रायपुर News

संविलियन प्रारूप पर संशय के बीच श्रेय लेने की होड़, कैबिनेट से पहले कयासों और चिट्ठी पत्री का दौर

Created at - June 13, 2018, 10:53 am
Modified at - June 13, 2018, 10:57 am

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियों की संविलियन की घोषणा के बाद नियम शर्तों को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। 18 तारीख को कैबिनेट की बैठक के बाद ही संशय दूर होने की संभावना है, लेकिन इसके पहले कयासों और श्रेय लेने का दौर चल रहा है। इतना ही नहीं विपक्ष सरकार की मंशा पर भी सवाल उठा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने साफ किया है कि काफी सोच समझकर फैसला लिया गया है। ऐसे में शिक्षाकर्मियों की नजर कैबिनेट की बैठक पर टिकी हुई है।

संविलियन की घोषणा पश्चात शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के प्रदेश संचालक विरेन्द्र दुबे और केदार जैन ने कहा कि इसका श्रेय संविलियन आंदोलन से जुड़कर संघर्ष करने वाले प्रत्येक शिक्षाकर्मी को जाता है,जिसने अपना तन-मन और धन लगाकर, विभिन्न मुश्किल परिस्थितियों में भी डटे रहेजेल गए, निलंबित हुएबर्ख़ास्त हुए थे।

 

मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और दृढ़इच्छाशक्ति रखकर संविलियन की घोषणा करने हेतु आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री समस्त शिक्षाकर्मियों के वेतन विसंगति दूर करते हुए नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के दिन अर्थात 18 जून को ही केबिनेट में पास कराकर आदेश जारी करेंगे। जिससे प्रदेश का हर शिक्षाकर्मी पूर्ण शिक्षक के रूप में विद्यालय जा सके और सभी जगह खुशी का वातावरण बने।

इस प्रेस वार्ता में मोर्चा के उपसंचालक धर्मेश शर्माचन्द्रशेखर तिवारीजितेन्द्र शर्मा,ताराचन्द जायसवाल,पवन सिंह,डॉ सांत्वना ठाकुरदीपिका झाजय श्री,जितेन्द्र गजेंद्र,अतुल अवस्थी,अजय वर्मा,देवेंद्र हरमुख, शिवकुमार,भानू डहरिया,आदि मोर्चा के समस्त पदाधिकारी मौजूद थे।

 

ये भी पढ़ें भय्यू महाराज को बेटी कुहू देगी मुखाग्नि, अंतिम दर्शनों के लिए रखा जाएगा पार्थिव देह

 

उधर, कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग की उपाध्यक्ष शेषराज हरवंश ने शिक्षाकर्मियों को खुला पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है आपने अपने अदम्य साहस और बुलंद हौसलों से असंभव को संभव कर दिखाया। आपके 15 दिवस के संघर्ष के दौरान जिस मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने आपके विषय में मीडिया को यह वक्तव्य दिया था की संविलियन संभव ही नहीं है यह न तो कभी हुआ है और न ही होगा। उन्हें मात्र माह में आपने अपने जुझारूपन से इस प्रकार मजबूर किया कि उन्हें आप के संविलियन की घोषणा को मजबूर होना पड़ा। यह आप की ऐतिहासिक जीत है और अन्य कर्मचारी संगठनों के लिए प्रेरणादायक और उदाहरण है कि अपने हक के लिए आखिरकार कैसे संघर्ष करें।

 

उन्होंने आगे लिखा है कि साथियोंघोषणा तो हो चुकी है पर अभी घोषणा का स्वरूप आना बाकी है और आप के पूर्व अनुभव से आप सहज रुप से अंदाजा लगा सकते हैं कि इसमें कई प्रकार की विसंगति होने की संभावना है। मेरी भगवान से प्रार्थना है की विसंगति रहित संविलियन की आपको प्राप्ति हो लेकिन 2013 का अनुभव इस बात का गवाह है कि दिए हुए लाभ को आप को ही दो वर्गों में बांटने के लिए प्रयोग किया जा सकता है जैसे2013 में किया गया था और वर्ष के समय सीमा बंधन के साथ बीच में एक रेखा खींच दी गई जिस का दंश आज तक आप लोग झेल रहे हैं साथ ही उस समय वेतन निर्धारण में की गई विसंगति के कारण आप आज भी अपने साथ नियुक्त हुए मध्यप्रदेश के साथियों से से 10 हजार कम पा रहे है। खास तौर पर शिक्षाकर्मी वर्ग के साथ तो विसंगतियों का चोली-दामन का साथ बना दिया गया है अन्य प्रदेश के साथ-साथ अपने प्रदेश में भी उन्हें सही वेतन प्राप्त नहीं हो पा रहा है और पदोन्नति के अभाव में योग्य होने के बावजूद हजारों शिक्षाकर्मी साथी उसी वेतनमान पर दो दशक से काम करने को मजबूर है यदि क्रमोन्नति वेतनमान भी प्रदेश में दे दिया जाता तो स्थिति में सुधार हो सकता था पर इस प्रदेश में दे कर काट लेने की परंपरा वर्तमान सरकार ने विद्यमान कर दी है जिसके चलते चुनाव के बाद आपके भत्ते भी काट लिए गए और क्रमोन्नति का आदेश भी निरस्त हो गया। ऐसी स्थिति में यदि उसी विसंगतिपूर्ण वेतन पर पुनः वेतन निर्धारण किया जाता है तो मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों के वेतन में जो दरार है वह खाई में तब्दील हो जाएगी जिसे आप कभी भी नहीं पाट पाएंगे इसलिए फूलों और गुलदस्तों से लादने के पहले एक बार अपने आदेश का अच्छे तरीके से अध्ययन जरुर कर लीजिएगा। आप सब उस वर्ग से आते हैं जो प्रदेश का सबसे बुद्धिजीवी वर्ग है और आप अपना भला बुरा बेहतर तरीके से समझते हैं।

 

ये भी पढ़ें- मोदी का 3 साल में पांचवां और दो महीने में दूसरा छत्तीसगढ़ दौरा, बस्तर को देंगे  विमान सेवा की सौगात

 

 प्रदेश के मुख्य सचिव का मीडिया में जो बयान आया था उसके अनुसार "छत्तीसगढ़ का ड्राफ्ट मध्यप्रदेश के ड्राफ्ट से बेहतर होगा" इसका सीधा सा मतलब है कि यहां भी प्रदेश के सभी शिक्षाकर्मियों का एक साथ मूल शिक्षा विभाग में संविलियन होगा और सातवां वेतनमान की प्राप्ति होगी क्योंकि मध्यप्रदेश में क्रमोन्नत वेतनमान भी दिया जा रहा है इसलिए वह भी आपका अधिकार है साथ ही वहां और यहां जो वेतन की विसंगति है वह भी दूर होनी चाहिए तभी यहां का ड्राफ्ट मध्यप्रदेश से बेहतर माना जा सकता है। सरकार की नीति और नीयत को देखकर ऐसा लगता तो नहींपर फिर भी मेरी शुभकामनाएं और हार्दिक इच्छा है की पूर्व के सभी अनुभव इस बार गलत हो जाए और आपको ऐसी विसंगतिरहित संविलियन की प्राप्ति हो कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को संभालने वाले कर्णधारों के कंधे मजबूत हो सके और आपको आपका जायज हक मिल सके। प्रदेश के किसी शिक्षाकर्मी के साथ वर्ष बंधन के नाम पर कोई अन्याय न हो और सभी का एक साथ मूल शिक्षा विभाग में संविलियन हो यही हमारी कामना और आपके लिए शुभकामना है

वेब डेस्क, IBC24


Download IBC24 Mobile Apps

Trending News

Related News