाही विधानसभा क्षेत्र.. देखने में भले ही बिल्कुल साधारण सा लगे ..लेकिन ये है बेहद खास..खास इसलिए क्योंकि ये कभी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का विधानसभा क्षेत्र हुआ करता था..

यदि मरवाही विधानसभा क्षेत्र के इतिहास की बात की जाए तो  एक बड़ा दिलचस्प तथ्य निकलकर आता है ..मरवाही दलबदलू विधायकों का क्षेत्र रहा है ..इसकी शुरूआत बड़े आदिवासी नेता भंवर सिंह पोर्ते से ही हो जाती है ...जिन्होंने 1972 ,1977 और 1980 के चुनाव जीत कर हैट्रिक लगाई ..लेकिन 1985 में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया और कांग्रेस के दीनदयाल ने ये चुनाव जीता..अपनी टिकट कटने से नाराज भंवर सिंह ने 1990 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते भी ...लेकिन 1993 में एक बार फिर उनका टिकट कटा हालांकि ये चुनाव कांग्रेस के पहलवान सिंह मरावी ने जीता...भंवर सिंह पोर्ते टिकट कटने की वजह से भाजपा से भी रूठ गए और 1998 का चुनाव उन्होंने निर्दलीय लड़ा लेकिन वो बुरी तरह से हारे ये चुनाव भाजपा के रामदयाल उइके ने जीता ....लेकिन राज्य बनने के बाद 2001 में एक हेरतअंगेज सियासी घटना के तहत रामदयाल उइके न  केवल कांग्रेस में शामिल हो गए बल्कि इस्तीफा देकर ये सीट अजीत जोगी के लिए छोड़ दी...फिर अजीत जोगी इस सीट पर लगातार तीन बार विधायक चुने गए..वहीं 2013 की बात करें तो अमित जोगी ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा..और बीजेपी की समीरा पैंकरा को 46हजार250 वोटों से हराया। लेकिन अब जब अमित जोगी जेसीसीजे में शामिल हो गए हैं..यानी मरवाही का वोटर जो अबतक जोगी परिवार के नाम पर कांग्रेस को वोट देते थे..वो थोड़ा कन्फ्यूज जरूर होंगे कि किसे वोट दें...दूसरी तरफ बीजेपी इस सीट को जीतने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना शुरू कर दिया है..पार्टी ने इसके लिए 

कददावर भाजपा नेता स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव को मरवाही का प्रभारी बनाया है...प्रबल प्रताप सिंह मरवाही में सघन जनसंपर्क शुरू कर रहे हैं गांव गांव जाकर लोगों को सरकार की नीतियों और योजनाओं की भारतीय जनता पार्टी के पक्ष मे माहौल बनाने का काम कर रहे हैं।

बीजेपी भले ये दावा करे कि मरवाही में अब उसके पक्ष में माहौल बन रहा है..लेकिन आंकड़ें बताते हैं कि क्षेत्र की जनता ने हमेशा यहां पर जोगी परिवार और कांग्रेस का साथ दिया है..कुल मिलाकर कांग्रेस से अलग होकर जेसीसीजे के चुनावी मैदान में उतरने से इस बार मरवाही के मुकाबला को त्रिकोणीय जरूर बना दिया है। 

मरवाही विधानसभा क्षेत्र के मुद्दे

मरवाही में चुनावी साल में सियासी शोरगुल तो खूब सुनाई दे रहा है लेकिन इसी शोरगुल के बीच अब जनता मांग रही है हिसाब..क्योंकि हर बार चुनाव में वादे तो किए गए लेकिन मरवाही के हालत नहीं बदले...यहां के लोगों की सबसे आज भी जनता कई समस्याओं से जूझ रही है..इन मुद्दों में मरवाही को अलग जिला बनाने की मांग और मौजूदा विधायक की निष्क्रियता बड़े मुद्दे हैं। 

मरवाही की जनता लंबे समय तक जोगी परिवार के सदस्य को अपना जनप्रतिनिधि चुनती आई है..पहले पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और 

फिर उनके पुत्र अमित जोगी को अपना नेता चुना..लेकिन आज तक क्षेत्र की जनता को उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला...आज भी यहां के लोग स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं .. प्रशासनिक निरंकुशता और भ्रष्टाचार को लेकर भी स्थानीय जनता अधिकारियों से नाराज है..जिसका खामियाजा आने वाले चुनाव में नेताजी को भुगतना पड़ सकता है। सोन नदी में डायवर्सन के अलावा मरवाही में कॉलेज भवन और करीब चार एनीकट और  एक दर्जन से अधिक स्टाप डेम भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है जिसके कारण जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिला...वहीं 2016 से मरवाही क्षेत्र के लगातार सूखा घोषित होने के बावजूद किसानों को सूखा राहत राशि मिलने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरवाही को अलग जिला बनाने की मांग भी बरसों से रही है..जिसे लेकर अब तक लोगों को आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला है। वहीं वर्तमान विधायक अमित जोगी के बिलासपुर रायपुर में रहने और कभी कभार ही मरवाही आने को लेकर मेहमान विधायक का भी मुददा विपक्षी नेताओं की ओर से बनाया जा सकता है।

 

वेब डेस्क, IBC24


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