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जनता मांगे हिसाब: बेरोजगारी का दंश झेल रहा परासिया

Created at - June 6, 2018, 5:04 pm
Modified at - June 6, 2018, 5:04 pm

अब बात मध्य प्रदेश की परासिया विधानसभा की...सियासत और मुद्दों की बात करें इससे पहले विधानसभा की प्रोफाइल पर एक नजर..

छिंदवाड़ा जिले में आती है विधानसभा सीट

कोयला खदानों के लिए मशहूर

कुल मतदाता-2 लाख 12 हजार  64

पुरुष मतदाता-1 लाख 32 हजार 95

महिला मतदाता- 97 हजार 967

वर्तमान में विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा

सोहनलाल बाल्मीक हैं कांग्रेस विधायक

देखें वीडियो-

चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो गई है..इसके साथ ही परासिया में सियासी बिसात भी बिछने लगी है। कांग्रेस के इस गढ़ में इस बार बीजेपी सेंध लगाने की जुगत में है..इस जीत हार के गुणा-भाग के बीच टिकट के दावेदार भी आवाज बुंलद कर रहे हैं ।

एससी एसटी के लिए आरक्षित परासिया विधानसभा में कांग्रेस का दबदबा रहा है. पिछले चुनाव में भी कांग्रेस के सोहन वाल्मीक ने बीजेपी के ताराचंद साहू को शिकस्त  दी थी. जीत बरकरार रखने के इरादे से चुनावी तैयारी में जुटी कांग्रेस के लिए उम्मीदवार का चुनाव मुश्किल हो गया है. विधायक सोहन वाल्मीक को पार्टी ने प्रदेश की समन्वय समिति का सदस्य बना दिया है. दिग्विजय सिंह के बयान के हिसाब से समन्वय समिति का सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा. 

ऐसे में अगर टिकट में बदलाव होता है तो पेशे से टीचर श्याम कावेरी प्रबल दावेदार हो सकते हैं. पहले भी ये अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं लेकिन छिंदवाड़ा में कमलनाथ ने जिसे कह दिया वहीं कांग्रेस का अंतिम सत्य होता है. बीजेपी की बात करें तो सबसे प्रबल दावेदारों में पूर्व विधायक ताराचंद बावरिया हैं. पिछले चुनाव में बावरिया 6862 वोट से हारे थे. लेकिन एक और गुट है जो जिला पंचायत सदस्य ज्योति डेहरिया को टिकट दिलाने की जुगत भिड़ाने में लगा है. 

खनिज संपदा की धनी परासिया विधानसभा में हर तरफ समस्याएं नजर आती हैं...कहने को तो कोयला खदानें हैं लेकिन फिर भी बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं लोग...शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं

काला सोना उगलने वाली धरती है परासिया की..कोयलांचल के नाम से जिले को पहचान देने वाली ये विधानसभा विकास से कोसो दूर नजर आती है...जब परासिया में कोयला की खदानें शुरु हुईं तो रोजगार भी मिला लेकिन अब खदानें धीरे-धीरे बंद होने की कगार पर हैं..नतीजा बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है..इसके अलावा कोयला खदानों में फर्जी मजदूरों की भरमार है जो कि लाखों का चूना लगा रहे हैं तो वहीं कोयला खदानों की वजह से पानी भी पाताल में समाता जा रहा है।

हालत ये की अब पेयजल संकट से भी जूझ रही है जनता...पेयजल के साथ किसान के खेत भी सिंचाई के अभाव में प्यासे हैं...इसके अलावा  स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा की भी हालत खराब है..जहां स्कूलों में शिक्षक की कमी हैं तो वहीं इलाके में उच्च शिक्षण संस्थानों की मांग भी सालों से की जा रही है...शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं... इन सबके बीच परासिया में बढ़ते अपराध भी एक बड़ी समस्या है ।

 

वेब डेस्क, IBC24


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