जनता मांगे हिसाब: सीतापुर की जनता ने मांगा हिसाब

Reported By: Abhishek Mishra, Edited By: Abhishek Mishra

Published on 09 May 2018 05:11 PM, Updated On 09 May 2018 05:11 PM

सफर की शुरूआत करते हैं...छत्तीसगढ़ की सीतापुर विधानसभा सीट से... पर्यटन के लिहाज से धनी ये क्षेत्र बौद्ध अनुयायियों की भी भूमि है...बड़ी संख्या में यहां तिब्बती शरणार्थी रहते हैं....सीतापुर के भौगोलिक स्थिति पर एक नजर

सीतापुर विधानसभा की भौगोलिक स्थिति

सरगुजा जिले में आती है विधानसभा सीट

ST वर्ग के लिए आरक्षित है सीट

सीतापुर, मैनपाट और बतौली ब्लॉक शामिल

3 जनपद और 1 नगर पंचायत भी शामिल

जनसंख्या- लगभग ढाई लाख

कुल मतदाता- 1 लाख 85 हजार

पर्यटन और कृषि के लिहाज से काफी समृद्ध इलाका

प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट इसी क्षेत्र में

इलाके में रहते हैं काफी संख्या में तिब्बती शरणार्थी

फिलहाल सीट पर कांग्रेस का कब्जा

कांग्रेस के अमरजीत भगत हैं विधायक

सीतापुर की सियासत

सरगुजा संभाग की सीतापुर विधानसभा एक ऐसी सीट है..जिसे हासिल करने के लिए भाजपा हर बार जीत तोड़ मेहनत करती है...लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी अब तक उसे एक जीत की तलाश है...पिछले तीन बार से कांग्रेस यहां जीत दर्ज करती आ रही है..सीट पर भाजपा की हालात ये है कि निर्दलीय प्रत्याशी जीत हासिल कर लेते हैं, लेकिन भाजपा नहीं जीत पाती है..अब जब चुनाव नजदीक है तो दोनों पार्टियां रणनीति बनाने में जुट गई हैं

सरगुजा जिले की सीतापुर विधानसभा सीट कांग्रेस का वो अभेद्य किला है..जिसे ढहाने में भाजपा अब तक असफल ही रही है...राज्य गठन के बाद हुए तीनों चुनाव में भाजपा को यहां हार का सामना करना पड़ा है...जीत की आस में पार्टी हर बार अपने प्रत्याशी बदलती है, लेकिन जीत कांग्रेस से सीट नहीं छिन पाई है...

सीतापुर के सियासी इतिहास की बात की जाए तो.. 1998 में निर्दलीय प्रत्याशी शिक्षक गोपाल राम ने सीतापुर से चुनाव जीता....बाद में वो भाजपा में शामिल हो गए...2003 में हुए चुनाव में कांग्रेस के अमरजीत भगत ने भाजपा के राजाराम भगत को हराया...2008 में एक बार फिर कांग्रेस के अमरजीत भगत ने भाजपा के कद्दावर नेता गणेश राम भगत को हराकर सीट पर कब्जा जमाया... 2013 में फिर से अमरजीत भगत ने सीट पर कांग्रेस का परचम लहराया..और भाजपा के राजाराम भगत को करीब ..वोटों से हराया। 

अब जब चुनावी बिगुल बज गया है..तो भाजपा एक बार फिर सीतापुर में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश में जुट गई है..हालांकि पार्टी के सामने कोई ऐसा उम्मीदवार नजर नहीं आता..जो उसे यहां जीत दिला सके..

ऐसे में मिशन 65 के लिए भाजपा यहां अप्रत्याशित बदलाव कर सकती है..  भाजपा के संभावित उम्मीदवारों की बात करें पार्टी एक बार फिर पूर्व निर्दलीय विधायक गोपाल राम पर दांव लगा सकती है..इनके अलावा जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रभात खलको और पूर्व महापौर प्रबोध मिंज भी टिकट की रेस में शामिल हैं...वहीं कांग्रेस से एक बार फिर वर्तमान विधायक अमरजीत भगत ही पसंसीदा चेहरा हैं और उनकी टिकट कंफर्म मानी जा रही है...

जाहिर है सीतापुर में एक बार फिर दिलचस्प सियासी घमासान देखने को मिलेगा..कांग्रेस के अमरजीत भगत चौथी बार जीत हासिल करना चाहेंगे ..वहीं भाजपा कांग्रेस के इस गढ़ में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश करेगी। 

सीतापुर के मुद्दे

सरगुजा जिले में आने वाले सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में ...मुद्दे और मसलों की कमी नहीं है...यहां कभी भूख से बच्चे की मरने की बात सामने आती है तो.. कभी यहां हाथियों के पैरों तले लोग अपनी जान गंवा देते हैं..विधानसभा की सड़कें, गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं .. स्वास्थ्य सुविधाओं का भी बुरा हाल है.. वहीं तिब्बती बस्तियों के मुकाबले यहां के गांवों की हालत काफी खराब है ..पानी का मुद्दा इस बार यहां नेताओं को पानी पिलाने वाला है

अमीर धरती के गरीब लोग..जी हां सीतापुर की जनता पर ये कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है..यहां मैनपाट जैसी पर्यटन स्थल है..जिसे छत्तीसगढ़ का शिमला भी कहा जाता है..पर्यटन की अपार संभावनाएं होने के बावजूद सीतापुर में विकास की रफ्तार काफी धीमी है...मैनपाट में होने वाली टाऊ फसल की मांग जापान तक है लेकिन बेहतर संसाधनों के अभाव में इस ओर कोई काम नहीं हो पा रहा....वहीं बाक्साइट की खुली खदानें मौत को दावत देती हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विधायक की आपसी लड़ाई की वजह से इलाके में कई विकास कार्य रूके हुए हैं।

सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग की हालत भी इतनी खराब है कि लोग यहां से जाना भी पसंद नहीं करते। सड़कों की खस्ताहाल स्थिति से भी स्थानीय लोग परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा वहीं बिजली, पानी और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से भी क्षेत्रवासी परेशान हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो सरकारी अस्पताल तो हैं लेकिन डॉक्टरों की कमी की वजह से लोगों को अंबिकापुर तक का सफर तय करना पड़ता है। वहीं लंबे समय से ग्रामीण अंचल में हाथियों के आतंक से ग्रामीण परेशान है...कुल मिलाकर अपार संभावनाओं के बावजूद क्षेत्र की जनता असुविधाओं में जीने को मजबूर है ।

 

वेब डेस्क, IBC24

 

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