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हाईपावर रिपोर्ट की उलटी गिनती, मोर्चा ने मांगा- व्याख्याता,शिक्षक व सहायक शिक्षक पर संविलियन

Created at - June 7, 2018, 7:17 pm
Modified at - June 7, 2018, 7:23 pm

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियों के संविलियन के संबंध में हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के हवाले कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि मध्यप्रदेश के फार्मूले को लागू किया जा सकता है, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार के फैसले पर वहां के अध्यापकों ने स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में ऐसी स्थिति निर्मित हो सकती है, लिहाजा सरकार के समक्ष इस बात की चुनौती है कि वे ऐसा रास्ता निकालें जिससे उन्हें संतुष्ट किया जा सके। उधर, शिक्षाकर्मी मोर्चा का कहना है कि उनका व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक के पद पर संविलियन किया जाए और वेतनमान का निर्धारण कर मौजूदा वेतन पर सातवें वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए। 

शिक्षक मोर्चा के प्रदेश संचालक संजय शर्मा और प्रदेश मीडिया प्रभारी विवेक दुबे ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे खुले दिल से शिक्षाकर्मियों के भविष्य के संबंध में फैसला लें, ताकि किसी के साथ नाइंसाफी न हो। आंदोलन खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री ने यह बात कही थी कि प्रदेश के शिक्षाकर्मियों के हित का पूरा ध्यान रखेंगे। 6 माह पूर्व किये गए 20 नवम्बर से 4 दिसम्बर तक हड़ताल के बाद गठित मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी अपनी रिपोर्ट 8 जून को मुख्यमंत्री को सौंपने जा रही है।  

 

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 मध्यप्रदेश और राजस्थान में लिए गए निर्णय की जानकारी भी मुख्यमंत्री है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि अब प्रदेश के मुखिया शिक्षाकर्मियों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लें, ताकि तमाम विसंगतियां जो अन्य प्रदेशों के मॉडल में है, वह दूर हो जाए। पूरे देश में छत्तीसगढ़ का मॉडल उदाहरण के तौर पर लिया जाए। 

शिक्षक मोर्चा के प्रदेश संचालक संजय शर्मा, प्रदेश उप संचालक हरेंद्र सिंह, देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, प्रवीण श्रीवास्तव, विनोद गुप्ता, मनोज सनाढ्य, शैलेन्द्र पारीक, सुधीर प्रधान, विवेक दुबे ने मांग की है कि समतुल्य वेतन निर्धारण की विसंगति दूर करते हुए समानुपातिक, कर्मोन्नति के आधार पर छठवें ( समतुल्य/ पुनरीक्षित) वेतनमान का निर्धारण कर मौजूदा वेतन पर सातवे वेतनमान के निर्धारण का लाभ देते हुए व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक के पद संविलियन का लाभ दें। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि रिपोर्ट सौपने के बाद प्रतिवेदन को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।  रिपोर्ट का खुलासा होने के बाद मोर्चा के पदाधिकारी इसकी समीक्षा करेंगे उसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।

वेब डेस्क, IBC24


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