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अनुपम कलाकृतियों का संगम तालागांव

Last Modified - June 4, 2018, 3:18 pm

छत्तीसगढ । रायपुर-बिलासपुर राजमार्ग पर बिलासपुर से 30 तथा रामपुर से 85 किलोमीटर की दूरी पर भोजपुर ग्राम से 7 किमी एवं रायपुर बिलासपुर रेल्वे मार्ग के दगौरी स्टेशन से मात्र 2किमी दूरी पर अमेठी -कांपा ग्राम के समीप मनियारी नदी के तट पर स्थित ताला मे दो शिव मंदिर है, जो देवरानी, जेठानी के नाम से विख्यात है। भारतीय पुरातत्व के पहले महानिदेशक एलेक्जेन्डर कलिंघम के सहयोगी जे.डी. बेलगर को तालागॉव की सूचना 1873-74 मे तत्कालीन कमिश्नर फिशर ने दी। एक विदेशी पुरातत्व वेत्ता महिला जोलियम विलियम ने इसे चन्द्रगुप्त काल का मंदिर बताया।

बताया जाता है कि पुरातात्विक उत्खनन से 6वीं शताब्दी ई. में लगभग 5 टन वजनी शिव की विशिष्ट मूर्ति मिली है। यह मूर्ति पशुपति शिव का प्रतीक है। नरमूण्ड धारण किए हुए पशुओं का चित्रण युक्त यह मूर्ति विशेषता लिए हुए हैं।इस दौरान मिली मूर्ति में  शिव के रौद्र रूप की अनुपम कृति युक्त एक प्रतिमा टीले में दबी हुई प्राप्त हुई है जिसका नामकरण एवं अभिज्ञान आज तक नहीं हो सका है।

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मिली इस प्रतिमा को वास्तु इतिहास की अनहोनी कहा जा सकता है. मूर्ति के 11 अंग विभिन्न प्राणियों से निर्मित किये गए हैं यह 7 फुट ऊँची, 4 फूट चौडी तथा 6 टन वजन की लाल बलुए पत्थर की बनी है इस प्रतिमा को अभी तक रूद्र शिव, महारुद्र, पशुपति, अघोरेश्वर, महायज्ञ बिरूवेश्वर, यक्ष आदि नाम दिये जा चुके है इस अद्भुत प्रतिमा के शिरोभाग पर नाग युग्मों का पगड़ीनुमा केश विन्यास है।  नाक तथा भौंह छिपकली द्वारा, नेत्र विस्फारित भेक मुख तथा नेत्र गोलक अंडे से बने हुवे है। मुछे - मत्स्य, ठुड्डी -केकड़ा, कर्ण-मयूर एवं कंधे मकर से बनाए गये हैं। 

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ताला गांव में खुदाई के दौरान कलचुरी रत्नदेव प्रथम व प्रतापमल्ल की एक रजत मुद्रा भी प्राप्त हुई है। खुदाई में मिली  मूल प्रतिमा देवरानी मंदिर तालाग्राम परिसर. में सुरक्षित है जो आज भी दर्शकों के लिए उत्सुकता का केंद्र बनी हुई है। 

वेब डेस्क IBC24


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