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जनता मांगे हिसाब: पानी, स्वास्थ्य और विकास की कमी से जूझ रहा भटगांव

Created at - June 6, 2018, 4:59 pm
Modified at - June 6, 2018, 4:59 pm

जनता मांगे हिसाब की शुरुआत करते हैं छत्तीसगढ़ की भटगांव विधानसभा से। सियासी बिसात और मुद्दों की बात करें इससे पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर।

सूरजपुर जिले में आती है विधानसभा

कोयला खदानों के लिए मशहूर

विधानसभा में 2 नगर पंचायत शामिल

कुल मतदाता-2 लाख 12 हजार 112

पुरुष मतदाता- 1 लाख 7 हजार 541

महिला मतदाता- 1 लाख 4 हजार 571

वर्तमान में विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा

पारसनाथ राजवाड़े हैं कांग्रेस विधायक

भटगांव विधानसभा में इस बार चुनावी मुकाबले में बीजेपी और कांग्रेस नहीं बल्कि JCCJ भी होगी । जहां एक तरफ टिकट को लेकर बीजेपी-कांग्रेस में लाइन लगी है। तो वही JCCJ ने तो अपना उम्मीदवार घोषित भी कर दिया है।

विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरु हो चुका है..इसके साथ ही चुनावी रंग में रंगने लगी है भटगांव विधानसभा सीट। कांग्रेस की इस कब्जे वाली विधानसभा पर बीजेपी जीत दर्ज करने के इरादे से उतरेगी तो वहीं कांग्रेस बीते चुनाव की तरह इस बार भी विजय हासिल करना चाहेगी..बीजेपी-कांग्रेस के जीत-हार के गुणा-भाग के बीच टिकट के दावेदारों की लाइन लगनी भी शुरु हो गई है। कांग्रेस में दावेदारों की बात करें तो वर्तमान विधायक पारसनाथ राजवाड़े प्रबल दावेदार हैं।

इसके अलावा योगेश सिंह भी दावेदार हैं..अब बात बीजेपी की करें तो अजय गोयल दावेदारों में सबसे आगे हैं तो वहीं रजनी त्रिपाठी और सूरजपुर जिला पंचायत उपाध्यक्ष गिरिश गुप्ता भी दावेदारों में शामिल हैं...गृहमंत्री रामसेवक पैकरा भटगांव विधानसभा में क्षेत्र में ही रहते हैं इसलिए रामसेवक पैकरा भी चुनावी मैदान में हो सकते हैं ।बीजेपी और कांग्रेस जहां टिकट के दावेदारों के बीच उलझे नजर आते हैं तो वहीं JCCJ ने सुरेंद्र चैधर को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है ।

भटगांव में विकास की तस्वीर क्या है ये महज इससे समझा जा सकता है..कि इलाज के अभाव में मरीज दम तोड़ रहे हैं। लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं।

खनिज संपदा से भले धनी है भटगांव लेकिन फिर भी विकास की तस्वीर धुंधली नजर आती है..आज भी ऐसे कई इलाके हैं जो पहुंच विहीन हैं। तो वहीं विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते आ रहे हैं। करोड़ों की लागत से पुल-पुलिया तो बनीं लेकिन पहली बारिश में है ढह गईं। जंगलों की अवैध कटाई और रेत उत्खनन पर भी लगाम नहीं लग पा रही है।

इसके अलावा कई गांव पीने के पानी तक के लिए तरस रहे हैं। गर्मियों में तो हालात ये हैं कि बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं लोग। स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा भी बदहाल है..कहीं शिक्षक हैं तो स्कूल की बिल्डिंग नहीं..अगर बिल्डिंग हैं तो शिक्षक नहीं..उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी भी पूरी नहीं हो पाई है...शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं। मलेरिया के चलते दो दर्जन से ज्यादा लोग काल के गाल में समा चुके हैं..जिसमें संरक्षित पंडो जनजाति के लोग भी थे इसके अलावा बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है ।

 

वेब डेस्क, IBC24

 


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