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जनता मांगे हिसाब: सिहोरा की जनता ने मांगा हिसाब

Created at - May 13, 2018, 5:35 pm
Modified at - May 13, 2018, 5:35 pm

अब बात मध्य प्रदेश की सिहोरा विधानसभा सीट की... क्या है इस विधानसभा की सियासी बिसात? और क्या हैं मुद्दे? ये जानने से पहले एक नजर सिहोरा की प्रोफाइल पर..

जबलपुर जिले में आती है विधानसभा सीट

विधानसभा में 125 ग्राम पंचायतें शामिल

जनसंख्या- 1 लाख 95 हजार 770

पुरुष मतदाता- 1 लाख 1 हजार 393

महिला मतदाता- 94 हजार 377 

वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा

नंदनी मरावी हैं बीजेपी विधायक

 सिहोरा विधानसभा की सियासत

सिहोरा की सियासत की बात करें तो ..पिछले कुछ चुनावों से यहां बीजेपी अजेय रही है..और पिछले दो बार से नंदनी मरावी यहां से विधायक हैं..जो आने वाले चुनाव में एक बार फिर टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं..दूसरी ओर कांग्रेस की कोशिश है कि बीजेपी को चौका लगाने से रोगा जाए...हालांकि टिकट के लिए एक से ज्यादा दावेदार कांग्रेस की रणनीति को कमजोर भी कर रही है। 

सिहोरा विधानसभा सीट पर कभी कांग्रेस का कब्जा हुआ करता था लेकिन 2003 के चुनाव में बीजेपी के दिलीप दुबे ने जीत का परचम लहराया...आज सिहोरा बीजेपी का गढ़ बन गया है..2008 और 2013 के चुनाव में भी इस विधानसभा सीट पर कमल खिला...सिहोरा विधानसभा सीट से लगातार दो बार से नंदनी मरावी बीजेपी विधायक हैं..अब एक बार फिर चुनाव हैं तो ऐसे में कांग्रेस, बीजेपी के इस गढ़ में सेंध लगाने की तैयारी में जुट गई हैं तो वहीं बीजेपी चौथी बार भी जीत का परचम लहराने की रणनीतियां बना रही है...इसके साथ ही विधायक के दावेदार भी अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं..बात कांग्रेस की करें तो एक दर्जन से ज्यादा दावेदार टिकट की लाइन में हैं..सबसे पहला नाम हैं पूर्व विधायक नन्हेलाल धुर्वे का जोकि सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं...इसके अलावा दुर्गा ठाकुर,जमुना मरावी और रुकमणी गोंटिया टिकट की दौड़ में शामिल हैं...तो वहीं 

अर्जुन धुर्वे,मुन्ना मरावी,सीमा ठाकुर,एकता ठाकुर और मुन्ना गोंटिया भी टिकट की आस में हैं...अब बात बीजेपी की करें तो वर्तमान विधायक नंदनी मरावी का नाम सबसे आगे है...वहीं सरिता सिंह,सुशीला परस्ते के साथ नीलेश प्रताप सिंह भी दावेदारों में शामिल हैं ।

सिहोरा विधानसभा के मुद्दे

हर चुनाव से पहले नेता सिहोरा की जनता से विकास के दावे तो करते हैं..लेकिन विकास की रफ्तार में ये इलाका काफी सुस्त है...स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी कोई उल्लेखनिय काम धरातल पर नहीं दिखता.. जाहिर है तमाम दावों के बावजूद सिहोरा विधानसभा क्षेत्र में दुश्वारियों की कोई कमी नहीं है...और आने वाले चुनाव में नेताओँ को इनका हिसाब देना होगा। 

सियासी दौड़ में भले आगे हो सिहोरा विधानसभा लेकिन विकास की दौड़ में पीछे छूटा नजर आता है...खितौला में रेलवे ओवर ब्रिज की मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है..ओवर ब्रिज के लिए तीन साल पहले सर्वे तो हुआ लेकिन हुआ कुछ नहीं..इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं की भी हालत खराब है..गांवों में तो हाल और भी बेहाल हैं...कहने को तो सिहोरा में 100 बिस्तरों का सरकारी अस्पताल बना दिया गया लेकिन डॉक्टरों की कमी आज भी है।

इसके अलावा स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा की भी हालत खराब है...गर्ल्स कॉलेज और आईटीआई की मांग भी अधूरी है...इन सबके बीच बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है..रोजगार के संसाधनों की कमी के चलते मजदूर से लेकर युवा तक पलायन के लिए मजबूर हैं...इन सब समस्याओं के अलावा सिहोरा को जिला बनाने की मांग भी सालों से की जाती रही है..जोकि अब तक अधूरी है ।

 

वेब डेस्क, IBC24

 


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