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क्या कहता है कोंडागांव विधानसभा सीट के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड, देखिए जनता का मूड मीटर

Created at - June 19, 2018, 8:50 pm
Modified at - June 19, 2018, 8:50 pm

कोंडागांव। हम आज आपको बताते हैं कोंडागांव विधानसभा के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड। बस्तर छत्तीसगढ़ में वो इलाका है जहां आने वाले चुनाव में सबसे बड़ा सियासी घमासान देखने को मिल सकता है और आज हम इसी बस्तर की बेहद अहम सीट कोंडागांव की बात कर रहे हैं। कहने को तो सीट की तासीर कांग्रेसी रही है पर जनता ने भारतीय जनता पार्टी को भी करीब-करीब बराबर का अवसर दिया है। शंकर सोढ़ी और लता उसेंडी के रूप में दो-दो मंत्री भी क्षेत्र को मिले। बावजूद इसके इलाके में कोई बड़ी उपलब्धि नजर नहीं आती। यहां आज भी बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई है, जिनका चुनावी मुद्दा बनना तय है। 

पिछले कुछ समय से कोंडगांव के विधायक मोहन मरकाम की व्यस्तता कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। चाहे लोगों से मिलना जुलना हो या उनकी समस्याओँ को सुनकर उनका निराकरण करना। अपने विधानसभा क्षेत्र में पूरी तरह से एक्टिव मोड नजर आ रहे हैं नेताजी। इसी कड़ी में जब वो मरारपारा क्षेत्र में लोगों से मिलने पहुंचे तो वहां के लोगों ने उन्हें पानी की गंभीर किल्लत से वाकिफ कराया, जिसे सुनने के बाद नेताजी तुरंत फोन पर किसी को डांटने लगे कि तुरंत उसका समाधान करें। दरअसल नेताजी इस बात को बखूबी जानते हैं कि चुनाव जीतना है तो क्षेत्र की जनता का दिल जीतना जरूरी है। लेकिन ऐसा नहीं है कि जनता इस बात को नहीं समझती।

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जाहिर है जिन वादों और दावों के दम पर कांग्रेस ने चुनाव जीता था उसमें से कोई वादा धरातल पर नजर नहीं आता। कोंडागांव के कई इलाकों में पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है और अगर कहीं पानी आ भी रहा है तो वो भी फ्लोराइड युक्त पानी। जिसे पीकर लोग बीमार पड़ रहे हैं। वहीं बिजली सहित दूसरे बुनियादी सुविधाओं की कमी भी बनी हुई है। हालांकि विधायकजी का दावा है कि वो जनता की उम्मीदों पर खरा उतरे हैं और उनके कार्यकाल में क्षेत्र का बेहतर विकास हुआ है।

हालांकि विधायकजी की बातों से विपक्ष इत्तेफाक नहीं रखता। बीजेपी की कद्दावर नेत्री और पूर्व मंत्री लता उसेंडी के मुताबिक कोंडागांव में जो भी विकास कार्य हुआ है वो राज्य सरकार ने करवाएं हैं। विधायकजी जब काम हो जाता है तो बस श्रेय लेने आ जाते हैं।

कुल मिलाकर जिला बनने के बाद भी कोंडागांव में समस्याएं यथावत है और सड़क, पानी, और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए लोग तरस रहे हैं, जिसे लेकर लोगों में काफी गुस्सा है। जाहिर है मौजूदा विधायक जहां इस नाराजगी को दूर करने की कोशिश में है तो बीजेपी इसे भुनाने की जुगत भिड़ा रही है।

कोंडागांव विधानसभा में आज भी लोग बुनियादी समस्याओं को लेकर परेशान हैं। शहरी इलाके में जहां सुनियोजित विकास का अभाव है। वहीं ग्रामीण इलाकों में साफ-सफाई से लेकर पेयजल की समस्या बनी हुई है। चुनावी साल है तो विपक्ष इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस विधायक को घेरने में जुट गई है। इतना ही नहीं कांग्रेस विधायक को लेकर पार्टी से ही आवाज उठने लगी है कि उन्होंने कुछ काम नहीं किया और उनको टिकट नहीं मिलना चाहिए।

बस्तर की बेहद खास सीट है कोंडागांव। खास इसलिए क्योंकि यहां की राजनीति ने प्रदेश को शंकर सोढ़ी और लता उसेंडी जैसे दो कद्दावर मंत्री दिए। लेकिन दो-दो मंत्रियो का इलाका होने के बावजूद क्षेत्र विकास की रफ्तार में दूसरे इलाकों से काफी पीछे है। आज भी कोंडागांव में कुपोषण की समस्या गंभीर बनी हुई है। खेल एकेडमी भानपुरी इलाके में खोल दी गई, जबकि पूरे बस्तर में सबसे अच्छे खिलाड़ी कोंडागांव से निकलते हैं। यहां खेल एकेडमी इंडोर स्टेडियम और स्विमिंग पूल सहित दूसरी छोटी-बड़ी घोषणाओं पर कोई काम नहीं हुआ है। इसे लेकर स्थानीय खिलाड़ियों में निराशा है।

खिलाड़ियों की तरह किसानों का भी बुरा हाल है। इलाके में मक्का की बंपर खेती होती है..लेकिन प्रसंस्करण केंद्र नहीं होने से किसान को ज्यादा फायदा नहीं मिलता। सरकारी खरीदी नहीं होने के कारण भी किसानों की फसल बिचौलियों के हाथ चली जाती है। जाहिर है किसानों की परेशानी आने वाले चुनाव में विधायक के खिलाफ जा सकती है। हालांकि विधायक मोहन मरकाम ऐसा नहीं मानते हैं।

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नेताजी लाख दावा करें कि उन्होंने अपने क्षेत्र में काफी विकास किया है। लेकिन कांग्रेस में ही कुछ नेता मानते हैं कि वर्तमान विधायक का कार्यकाल बेहद खराब रहा है और वो इस बार चुनाव नहीं जीत सकते। हालांकि मोहन मरकाम पार्टी में गुटबाजी से इंकार करते हैं। उनके मुताबिक बस्तर क्षेत्र में कांग्रेस का अच्छा परफार्मेंस रहा है और आने वाले विधानसभा चुनाव में वो कोंडागांव में 20 हजार से अधिक वोटों से जीतेंगे।

कोंडागांव में बीजेपी की बात की जाए तो पूर्व मंत्री लता उसेंडी को टिकट मिलना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि अगर पार्टी किसी नए चेहरे पर दांव लगाती है तो बालसिह बघेल का नाम इस लिस्ट में सबसे आगे है। कुल मिलाकर कोंडागांव में आने वाले चुनाव में विकास से जुड़े मुद्दे गूंजने वाले हैं और दूरदराज के गांवो में लोग नेताओं के गायब होने की भी शिकायते करते हैं। जाहिर है इन गांवों में वोट मांगने जाने से पहले नेताओं को जनता की खरी खोटी सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए।

कोडागांव विधानसभा सीट उड़ीसा की सीमा से लगी है। इसके अलावा नारायणपुर, केशकाल और बस्तर विधानसभा इससे लगे हुए क्षेत्र हैं। विधानसभा में एकमात्र नगरी निकाय कोंडागांव, नगर पालिका परिषद है। वर्तमान में कांग्रेस के मोहन मरकाम यहां के विधायक हैं। जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में निकटतम मुकाबले में लता उसेंडी को हराया था। इस बार भी अगर कोई बड़ा उलेटफेर नहीं हुआ तो दोनों के बीच ही सियासी घमासान होना तय है।

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अपनी शिल्पकला के लिए दुनिया भर में जाना जाता है कोंडागांव। यहां के स्थानीय लोग शिल्पकला के क्षेत्र में वर्षों से काम कर रहे हैं पर अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलने के बाद भी इन्हें बनाने वाले कलाकारों को बेहतर बाजार नहीं मिल पाया है, जिससे नई पीढ़ियां इस धरोहर से दूर होती जा रही है। कोंडगांव में जिस तरह शिल्पकला पुराने कलाकारों के भरोसे चल रही है। उसी तरह यहां की राजनीति में भी इक्के-दुक्के युवा नेता ही नजर आते हैं। बस्तर के दूसरे विधानसभा सीटों की तरह यहां टिकट को लेकर ज्यादा मारामारी नहीं है। बीजेपी जहां लता उसेंडी के भरोसे यहां चुनाव लड़ती है तो कांग्रेस शंकर सोढ़ी और मोहन मरकाम पर काफी हद तक निर्भर करती है।

वैसे कोंडागांव के सियासी इतिहास की बात की जाए तो इस सीट को कांग्रेस का मजबूत गढ़ कहा जा सकता है। हालांकि बीच-बीच में बीजेपी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। 1967 से लेकर 1980 तक यहां कांग्रेस के मनकुराम सोढ़ी ने यहां से लगातार चार चुनाव जीते। 1985 में सुखलाल मंडावी ने यहां कांग्रेस की कब्जा बरकरार रखा लेकिन 1990 में बीजेपी ने पहली बार यहां अपना झंडा फहराया और मंगलराम उसेंडी यहां से विधायक चुने गए। 1993 में  ने कांग्रेस की यहां से वापसी कराई और 1998 में भी अपना कब्जा बरकरार रखा। लेकिन राज्य बनने के बाद बीजेपी की लता उसेंडी ने शंकर सोढ़ी को मात देकर यहां धमाकेदार जीत दर्ज की। 2008 में भी उनका जीत का सिलसिला जारी रहा और उन्होंने कांग्रेस के मोहन मरकाम को मात दी। लेकिन 2013 में मोहन मरकाम ने पिछली हार का बदला लेते हुए लता उसेंडी को हराकर वापस सीट पर कांग्रेस की वापसी कराई। आने वाले चुनाव में यहां एक बार दोनों ही पार्टियों के बीच जोरदार घमासान देखने को मिल सकता है, जिसके आसार अभी से दिखने भी लगे हैं।

वेब डेस्क, IBC24


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