रायपुर News

शिक्षाकर्मियों के इंतजार की घड़ी हो सकती है खत्म, जश्न की तैयारियां

Last Modified - May 28, 2018, 6:42 pm

रायपुर। शिक्षाकर्मियों की 22 बरस पुरानी मांग के पूरा होने की घड़ी आ गई है। मध्यप्रदेश सरकार की कैबिनेट की बैठक में संविलियन को हरी झंड़ी मिलने के संकेत हैं। मप्र के अध्यापक संघ के पदाधिकारियों ने भी संभावना जताई है कि उनकी संविलियन की मांग पूरी हो सकती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियों के संविलियन का रास्ता साफ हो जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार इस बारे में कोई फैसला लेती है तो छत्तीसगढ़ में जश्न की तैयारी है। बताया जा रहा है कि मोर्चा के पदाधिकारी पटाखे फोड़कर और मिठाई बांटकर फैसले का स्वागत करेंगे। 

मध्यप्रदेश सरकार की 29 मई को कैबिनेट की बैठक होने वाली है। मप्र के स्कूल शिक्षा मंत्री ने संविलियन पर फैसला होने का भरोसा दिलाया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों की भी नजरें इस पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में शिक्षाकर्मियों के 22 वर्ष का इंतजार खत्म हो सकता है। इस परिस्थिति में छत्तीसगढ़ में भी संविलियन की राह आसान हो जाएगी। छत्तीसगढ़ में अब तक संवैधानिक दिक्कतों के कारण संविलियन का मामला लटका हुआ है। 

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शिक्षाकर्मी मोर्चा के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने कहा है कि कैबिनेट की बैठक में मध्यप्रदेश के शिक्षाकर्मियों के संविलियन के प्रस्ताव को बिना किसी दोष के पारित किया जाता है, तो यहां के शिक्षाकर्मी भी इसका स्वागत करेंगे। वे पटाखे फोड़ कर और मिठाई बांटकर खुशियां मनाएंगे। मध्यप्रदेश में अध्यापक संघ के जगदीश यादव और आजाद अध्यापक संघ के जावेद खान ने सोशल मीडिया के जरिए शिक्षाकर्मियों को यह आश्वस्त किया है कि उनकी जिंदगी का स्वर्णिम अध्याय लिखा जा सकता है। कैबिनेट में वर्षों से चली आ रही उनकी संविलियन की लड़ाई का अंत हो जाएगा।

दोनों ही नेताओं ने अपने पोस्ट में सूत्रों के हवाले से प्राप्त खबर की जानकारी देते हुए लिखा है के मुख्यमंत्री अपने वादे को पूरा करने जा रहे हैं। प्रदेश के 2 लाख 84 हजार शिक्षाकर्मियों का एक साथ मूल शिक्षा विभाग में संविलियन हो जाएगा। ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियों के लिए यह ऐतिहासिक फैसला होगा। राज्य सरकार मध्यप्रदेश के फैसले का इंतजार कर रही है। यह वजह है कि हाइपावर कमेटी को भी मध्यप्रदेश भेजा गया था, ताकि वहां नियम-प्रावधानों का अध्ययन किया जा सके। मध्यप्रदेश कैबिनेट में इसके पारित होने पर राज्य सरकार उस अपना सकती है। क्योंकि शिक्षाकर्मियों की भर्ती अविभाजित मध्यप्रदेश सरकार में हुई थी। ऐसे में वहां के नियम को अपनाने में कोई संवैधानिक दिक्कत नहीं होगी।

वेब डेस्कIBC24


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