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जनता मांगे हिसाब: बागली विधानसभा की जनता ने मांगा हिसाब

Created at - May 8, 2018, 5:06 pm
Modified at - May 8, 2018, 5:06 pm

और अब बात करते हैं मध्यप्रदेश की बागली विधानसभा सीट के सियासी समीकरण की ..लेकिन पहले सीट की भौगोलिक स्थिति पर एक नजर..

बागली विधानसभा की भौगोलिक स्थिति

देवास जिले में आती है विधानसभा सीट

ST वर्ग के लिए आरक्षित है सीट

क्षेत्र में 60 फीसदी आबादी आदिवासी

जनसंख्या - करीब 3 लाख

कुल मतदाता- 2 लाख 18 हजार 531

पुरुष मतदाता- 1 लाख 14 हजार 42 

महिला मतदाता- 1 लाख 4 हजार 483 

फिलहाल सीट पर भाजपा का कब्जा

बागली विधानसभ की सियासत

बागली विधानसभा की सियासत की बात करें तो...सीट पर भाजपा को हराना कांग्रेस के लिए इतना आसान नहीं रहा है...कांग्रेस बागली में अबतक केवल एक बार भी भाजपा को हराने में सफल रही है..अब जब चुनाव नजदीक है तो फिर से बागली का सियासी माहौल गरमाने लगा है..नेता टिकट की आस में फिर से एक्टिव हो गए हैं...जाहिर है यहां उम्मीदवारों के नाम इतनी आसानी से तय होने वाले नहीं है

देवास जिले में आने वाली बागली विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ है.. यहां की राजनीति में हमेशा से भाजपा का दबदबा रहा है..मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी यहां से 9 बार विधायक रहे.. जहां तक कांग्रेस का सवाल है..वो यहां केवल एक बार चुनाव जीत पाई है... 2008 के बाद सैलाना ST वर्ग के लिए आरक्षित है... तब से भाजपा के टिकट पर चंपालाल देवड़ा यहां से चुनाव जीत कर पार्टी का झंडा बुलंद कर रहे हैं। अब जब आगामी विधानसभा चुनाव में कुछ महीनों का वक्त बचा है..तो विधायक के टिकट के लिए नेता सक्रिय नजर आने लगे हैं...भाजपा की बात की जाए तो वर्तमान विधायक चंपालाल देवड़ा एक बार फिर टिकट के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं..हालांकि जनता से दूरी और विकास कार्यों की धीमी रफ्तार उनके खिलाफ जा सकती है..वहीं क्षेत्रीय नेता रीना सोलंकी को भी भाजपा से टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से आदिवासी नेता कमल मसकोले को टिकट मिलना तय माना जा रहा है। 

कुल मिलाकर सैलाना विधानसभा में आने वाले चुनाव में भी सियासी उठापटक होना तय है ।

बागली विधानसभा के मुद्दे

बागली विधानसभा की जनता हर बार भाजपा के प्रत्याशी पर अपना भरोसा जताती है..इस उम्मीद के साथ कि उनके क्षेत्र का बेहतर विकास होगा..लेकिन धरातल पर विकास कार्य नजर नहीं आता है...बेरोजगारी और पानी की समस्या आज भी जस की तस है..वहीं स्वास्थ्य केंद्र खुद बीमार नजर आते हैं। 

देवास जिले के बागली विधानसभा क्षेत्र में वैसे तो मुद्दों की कोई कमी नहीं है लेकिन बेरोजगारी यहां का प्रमुख मुद्दा है.. किसी तरह का कोई रोजगार नहीं होने से यहां की जनता लगातार पलायन कर रही है.. जिसकी वजह से पिछले कुछ वर्षों में बागली की जनसंख्या में तेजी से गिरावट आई है। बेरोजगारी के अलावा ये क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं की कमी से भी जूझ रहा है।

कहने को तो यहां स्वास्थ्य सेवाओं के लिए स्वास्थ्य केंद्र खोल दिए गए हैं लेकिन डॉक्टर और मेडिकल स्टॉफ समय पर उपलब्ध नहीं होते हैं और मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। क्षेत्र में पानी की भी गंभीर समस्या है..। ऐसे में आने वाले चुनाव में इन मुद्दों का गूंजना तय है।

 

वेब डेस्क, IBC24

 

 


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