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बुनियादी समस्याओं से जुझ रही तेंदूखेड़ा की जनता

Created at - June 27, 2018, 4:42 pm
Modified at - June 27, 2018, 4:42 pm

अब बात मध्य प्रदेश की तेंदूखेड़ा विधानसभा की...सियासी बिसात और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर...

नरसिंहपुर जिले में आती है विधानसभा सीट

कुल मतदाता-1 लाख 69 हजार 420

पुरुष मतदाता-89 हजार 460

महिला मतदाता-79 हजार 957

वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा

संजय शर्मा हैं बीजेपी विधायक

तेंदूखेड़ा विधानसभा की सियासत

चुनाव नजदीक हैं तो तेंदूखेड़ा में चुनावी हल-चल भी तेज हो गई है...जीत हार के गुणा-भाग में जुट गए हैं सियासी दल...तो वहीं विधायक की टिकट के लिए भी लाइन लगनी शुरु हो गई है । 

बीते विधानसभा के चुनावी रण में बीजेपी के संजय शर्मा ने जीत का परचम लहराया था....एक बार फिर चुनाव की रणभेरी बजने वाली है तो बीजेपी इस बार भी जीत की चाह में मैदान में उतरेगी..तो कांग्रेस  बीजेपी के इस किले में सेंध लगाने की रणनीतियां बनाने में जुट गई है...जीत हार के गुणा-भाग के बीच विधायक की टिकट की आस में नेता विधानसभा में सक्रिय दिखाई देने लगे हैं...बीजेपी हो या फिर कांग्रेस दोनों में ही दावेदारों की लंबी लिस्ट है...सबसे पहले बात बीजेपी की करें तो वर्तमान विधायक संजय शर्मा सबसे प्रबल दावेदार हैं...संजय शर्मा के अलावा फिलहाल बीजेपी के पास कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आता...अब बात कांग्रेस की करें तो सुरेंद्र ढिमोले टिकट की दौड़ में सबसे आगे हैं...इसके अलावा देवेंद्र पटेल और पूर्व मंत्री  चंद्रभान सिंह के बेटे शैलेन्द्र सिंह भी दावेदार हैं..मुलायम पटेल और शोभा जैन भी कांग्रेस से दावेदारों की लाइन में हैं ।

तेंदूखेड़ा विधानसभा के मुद्दे

तेंदूखेड़ा हर तरफ समस्याओं से घिरा नजर आता है..कहने को तो उन्नत खेती है लेकिन फिर भी किसान परेशान है...कई गांव आज भी सड़क और बिजली के इंतजार में हैं ।

तेंदूखेड़ा विधानसभा कृषि उपकरण निर्माण के लिए जाना जाता है...खेती-किसानी में भी आगे है ये इलाका लेकिन फिर भी किसान परेशान है..हालत ये की किसानों को फसलों का सही दाम मिल नहीं पा रहा है..वहीं किसानों के लिए बनी योजनाएं केवल कागजों में दौड़ रही हैं...किसानों का हक किस तरह मारा जा रहा है इसकी बानगी है बीते साल हुआ दलहन घोटाला...विधानसभा में विकास का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में अब तक ना तो बिजली पहुंची और ना ही सड़क..नर्मदा नदी में बढ़ते प्रदूषण और अवैध उत्खनन पर भी लगाम नहीं लग पा रही है..इसके अलावा बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है क्योंकि रोजगार के साधन विधानसभा में हैं ही नहीं...शिक्षा और स्वास्थ्य के मोर्च पर भी फेल है तेंदूखेड़ा। स्कूल और अस्पताल दोनों ही संसाधनों और स्टॉफ की कमी से जूझ रहे हैं..ये वो समस्याएं हैं जिनसे जूझ रही है तेंदूखेड़ा की जनता ।

 

 

वेब डेस्क, IBC24


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