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हाईपावर रिपोर्ट पर फैसला 14 के बाद संभव, संविलियन के लिए ऐसा हो सकता है पैटर्न, पढ़िए पूरी खबर

Last Modified - June 8, 2018, 9:50 am

रायपुर।  छत्तीसगढ़ में संविलियन का इंतजार कर रहे शिक्षाकर्मियों कुछ दिन और प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की व्यस्तता और 14 जून को पीएम नरेन्द्र मोदी के दौरे के कारण संविलियन के फैसले को फिलहाल टाला जा सकता है। कहा जा रहा है कि हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा, अब पीएम मोदी के कार्यक्रम यानि 14 जून के बाद इस पर कोई फैसला लिया जाएगा।

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उधर, हाईपावर कमेटी ने पिछली बार की तर्ज पर संविलियन का फार्मूला निकाला है। 8 साल की सेवाअवधि पूरा कर चुके शिक्षाकर्मियों को नियमित करने वाले फार्मूले के तहत संविलियन का रास्ता निकाला गया है। इसके तहत 8 साल से अधिक की सेवा अवधि वाले शिक्षाकर्मियों का संविलियन किया जाएगा। लेकिन शिक्षाकर्मियों का चरणबद्ध संविलियन विभागीय अमले के तौर पर होगा और उनका कैडर मैनेजमेंट वर्तमान विभागों के अधीन ही रहेगा। 

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विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षाकर्मियों को साधने के लिए सरकार ने प्रारूप बनाया है, उससे 1 लाख से अधिक शिक्षाकर्मियों को फायदा होगा। शेष के लिए अलग से प्रावधान रखे गए हैं, ताकि उन्हें भेदभाव की शिकायत न हो। संविलियन समेत शिक्षाकर्मियों की 9 अन्य मांगों को लेकर गठित मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली हाईपावर कमेटी को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शुक्रवार दोपहर का समय दिया है, लेकिन सीएम की व्यस्तता के कारण इसमें शाम हो सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय 14 जून के बाद लिया जाएगा।

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हाईपावर रिपोर्ट में संविलियन पॉलिसी को चरणबद्ध लागू करने का सुझाव दिया गया है, ताकि वित्तीय बोझ एक साथ न पड़े। शिक्षाकर्मियों को संविलियन के साथ नए वेतनमान का भी लाभ देना होगा। नए वेतनमान से राज्य पर करीब 2400 करोड़ का वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है। शिक्षाकर्मी, अन्य कर्मियों की तरह जनवरी 2016 से 7वें वेतनमान की मांग कर रहे हैं। इसे पर फैसला सीएम करेंगे।  हाईपावर कमेटी की सिफारिशों को लागू किया गया तो 8 साल पूरा करने वाले शिक्षाकर्मियों का वेतन 35 से 52 हजार तक हो जाएगा। वर्ग की तनख्वाह 33 – 42 हजार से बढ़कर 52 हजार तक हो सकती है। इसी तरह वर्ग दो के शिक्षाकर्मियों का वेतन 32 -37 हजार से बढ़कर 45 हजार  और वर्ग तीन की सैलेरी 27 हजार से बढ़कर 35 हजार तक होने का अनुमान है। 

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उल्लेखनीय है कि 8 साल से कम सेवा अवधि वाले शिक्षाकर्मियों को 11 हजार से 18 हजार तक वेतन दिया जा रहा है। संविलियन के साथ ही 7वां वेतनमान मिलने से उन्हें सीधे 27 हजार रुपए वेतन मिलने लगेगा। इसी तरह 14 हजार वेतन ले रहे वर्ग-2 शिक्षाकर्मियों को 36 हजार रुपए, वर्ग-1 वाले शिक्षाकर्मियों को 18 हजार से बढ़कर 40 हजार रुपए तक वेतन मिलने लगेगा। एक मुश्त इतनी तनख्वाह बढ़ने से सरकार पर अधिक भार पड़ेगा। इसी वजह से इनके एकसाथ संविलियन पर पेंच है। 

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छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों को संविलियन के लिए मध्यप्रदेश का पैटर्न मान्य नहीं है। वे राजस्थान की तरह मर्जर की मांग कर रहे हैं। मप्र में संविलियन के बाद से राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग में नई नियुक्ति का विकल्प दिया गया है। इसमें प्रायमरी, मिडिल और हाई-हायरसेकंडरी तीनों ही शामिल होंगे। ऐसा किए जाने से पिछले दो दशकों से काम कर रहे शिक्षाकर्मियों की वरिष्ठता जाती रहेगी।

 

वेब डेस्क, IBC24


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