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जनता मांगे हिसाब: मुंगावली की जनता ने IBC24 की चौपाल से मांगा जवाब

Created at - May 13, 2018, 5:41 pm
Modified at - May 13, 2018, 5:41 pm

अब बात करते हैं मुंगावली सीट की...ये विधानसभा क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से काफी समृद्ध है..यहां करीला में लगने वाला रंग पंचमी का मेला काफी प्रसिद्ध है.. जिसमें पूरे देश से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं.. कहा जाता है कि करीला में लव कुश का जन्म हुआ था... आजादी के बाद अस्तित्व में आई इस विधानसभा में कोई भी एक पार्टी का वर्चस्व नहीं रहा ..और क्या है सीट पर सियासी समीकरण..जानने से पहले सीट के प्रोफाइल पर एक नजर..

अशोकनगर जिले मे आती है विधानसभा सीट

कुल मतदाता- एक लाख 91 हजार 587 

पुरुष मतदाता- 1लाख 2हजार 312 

महिला मतदाता- 89 हजार 273

फिलहाल सीट पर कांग्रेस का कब्जा

बृजेंद्र सिंह यादव हैं वर्तमान विधायक

मुंगावली विधानसभा की सियासत

मुंगावली विधानसभा सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच हमेशा कांटे की टक्कर रही है ..2013 के विधानसभा चुनाव और हाल ही में हुए उपचुनाव के परिणाम को देखते हुए लगता है कि यहां सत्ताधारी पार्टी का जादू कम हो रहा है..मुंगावली की जनता का झुकाव अब कांग्रेस की ओर रहा है..यानी आगामी चुनाव में यहां एक बार फिर सियासी घमासान काफी दिलचस्प होने वाला है. 

मुंगावली विधानसभा सीट पर कोई भी एक पार्टी का वर्चस्व कभी नहीं रहा है.. यहां एक बार बीजेपी तो एक बार कांग्रेस ने चुनाव ने जीता है.. 2008 में हुए चुनावों में जहां भाजपा को जीत मिली थी.. तो 2013 में कांग्रेस ने चुनाव जीता.. हाल ही में कांग्रेस विधायक महेंद्र सिंह कालूखेड़ा के निधन के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह यादव करीब 2000 वोटों से चुनाव जीते।

मध्यप्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए मुंगावली में एक बार फिर चुनावी बिगुल बज उठा है... सियासी माहौल गरमाने लगा है...बीजेपी-कांग्रेस में टिकट के लिए कई नेता दावेदारी कर रहे हैं.. बीजेपी की बात की जाए तो...मलकीत सिंह संधू प्रबल दावेदार हैं..जो जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं साथ ही  विधानसभा क्षेत्र में लोगों से बराबर संपर्क बनाए हुए है..इनके अलावा  प्रताप भान सिंह यादव और जगन्नाथ सिंह यादव का नाम भी सूची में शामिल है.. वहीं डॉक्टर के पी यादव भी टिकट के लिए जोर लगा रहे हैं..दूसरी ओर कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों में वर्तमान विधायक बृजेंद्र सिंह यादव का नाम सबसे आगे है.. इनके अलावा प्रद्युमन सिंह दांगी,  कन्हैया राम लोधी ओर बलवीर सिंह कुशवाह भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं..

मुंगावली में दावेदारों की कोई कमी नहीं है ऐसे में पार्टी हाईकमान के सामने ये चुनौती होगी कि वो जीतने वाले उम्मीदवार का चुनाव करे। सियासी पार्टियों के सामने यहां जाति समीकरण को साधना भी बड़ी चुनौती रही है...

 मुंगावली में यादव और हरिजन वोटर ही प्रत्याशियों के हार-जीत में  निर्णायक भूमिका निभाते हैं... हाल ही में हुए उपचुनाव में दोनों ही पार्टियों ने यादव प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था... मुंगावली में जातिगत वोट पर नजर डाले तो ..करीब 50 हजार यादव, करीब 40 हजार हरिजन वोटर हैं..इनके अलावा 15 हजार दांगी और 13 हजार कुशवाहा वोटर के अलावा ब्राह्मण, जैन और मुस्लिम समाज के वोटर भी चुनाव को प्रभावित करते हैं। 

मुंगावली विधानसभा के मुद्दे

मुंगावली में मुद्दों की बात करें तो ..आज भी इलाका बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है..कहने को तो मुंगावली में मॉडल स्कूल सहित केंद्रीय विद्यालय है.. मगर फिर भी शिक्षा के लिए किए गए इंतजामों में कमी नजर आती है.. रोजगार के लिए कोई भी उद्योग धंधा इस क्षेत्र में नहीं लगाया गया... सड़कों की दुर्दशा और पानी की समस्या भी इस पूरी विधानसभा में दिखाई देती है। 

सियासी चश्मे से तो चमकता दिखाई देता है मुंगावली लेकिन विकास के चश्मे से देखे तो बेहद पिछड़ नजर आता है...विधानसभा की आधे से ज्यादा आबादी खेती पर आधारित है लेकिन फिर भी खेती लाभ का धंधा नहीं बन पा रही है...हालत ये है कि किसान लागत मूल्य तक के लिए तरस रहा है...बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है क्योंकि उद्योग धंधे हैं ही नहीं नतीजा लागातर बढ़ता जा रहा है पलायन...शिक्षा के मोर्च पर भी फिसड्डी है मुंगावली..

.शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं कहीं डॉक्टरों की कमी है तो कहीं अस्पातल जरुरी संसाधनों के इंतजार में हैं...बीते उपचुनाव के समय खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक नहीं कई घोषणाएं कि लेकिन वो धरातल पर अब तक नहीं उतर सकी हैं...मुख्यमंत्री ने मिनी स्मार्ट सिटी का भूमि पूजन तो किया लेकिन हुआ कुछ नहीं... वहीं धार्मिक स्थान करीला में करोड़ों के विकास कार्यों की घोषणाएं हुईं लेकिन वो विकास दिखाई नहीं देता...मुंगावली में विकास की तस्वीर क्या है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं की आज भी कई गांव सड़क और पानी के इंतजार में हैं ।

 


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