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सीजीएमएससी में फर्जीवाड़ा, कंपनी के गठन से पहले के टर्न ओवर के आधार पर लाखों-करोड़ों का ठेका

Created at - May 4, 2018, 12:24 pm
Modified at - May 4, 2018, 12:24 pm

रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन में उपकरणों के ठेका में फर्जीवाड़ा सामने आया है। बताया जा रहा है कि ऐसी कंपनियों को ठेका दिया गया जिसने टर्नओवर के फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए। दिलचस्प बात यह है कि ठेका हासिल करने वाली कंपनी साल 2017 में अस्तित्व में आई थी, लेकिन उसने साल 2016 का टर्नओवर सर्टिफिकेट भी जमा किया था। फोरेसिंक जांच में इस गड़बड़ी की पुष्टि हो गई है। कॉर्पोरेशन के एमडी का कहना है कि इस मामले की जांच चल रही है। 

मिली जानकारी के मुताबिक मोक्षित कॉरपोरेशन और सीबी कारपोरेशन पार्टनरशिप फर्म्स हैं। इन फर्मो का गठन मई 2017 में हुआ था, लेकिन उनके द्वारा दिए गए टर्न ओवर सर्टिफिकेट में फर्म के गठन से पूर्व के वित्तीय वर्ष 2016-17 का टर्न ओवर दिखाया गया है। इस संदेह की पुष्टि के लिए टर्न ओवर सर्टिफिकेट की सॉफ्ट और हार्ड कॉपीज़ को फॉरेंसिक एक्सपर्ट के पास जांच के लिए भेजा गया।

जिसमें एक सर्टिफिकेट में फर्म के नाम के लिए इस्तेमाल फॉन्ट, अन्य फॉन्ट से भिन्न दिखने के कारण सीबी कारपोरेशन का टर्न ओवर सर्टिफिकेट प्रथमदृष्टया संदेहास्पद माना गया। संदेहास्पद मानने के पीछे कारण यह था कि हैंडराइटिंग के सिद्धांत के मुताबिक ‘कोई भी व्यक्ति अपने ही हस्ताक्षर की हूबहू नकल नही कर सकता, व्यक्ति के हस्ताक्षर में छिटपुट भिन्नताएं होती हैं, अपने ही हस्ताक्षर को ज्यामितीय अनुपात में छोटा या बड़ा करना असंभव है। इसी सिद्धांत के आधार पर सर्टिफिकेट की जांच की गई।

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जांच में पाया गया कि सीबी कॉरपोरेशन का सर्टिफिकेट मोक्षित कारपोरेशन के टर्न ओवर सर्टिफिकेट की कंप्यूटर से बनाई गई कॉपी है, अर्थात फ़र्ज़ी है। हैंडराइटिंग एक्सपर्ट ने जांच रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि सीबी कॉरपोरेशन को चार्टेड अकाउंटेंट द्वारा जारी सर्टिफिकेट में भी उनके ये हस्ताक्षर नही पाए जा सकते। इससे यह स्पष्ट था कि सीबी कारपोरेशन को जारी सर्टिफिकेट कूटरचित था।

फॉरेंसिक एक्पर्ट की रिपोर्ट के साथ इसकी शिकायत सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक को की गई जिन्होंने मामला निविदा क्रय समिति को सौप दिया। निविदा क्रय समिति ने फर्मों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की जांच सरकारी जांच एजेंसियों से कराने की सिफारिश की। आरोप है कि इस फर्जीवाड़े में लीपापोती की गई है।

आरोप यह भी है कि इन दोनों फर्मों को निविदा में पात्र बनाने के लिए नियम-शर्तों में फेरबदल किये गए थे। एक निविदा में मोक्षित कारपोरेशन को इसी टर्न ओवर सर्टिफिकेट के आधार पर अयोग्य घोषित किया गया था पर आश्चर्यजनक रूप से उसके पूर्व की और बाद कि निविदाओं में अयोग्यता के कारण को लागू नही किया गया।

वहीं इस बारे में जब सीजीएमएससी के एमडी रामाराव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जांच चल रही है।

वेब डेस्क, IBC24


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