News

पढ़िए जीरम घाटी की कहानी, घायल की जुबानी

Created at - May 25, 2018, 2:21 pm
Modified at - May 25, 2018, 2:21 pm

आज पांच साल पूरे हो गए, लगता है आज की ही बात है। अभी भी झीरम का मंजर नज़रो के सामने है। बार बार लोग पूछते हैं। जानना चाहते हैं कि हुआ क्या था। 25 मई 2013 की लोमहर्षक घटना के बारे में आपको बताने के पहले उसकी पृष्टभूमि बताना जरूरी है कोशिश है कि आपको विस्तार सहित वर्णन करूं।

22 मई सबेरे सात बजे तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेलजी का फोन आता है। पूछते हैं, ‘ह जी महाराज बस्तर चलिहा नी’।मैं कहता हूं- ‘ड्राइवर की शादी है थोड़ी दिक्कत है’। वे कहते हैं- ‘रायपुर आ जावा आगे ब्यवस्था मैं करत हौं। पांच मिनट बाद मोतीलालजी साहू का फोन आता है- ‘भइया रायपुर आइये आपको मेरे साथ जाना है अध्यक्ष जी का निर्देश है

संयोग देखिये मेरी पत्नी और पुत्र संकेत मुझे छोड़ने रायपुर गएमोतीलाल साहू के साथ उसकी नई गाड़ी सफारी स्ट्रोम में अध्यक्ष जी के निवास फिर काफिला जगदलपुर के लिए रवाना हुआ। धमतरी में विधायक गुरुमुख सिंह होरा के निवास में जलपान के बाद काफिला जगदलपुर रवाना हुआरात्रि निवास गणपति होटल में हुआ हमने अंजय शुक्लाजी के साथ रूम शेयर किया।

सुबह 23 मई को दंतेवाड़ा जाना था समय के पक्के नंदकुमार पटेल 10 बजे जाने को तैयार थे दिल्ली से सुनील शास्त्रीजी भी आ हुए थे। दंतेवाड़ा विधान सभा के एक गांव में सभा थीपूरे रास्ते सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंदहर पुल में आठ जवान तैनात कोई भी सुरक्षा ब्यवस्था को देखकर निश्चिंत हो सकता था बहरहाल हम लोग भी बेफिक्र थे।

रात्रि मुकाम दंतेवाड़ा में हुआ रात में वहां के एसपी पटेलजी से मिलने आए। नक्सलवाद के समाधान पर चर्चा शुरू हुई उस समय शास्त्रीजी और शिव ठाकुर भी वहीं बैठे थेनंदकुमार पटेलजी का स्पष्ट मत था कि नक्सली समस्या का समाधान बातचीत से ही होगा हालांकि एसपी साहब ने कहा कि बल प्रयोग कर बातचीत के लिए बाध्य करने के सिवा कोई दूसरा उपाय नही है। पटेलजी ने एलेक्स जॉपॉल के अपहरण का उदाहरण देते हुए कहा कि आखिर बातचीत हुई और समाधान निकला कुल मिलाकर मुझे समझ आया कि नंदकुमार पटेल नक्सलियों के तरफ से निश्चिंत थे उनकी धारणा थी कि हमें नक्सलियों से कोई खतरा नही है।

24 मई को वापस जगदलपुर रवाना हुएजगदलपुर में सभा थी, जिसमें चरणदासजी महंत भी शामिल हुए सभा के बाद शास्त्रीजी और महंतजी वापस चले गए। शाम को बकावंड में सभा हुई रात को होटल में जिलाध्यक्ष द्वारा भोज का आयोजन किया गया, जहां मेरी मुलाकात अभिषेक गोलछा से हुई, जो मेरे भाषण से प्रभावित था उसने बताया कि ठेकेदारी का काम है अभी फुरसत है तो सोचा पार्टी का काम और बस्तर भ्रमण हो जाएगाकौन जानता था 25 साल का यह जवान कल अंतहीन यात्रा में निकलने वाला है।

25 मई सबेरे दस बजे काफिला सुकमा के लिए रवाना हुआरास्ते के पुलों से सुरक्षा कर्मी नदार थे अमूमन जो इंतजाम हम लोगो ने दंतेवाड़ा जाते समय देखा था उसका सर्वथा अभाव था मन मे शंका हुई, मगर हम लोगो ने ज्यादा ध्यान नही दिया क्योंकि मुझे लगता था नंदकुमार पटेल पूर्व गृह मंत्री है वो इन परिस्थितियों को ज्यादा अच्छे से समझते होंगे। सुकमा पहुचने के थोड़ी देर बाद अजीत जोगीजी का आगमन हेलीकाफ्टर से हुआसभा आरंभ हुई, जोगीजी ने टीएस सिंहदेवजी को खड़े करवा कर भीड़ से परिचय करवाया।

सभा मेंजीत जोगी के अलावा विद्याचरणजी शुक्ल, महेंद्र कर्मा के साथ नंदकुमार पटेलजी का संबोधन हुआ आयोजक कवासी लखमा ओर जिलाध्यक्ष ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के तुरंत बाद जोगीजी ने वापस उड़ान भरी ओर हम लोग रेस्टहाउस में भोजन करने गए। विनोदपूर्ण वातावरण में भोजन संपन्न हुआ, क्योकि पटेलजी मुझसे क रहे थे, देख महाराज झींगा ल भजिया समझ के खा झन देबेविद्या भैया तब तक फ़्रेश हो रहे थे हम लोग भोजन से निवृत हो चुके थे।

नंदकुमार पटेलजी ने उदय मुदिलयार से कहा- विद्या भइया से पूछो हम लोग निकलें क्या? विद्या भैया की सहमति मिलने पर काफिला केशलूर के लिए रवाना हुआ। हमारी गाड़ी में सामने अंजय शुक्ल र ड्राइवर बीच की सीट पर मोतीलाल साहू, शिव सिहं ठाकुर, रेहान खान के साथ मैं था। गर्मी बहुत थी,  गाड़ी की एसी के कारण तुरंत झपकी लग गई।

अचानक तड़तड़ की आवाज आई मुझे लगा हम केशलूर पहुंच गए, क्योकि सुकमा में एक विशेष किस्म के पटाखों से स्वागत हुआ था, जिसकी आवाज गोलियों की तरह होती हैइसे स्थानीय स्तर पर बनाया जाता है। इस बीच अंजय शुक्ल ने कहा- गोली चल रही हैसभी लोगों ने ड्राइवर को गाड़ी भगाने के लिए कहा। किंतु थोड़ी दूर में गाड़ियां फंसी थी उस समय हमें पता नही था कि सड़क ब्लास्ट कर मार्ग अवरुद्ध कर दिया गया है।

निरंतर गोलियां चल रही थी और हम जाकर काफिले के बीच मे फंस चुके थे आगे जाने, पीछे जाने के रास्ते बंद थे पहाड़ से गोलियां बरस रही थी और एक तरफ खाई थी जिसमें उतरना संभव नही था। झुक जाओ, मैने कहा तो सभी झुक गए मगर मेरे झुकने के लिए जगह नही थी अतः मैं चार इंच की पट्टी में अपने शरीर को समेटे खुद को गोलियों से बचाने का प्रयास कर रहा था। इस बीच शिव ठाकुर और मोतीलाल साहू को गोली लग चुकी थी चूंकि गोलियां गाड़ी को छेदकर आई थीं, इसलिए इतनी घातक सिद्ध नही हुई।

45 मिनट की गोलीबारी ओर ग्रेनेड हमले के बीच मैने कई लोगो को मौत के मुह में समाते देखा। मैं यह मान चुका था कि आज जीवन का अंत होना तय है, जिसके कारण मनोबल भी बढ़ गया कि मृत्यु जब तय है तो डरने की क्या बात है चलो आज इस जीवन का पटाक्षेप हो जाएगा तो यही सही। फिर मुझे लगा कि मुझे डिक्की में चले जाना चाहिए वहां अधिक सुरक्षित रहूंगाआपको जान कर ताज्जुब होगा कि मैं पीठ के बल डिक्की में कूदने में सफल हो गया।

जिस समय डिकी में गिरा, उसी समय मेरे पैर में गोली लगी और खून बहने लगा। मैंने गले के गमछे से पैर के जख्म को बांधा ओर लेटकर पीछे के पूरे सामान को अपने ऊपर डाल लिया और भगवान से कहा इससे ज्यादा मैं कुछ नही कर सकता आगे तुम जानो।

इस बीच महेंद्र कर्मा जी की आवाज सुनाई दी, वे कह रहे थे मत मारो यार, मत मारो। कुछ देर के लिए सन्नाटा फिर कोलाहल, तड़ातड़ गोलियों की आवाज के बाद अंजय शुक्ल ने कहा नक्सली सामने आ गए हैं और सरेंडर करने के लिए कह रहे हैं। हमारे पास कोई विकल्प नही था अतः हम नक्सलियों के साथ लगभग 100 मीटर दूर जंगल मे गए, जहां महेंद्र कर्मा जी की क्ष-विक्षत शव पड़ा हुआ था नक्सली उनके शव के साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे।

हमारे मोबाइल छीन लिए गएनाम पूछा गया और नंदकुमार पटेल कौन है यह पूछा गया किंतु इसके बाद उन लोगों ने गोली नही चलाई बल्कि पानी पिलाया ओर पेट के बल लेट जाने को कहा और बिना कुछ कहे वे लोग वापस चले गए।

4:15 पर आरंभ यह लोमहर्षक घटना 6:15 पर 30 मौतों और अनेक घायलों के साथ समाप्त हुआ किसी तरह सड़क पर आए और चट्टान से टिक कर बैठे रहे, किसी सहायता की प्रतीक्षा में जो घायल नही थे वे सब जा चुके थे किसी मदद की तलाश में। यह वह समय था जिसमें बच जाने की खुशी भी थी और अनेको को खो देने की तकलीफ भी उस समय तक हमे नंदकुमार पटेलजी की हत्या या विद्याचरण शुक्लजी के घायल होने की जानकारी नहीं थी।

पत्रकार नरेश मिश्रा ने सबसे पहले विद्या भैया के घायल होने की जानकारी दीहर्षद मेहता, मोतीलाल साहू गंभीर रूप से घायल थे शेष लोग घायल तो थे पर खतरे से बाहर थे। 8.15 पर बख्तरबंद गाड़ी आई जिसमें विद्या भैया, हर्षद मेहता, मोतीलाल साहू और मैं दरभा तक गए जहां से हमे विक्रम मंडावी जगदलपुर के महारानी लक्ष्मीबाई अस्पताल ले गए।

.

सुरेंद्र शर्मा, जीरम के घायल और प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता


Download IBC24 Mobile Apps

Trending News

IBC24 SwarnaSharda Scholarship 2018

Related News