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पत्थलगड़ी पर कांग्रेस की ये कैसी सियासी मजबूरी...?

Created at - April 26, 2018, 6:22 pm
Modified at - April 26, 2018, 6:29 pm

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के गांवों में पत्थलगड़ी ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। यह मसला चुनावी बरस में सामने आया है, लिहाजा इस पर राजनीति तो होनी ही है, लेकिन इस मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस अपनी अस्पष्ट राय के कारण घिरती नजर आ रही है। कांग्रेस पत्थलगड़ी का न तो समर्थन कर पा रही है और न ही विरोध। यह आदिवासियों का उठाया कदम है। स्वाभाविक है, अगर कांग्रेस विरोध करती है, तो आदिवासी समाज की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा और वोट बैंक पर असर पड़ेगा। यदि समर्थन करती है, तो देश के संविधान की मुखालफत होगी। कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी के सामने विचित्र सियासी दुविधा की स्थिति बन गई है। बावजूद इसके कांग्रेस को बेबाक और साफगोई से अपना पक्ष रखना चाहिए, ताकि वाकई आदिवासी हितों की रक्षा हो सके। 

इस मसले पर कांग्रेस के नेताओं के कई बयान सामने आए। कांग्रेस के आदिवासी नेताओं से लेकर पीसीसी के अध्यक्ष भूपेश बघेल और मीडिया विभाग ने अपना पक्ष रखा। विपक्ष में होने के नाते उनकी मजबूरी यह है कि उन्हें सरकार की आलोचना करनी है। लिहाजा, इस मसले पर भी सरकार पर जमकर निशाना साधा जा रहा है। उनका कहना था कि राज्य सरकार की नाकामियों के कारण यह स्थिति बनी है और कांग्रेस आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनके साथ है। कांग्रेस नेताओं के ऐसे अस्पष्ट बयानों ( हालांकि वोट बैंक को साधने के चक्कर में सोच समझकर दिया गया बयान) का सामान्यतौर पर यह मतलब निकाला जा सकता है कि कांग्रेस पत्थलगड़ी के समर्थन है, लेकिन कांग्रेस को इस पर आपत्ति है, क्योंकि इससे संविधान को नहीं मानने के आरोप लग सकते हैं।कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने मीडिया को इस मसले पर ताबड़तोड़ बयान जारी किए। उन्होंने पत्थलगड़ी शब्द का उपयोग किए बिना किसी भी असंवैधानिक मुहिम का विरोध किया। इससे ज्यादा उन्होंने सरकार पर निशाना साधा। जब उनसे यह सवाल किया गया कि कांग्रेस पत्थलगड़ी को संवैधानिक मानती है या असंवैधानिक, तो उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया। 

सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कह दिया कि गैरलोकतांत्रिक तरीके से उठाए गए किसी भी कदम पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पत्थलगड़ी जैसे कदम के पीछे के कारणों पर अलग से बहस और विरोध किया जा सकता है, लेकिन वोट बैंक के नुकसान की आशंका में कांग्रेस की अस्पष्ट राय न केवल समाज, देश और लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने भी माना है कि पत्थलगड़ी की घटना विचलित करने वाली है और खतरनाक संकेत हैं। ऐसे में कांग्रेस को जिम्मेदार विपक्ष होने के नाते इस घटना पर संज्ञान लेने की आवश्यकता है। सरकार पर दबाव बनाना चाहिए कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए इस पर कार्रवाई की जाए। राजनीतिक नफा नुकसान के लिहाज से लिए गए कांग्रेस के ऐसे अस्पष्ट स्टैंड से इस बात की भी आशंका हो सकती है कि प्रदेश के दूसरे इलाकों में इसका विस्तार हो। यह केवल राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप का मसला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की अस्मिता का  सवाल है। इस बात से इंकार नहीं कि ग्राम सभाओं को सशक्त बनाया जाए, लेकिन उनको मजबूत बनाने के लिए प्रजातंत्र और संविधान में प्रावधान किए गए हैं। महात्मा गांधी ने भी इस बात पर जोर दिया था कि लोकतंत्र में संसद और विधानसभाओं से ज्यादा सशक्त ग्राम सभा है। कांग्रेस के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी ने भी पंचायती राज को सशक्त बनाने पर जोर दिया। हमारे सामने नक्सलवाद का उदाहरण है। जिसमें आम जनमानस भी यह मानता है कि राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप और इच्छा शक्ति में कमी के कारण लगातार इसका विस्तार हो रहा है। ऐसी स्थिति परिस्थितियों के बावजूद कांग्रेस पत्थलगड़ी पर स्पष्टता के साथ अपना पक्ष रखने के बजाए इस पर उलझन ही पैदा करते दिखाई पड़ रही है। बघेल से दूसरे दिन भी मीडिया ने इस मुद्दे पर सीधा सवाल किया गया तो बचने की कोशिश करते रहे और सरकार से ही स्पष्टीकरण मांग लिया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस किसके समर्थन में यह बाद की बात है। ऐसे गंभीर मसले में केवल राजनीतिक विरोध सूबे और आदिवासियों के हितों के लिए कतई उचित माना नहीं जा सकता।

समरेन्द्र शर्मा, कंटेंट हेड, IBC24


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