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योग के प्रमुख चार रास्ते

Created at - June 12, 2018, 7:08 pm
Modified at - June 12, 2018, 7:11 pm

योग करने से न सिर्फ शारीरिक स्फूर्ति मिलती है बल्कि इससे कई बीमारियों से भी राहत मिलती है। आज हम देखेंगे योग के वो आसान जिसे करने से कई बीमारियों को आराम मिलता है। योग के प्रमुख चार "रास्ते" हैं:

 

राज योग: राज का अर्थ "शाही" है और योग की इस शाखा का सबसे अधिक महत्वपूर्ण अंग है ध्यान। इस योग के आठ "ऑंग" है -- जिस कारण से पतंजलि ने इसका नाम रखा था "अष्टांग योग"। इसे "योग सूत्र" में पतंजलि ने उल्लिखित किया है।

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 यह 8 अंग इस प्रकार है: यम (शपथ लेना), नियम (आचरण का नियम या आत्म-अनुशासन), आसन, प्राणायाम (श्वास नियंत्रण), प्रत्याहार (इंद्रियों का नियंत्रण), धारण (एकाग्रता), ध्यान (मेडिटेशन), और समाधि (परमानंद या अंतिम मुक्ति)। याज योग आत्मविवेक और ध्यान करने के लिए तैयार व्यक्तियों को आकर्षित करता है। आसन सबसे प्रसिध अंग है राज योग का, यहाँ तक कि अधिकतर लोगों के लिए योग का अर्थ ही है आसन। किंतु आसन एक प्रकार के योग का सिर्फ़ एक हिस्सा है। योग आसन अभ्यास से कहीं ज़्यादा है।

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कर्म योग: अगली शाखा कर्म योग या सेवा का मार्ग है, और हम में से कोई भी इस मार्ग से नहीं बच सकता है। कर्म योग का सिद्धांत यह है कि जो आज हम अनुभव करते हैं वह हमारे कार्यों द्वारा अतीत में बनाया गया है। इस बारे में जागरूक होने से हम वर्तमान को अच्छा भविष्य बनाने का एक रास्ता बना सकते हैं, जो हमें नकारात्मकता और स्वार्थ से बाध्य होने से मुक्त करता है। कर्म आत्म-आरोही कार्रवाई का मार्ग है। जब भी हम अपना काम करते हैं और अपना जीवन निस्वार्थ रूप में जीते हैं और दूसरों की सेवा करते हैं, हम कर्म योग करते हैं।

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भक्ति योग: भक्ति योग भक्ति के मार्ग का वर्णन करता है। सभी सृष्टि में परमात्मा को देखकर, भक्ति योग भावनाओं को नियंत्रित करने का एक सकारात्मक तरीका है। भक्ति का मार्ग हमें सभी के लिए स्वीकार्यता और सहिष्णुता पैदा करने का अवसर प्रदान करता है।

ज्ञान योग: अगर हम भक्ति को मन का योग मानते हैं, तो ज्ञान योग बुद्धि का योग है, ऋषि या विद्वान का मार्ग है। इस पथ पर चल

मनोज अग्रवाल (योगा एक्सपर्ट )


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