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जनता मांगे हिसाब: सरदारपुर की जनता ने मांगा हिसाब

Created at - May 12, 2018, 5:02 pm
Modified at - May 12, 2018, 5:02 pm

और अब बात सरदारपुर विधानसभा की ..लेकिन सबसे पहले सीट के भौगोलिक स्थिति पर एक नजर...

धार जिले में आती है सरदारपुर विधानसभा

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है सीट

जनसंख्या- करीब 3 लाख

मतदाता- लगभग 2 लाख 

पुरुष मतदाता-  99926

महिला मतदाता- 98407

फिलहाल सीट पर भाजपा का कब्जा

वेलसिंह भूरिया हैं वर्तमान विधायक

सरदारपुर विधानसभा की सियासत

धार जिले में आने वाली सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है ..आजादी के बाद से अब तक हुए  13 विधानसभा चुनावों में 9 बार कांग्रेस का कब्जा रहा है..फिलहाल सीट पर भाजपा का कब्जा है..आने वाले चुनाव को लेकर यहां सियासी पारा गरमाने लगा है..और टिकट की आस में नेता जनता के दरबार में हाजिरी लगाने लगे हैं..सीट पर जाति समीकरण भी खास भूमिका निभाता है...जाहिर है सियासी पार्टियां उसी के तहत अपना उम्मीदवार चुनेगी। 

एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सरदारपुर विधानसभा आजादी के बाद से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है।  यहां उसी दल को सफलता मिलती है..जिसे आदिवासी वोटर्स का आशीर्वाद मिलता है..दूसरे नंबर पर पाटीदार समाज आता है...जिनका समर्थन भी पार्टियों के लिए जरूरी है...यही वजह है कि राजनीतिक दल हर बार उम्मीदवार तय करते समय जाति समीकरण को साधने का प्रयास करते हैं। 

सरदारपुर के सियासी इतिहास की बात की जाए तो... 

1957 के चुनाव में कांग्रेस के शंकर लाल गर्ग विधायक रहे .. 1962  में जनसंघ के सुमेर सिंह ने जीत दर्ज की.. उसके बाद 1967 में बाबूसिंह भारतीय जन संघ से चुनाव जीते.. 1972 में बाबूसिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और जीता... 1977 और 1980 में कांग्रेस से मूलचंद पटेल ने चुनाव जीता..इसके बाद 1985, 1990, 1993 और 1998 तक लगातार चार बार गणपत सिंह पटेल सरदारपुर से विधायक चुने गए .. 2003 में पहली बार भाजपा को यहां सफलता मिली... भाजपा के मुकाम सिंह निंगवाल ने चुनाव जीता.. इसके बाद 2008 में प्रताप ग्रेवाल चुनाव जीतकर वापस सीट को कांग्रेस  की झोली मे डाल दिया... 2013 में  वेलसिंह भूरिया ने प्रताप ग्रेवाल को हराकर भाजपा का परचम लहराया। 

अब जब चुनाव का वक्त नजदीक है तो कई नेता टिकट की आस लगाए बैठे हैं...भाजपा के संभावित दावेदारों की बात की जाए तो वर्तमान विधायक वेल सिंह भूरिया टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।  इनके अलावा सूची में सरदारपुर क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ता धर्मेंद्र मंडलोई , जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती मोहन पटेल और जिला पंचायत सदस्य संजय बघेल का नाम भी शामिल है .. वहीं कांग्रेस में कई छोटे बड़े नेता विधायक बनने का सपना देख रहे है.. इसमं पूर्व विधायक प्रताप ग्रेवाल का नाम सबसे आगे है। वहीं जनपद सदस्य मुकेश मेड़ा और समाजसेवी अमर सिंह अजनार भी टिकट की दौड़ में हैं। 

सरदारपुर के मुद्दे

आने वाले चुनाव में कई ऐसे समस्याएं और मसले हैं..जो नतीजों को प्रभावित करेंगे..लेकिन सरदारपुर में भ्रष्टाचार और साफ-सफाई का मुद्दा इस बार सियासी पार्टियों की जमकर परीक्षा लेने वाला है

राजनीतिक उदासीनता कहे है या यहां के भोले भाले आदिवासियों का दुर्भाग्य कि आज भी सरदारपुर मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा है। धार जिले में आने वाली सरदारपुर विधानसभा में विकास केवल कागजों में ही सिमट कर रह गया है...यहां योजनाएं तो बहुत स्वीकृत हुई पर अधिकतर योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। यहां कई इलाको में सड़कें कम गड्ढे ज्यादा दिखते हैं.

वहीं देश भर में स्वच्छता को लेकर चल रही मुहिम की भी यहां धज्जियां उड़ती नजर आती हैं.. स्थानीय लोगों की माने तो कई कई दिनों तक नालियां ही साफ नहीं हो पाती है और गंदा बदबूदार पानी सड़कों पर फैलता है जिसकी बदबू और मच्छरों से लोग बीमार हो रहे हैं वही संकरी गलियों से होता हुआ व्यस्त बाजार कुछ और ही कहानी कहता है.. एक और बड़ी समस्या जो धीरे-धीरे विकराल रूप ले रही है वह है जल संकट .. अंदरूनी इलाकों में लोग चार से 5 किलोमीटर दूर से पीने का पानी लाने को मजबूर है...इस क्षेत्र में कोई भी बड़े उद्योग धंधे नहीं लगाए गए.. कुल मिलाकर देखा जाए तो स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पानी, और उद्योग कोई भी मुद्दा हो सरदारपुर विधानसभा के लोग आज भी अपने अधिकारों के लिए जूझते नजर आ रहे हैं 

वेब डेस्क, IBC24


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