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जनता मांगे हिसाब: IBC24 की चौपाल में कटघोरा की जनता ने मांगा हिसाब

Last Modified - May 10, 2018, 4:50 pm

जनता मांगे हिसाब में सबसे पहले बात छत्तीसगढ़ की कटघोरा विधानसभा की..इस विधानसभा कि सियासी तस्वीर और मुद्दे जानने से पहले एक नजर  भौगोलिक स्थिति पर

कोरबा जिले में आती है विधानसभा सीट

औद्योगिक क्षेत्र माना जाता है

कोयला माइंस के लिए मशहूर 

कुल मतदाता- 2 लाख 574

विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा

लखनलाल देवांगन हैं बीजेपी विधायक

कटघोरा विधानसभा की सिसायसत

कटघोरा के चुनावी रण में अब तक बीजेपी-कांग्रेस में ही मुख्य मुकाबला रहा है लेकिन इस बार प्रदेश की नई नवेली पार्टी JCCJ भी चुनौती पेश करेगी..चुनाव की उल्टी गिनती शुरु होते ही टिकट के दावेदार भी एक-एक कर सामने आने लगे हैं..बीजेपी हो या फिर कांग्रेस दोनों में दावेदारों की लिस्ट लंबी है । 

कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली कटघोरा विधानसभा सीट पर बीते चुनाव में बीजेपी ने जीत का परचम लहराया...2013 के चुनावी  रण में विजय हासिल करने वाले लखन लाल देवांगन इस बार भी टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं...लेकिन क्षेत्र में बीजेपी के अंदर आपसी खींचतान के चलते लखन लाल देवांगन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं..इसके अलावा खाद्य आयोग के अध्यक्ष ज्योति नंद दुबे भी टिकट की दौड़ में हैं...बात कांग्रेस की करें तो बोधराम कंवर चुनावी मैदान में हो सकते हैं लेकिन बोधराम कंवर पहले ही चुनाव ना लड़ने की घोषणा कर चुके हैं..ऐसे में कांग्रेस बोधराम कंवर को मनाने में डुट गई है

बीजेपी की तरह ही कांग्रेस में टिकट की दौड़ में कई नेता हैं... छुरी नगर पंचायत अध्यक्ष अशोक देवांगन दावेदारी ठोक रहे हैं... इसके अलावा हरीश परसाई, नरेश देवांगन, अजय जयसवाल , सर्वजीत सिंह, रतन मित्तल टिकट की दौड़ में शामिल हैं...तो वहीं बोधराम कंवर के बेटे पुरुषोत्तम कंवर भी दावेदार माने जा रहे हैं..इस बार के चुनावी मैदान में JCCJ भी बीजेपी कांग्रेस को टक्कर देगी...JCCJ ने  गोविंद सिंह राजपूत पर दांव खेला है.. गोविंद सिंह राजपूत पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष होने के साथ ही कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय निवासी हैं और इलाके में लगातार सक्रिय रहे हैं । अब बीजेपी कांग्रेस किस को मैदान में उतारेगी ये देखने वाली बात होगी लेकिन इतना तय है कि इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होगा ।

कटघोरा विधानसभा के मुद्दे

ऊर्जा के हब के तौर पर भले पहचानी जाती हो कटघोरा विधानसभा लेकिन बुनियादी सुविधाओं तक के लिए तरस रही है जनता...शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार इन सभी मोर्चों पर फेल नजर आता है कटघोरा ।

खनिज संपदा से भरपूर कटघोरा विधानसभा ऊर्जा हब के रूप में जानी जाती है..कोयला खदानों से अरबों का राजस्व भी सरकार को मिलता है...बावजूद इसके क्षेत्र में विकास की रफ्तार काफी धीमी नजर आती है। इलाके की सबसे बड़ी समस्या भू-विस्थापन है...एसईसीएल के भू विस्थापित आक्रोशित हैं क्योंकि ना ही बेहतर विस्थापन मिला है और ना ही वादे के मुताबिक नौकरी...कटघोरा में बरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है...कहने को तो उद्योग और कोयला खदानें हैं लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल पाता।

इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से प्रदूषण से भी लोग परेशान हैं...इन सबके बीच पेयजल संकट से भी जूझ रही है जनता...पेयजल संकट से निपटने के लिए 13 करोड रुपए की जल आवर्धन योजना कागजों से निकलकर धरातल पर उतर ही नहीं पाई...स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो क्षेत्र में अस्पताल तो हैं लेकिन बेहतर सुविधाओं की कमी के चलते मरीजों को जिला मुख्यालय तक का सफर करना पड़ता है...स्वास्थ्य के साथ शिक्षा के मोर्च पर भी फिसड्डी है ये इलाका... कुल मिलाकार अपार संसाधनों के बावजूद कटघोरा बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। 

 

वेब डेस्क, IBC24


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