ट्रंप और किम की मुलाकात 12 जून को, होटल का किराया चुकाने उत्तर कोरिया के पास नहीं है पैसे

Reported By: Sanjeet Tripathi, Edited By: Sanjeet Tripathi

Published on 03 Jun 2018 05:50 PM, Updated On 03 Jun 2018 05:50 PM

वॉशिंगटन। आप इस बात पर यकीन नहीं करेंगे कि परमाणु शक्ति संपन्न देश उत्तर कोरिया के पास अपने सुप्रीम लीडर किम उन जोंग और उनके प्रतिनिधिमंडल का होटल किराया चुकाने के लिए पैसे नहीं है। लेकिन यह बात सच है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन की बहुप्रतीक्षित मुलाकात 12 जून को सिंगापुर में होनी है। यह मुलाकात जिस होटलमें होगी, उसके प्रेसिडेंशियल सुईट का एक रात का किराया 6 हजार डालर ( लगभग 4 लाख रुपए है।

अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंध झेल रहा उत्तर कोरिया होटल का यह किराया देने में असक्षम है। इसके चलते अमेरिका इस मुलाकात के लिए प्रायोजक देश की तलाश कर रहा है। मुलाकात सिंगापुर नदी के पास स्थित होटल फुलर्टन में होनी तय है। अमेरिकी व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ जो हेगिन और किम जोन उन के अफसर की बातचीत दौरान होटल का बिल न चुका पाने की बात भी उठी थी। हालांकि अमेरिकी अफसरों का कहना है कि ‘अगर उत्तर कोरिया को 5 स्टार होटल का बिल चुकाने में दिक्कत होगी तो उस स्थिति में हम भरपाई कर सकते हैं, लेकिन संभव है कि उत्तर कोरिया इसे अपना अपमान समझे

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ऐसे में ट्रंप के योजनाकार किसी ऐसे देश को ढूंढ रहे हैं जो सिंगापुर में उत्तर कोरिया प्रतिनिधिमंडल का बिल चुका दें। अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता हीदर नुअर्ट ने के मुताबिक यह संभव है कि सिंगापुर सरकार ही होटल का बिल चुका दे। लेकिन अमेरिका ये बिल नहीं चुकाने जा रहा।

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंध झेल रहा उत्तर कोरिया साउथ कोरिया में हुए शीतकालीन ओलिंपिक के दौरान भी अपने डेलिगेशन का बिल नहीं चुका पाया था। 2.6 मिलियन डॉलर(लगभग 17करोड़ रुपए) का ये बिल साउथ कोरिया चुकाया था। जबकि इसमें शामिल होने के लिए उत्तर कोरिया के 22 सदस्यों को पैसे अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति ने दिए थे।

इसी तरह वर्ष 2014 में अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जेम्स आर क्लेपर दो कैदियों को छुड़ाने उत्तर कोरिया गए थे। उन्होंने भोजन के पैसे खुद ही देने की पेशकश की थी। स्थिति यह है कि उत्तर कोरिया सोवियत युग के पुराने विमानों को चीन में इसलिए लैंड कराता है क्योंकि वह नई हवाईपट्टी बनाने में सक्षम नहीं है।

वेब डेस्क, IBC24

 

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