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घट्टिया में विकास की रफ्तार धीमी, मूलभूत सुविधाओं की कमी

Created at - June 28, 2018, 5:00 pm
Modified at - June 28, 2018, 5:00 pm

अब बात करते हैं मध्यप्रदेश की घट्टिया विधानसभा की..क्या है यहां के सियासी समीकरण जानने से पहले डालते हैं एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर...

उज्जैन जिले में आती है विधानसभा सीट

अनुसूचित जाति के लिए अरक्षित है सीट

सोयाबीन, गेंहू चना है प्रमुख फसल

जनसंख्या- 2 लाख 4 हजार

उज्जैन जिले की सबसे बड़ी तहसील घट्टिया

विधानसभा क्षेत्र में शामिल हैं 138 ग्राम पंचायत

फिलहाल सीट पर बीजेपी का कब्जा

सतीश मालवीय हैं वर्तमान विधायक

सियासत-

जैसे-जैसे चुनाव का वक्त नजदीक आ रहा है..घट्टिया में नेता सक्रिय नजर आने लगे हैं..और टिकट के लिए जनता के दरबार में पहुंचने लगे हैं...बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों दलों में एक से ज्यादा नेता टिकट के लिए ताल ठोंक रहे हैं। 

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित घट्टिया विधानसभा में फिलहाल सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी  का कब्जा है..और बीजेपी के सतीश मालवीय विधायक हैं..जिन्होंने पिछले चुनाव में कांग्रेस के रामलाल मालवीय को शिकस्त दी.. चुनावी साल में घट्टिया में एक बार फिर सियासी पारा चढ़ने लगा है...बीजेपी से सिटिंग एमएलए सतीश मालवीय भारी विरोध के बाद भी चुनावी तैयारियों जुट गए हैं..दरअसल विधायक जी पर मारपीट संबंधी कई मामले चल रहे हैं..जिसके कारण वो गिरफ्तार भी हो चुके हैं.. वहीं क्षेत्र की जनता भी उनके व्यवहार से काफी परेशान है...ऐसे में सतीश मालवीय की पूरी उम्मीदें अब पार्टी हाईकमान के फैसले पर निर्भर करता है..कि वो उनपर कितना भरोसा करती है ..वहीं दूसरी और उज्जैन सांसद चिंतामणि मालवीय भी घट्टिया से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं...वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में चुनाव लड़ने वालों की लंबी कतार है..पार्टी के संभावित दावेदारों की बात की जाए तो दो बार के विधायक रामलाल मालवीय का नाम सबसे आगे है...इनके अलावा बहादुर सिंह देपन, सुरेंद्र मरमट, जगदीश ललावत और कारण कुमारिय भी कांग्रेस से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। 

मुद्दे-

घट्टिया में नेता और सियासी पार्टियां हर बार चुनाव से पहले वादों और दावों की झड़ी लगा देते हैं..लेकिन विकास की रफ्तार में इलाका काफी पिछड़ा नजर आता है.. आज भी घट्टिया विधानसभा क्षेत्र की जनता मूलभूत समस्याओँ से जूझ रही है...खस्ताहाल सड़क और साफ सफाई का यहां बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा। 

उज्जैन जिले के घट्टिया विधानसभा क्षेत्र की आधी से ज्यादा आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है..यहां के लोग पूरी तरह से कृषि पर निर्भर हैं...क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो सड़क, बिजली और पानी यहां की प्रमुख समस्या है. विधानसभा के सबसे बड़े गांव उन्हेल जानेवाली सड़क की स्थिति देखकर आप इलाके का अंदाजा लगा सकते हैं. बरसात के दिनों में स्थिति बेहद बदतर हो जाती है... पीने के लिए साफ पानी का भी संकट है. जिसकी वजह से लोगों कई बार बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं. क्षेत्र में फैली गंदगी से भी लोगों का जीना दूभर हो गया है. अवैध खनन भी यहां की बड़ी समस्या है. इलाके में उद्योग धंधा नहीं होने की वजह से युवाओं के पास रोजगार के लिए पलायन के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है..बिजली की कमीन से किसान परेशान हैं।

स्थानी लोगों का कहना है कि पेंशन और प्रमाणपत्र जैसी सुविधाओं के लिए बार-बार नगर परिषद का चक्कर लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है..कुल मिलाकर घट्टिया विधानसभा क्षेत्र में मुद्दों की कोई कमी नहीं है. अब देखना ये है कि आने वाले चुनाव में वोट स्थानीय मुद्दों को लेकर मांगे जाते हैं या नहीं।

 


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