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भानुप्रतापपुर में विकास का पहिया थमा, शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार में भी फेल

Created at - July 3, 2018, 5:02 pm
Modified at - July 3, 2018, 5:02 pm

जनता मांगे हिसाब के सफर की शुरुआत करते हैं छत्तीसगढ़ की भानुप्रतापपुर विधानसभा से...सियासी समीकरण और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर...

कांकेर जिले में आती है विधानसभा सीट

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र

विधानसभा में 3 ब्लॉक शामिल

जनसंख्या करीब 2 लाख 53 हजार

कुल मतदाता-1 लाख 88 हजार 644

पुरुष मतदाता-92 हजार 134

महिला मतदाता- 96 हजार 510

वर्तमान में विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा

मनोज मंडावी हैं कांग्रेस विधायक

सियासत-

चुनाव का काउंटडाउन शुरु हो चुका है..कांग्रेस की इस कब्जे वाली विधानसभा सीट पर, बीजेपी जीत की संभावनाएं तलाशने में जुट गई है...लेकिन ये इतना आसान नहीं है..क्योंकि अब तक तो चुनावी टक्कर बीजेपी और कांग्रेस में होती आई है लेकिन इस बार मैदान में होगी JCCJ 

भानुप्रतापपुर विधानसभा में कभी कांग्रेस की जीत का डंका बजा तो कभी कमल खिला..2003 में बीजेपी के देवलाल दुग्गा ने कांग्रेस के मनोज मंडावी को शिकस्त दी..2008 में बीजेपी के ब्रम्हा नेताम ने कांग्रेस की गंगा पोटाई को हरा कर जीत का परचम लहराया..लेकिन 2013 में बीजेपी इस सीट को बचा नहीं पाई और कांग्रेस के मनोज मंडावी ने सतीश लाटिया को करारी शिकस्त देकर जीत दर्ज की..अब फिर चुनाव नजदीक हैं तो जहां कांग्रेस इस बार भी जीत बरकारर रखने की कोशिश में है तो वहीं बीजेपी अपनी वापसी की रणनीतियां बनाने में जुट गई है।

इसके साथ ही विधायक की टिकट की रेस भी शुरु हो गई है... बात कांग्रेस की करें तो वर्तमान विधायक मनोज मंडावी सबसे प्रबल दावेदार हैं..इसके अलावा बीरेश ठाकुर भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं..अब बात बीजेपी की करें तो देवलाल दुग्गा और ब्रम्हा नेताम का नाम सबसे आगे है तो वहीं हेमेंद्र ठाकुर भी दावेदार हैं..जहां बीजेपी और कांग्रेस में दावेदारों की लाइन लगी है तो वहीं JCCJ ने मानक दरपट्टी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है ।

मुद्दे-

भानुप्रतापपुर विधानसभा में विकास का पहिया थमा नजर आता है...शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार के मोर्चे पर भी फेल है ये विधानसभा। स्कूल हैं तो शिक्षक नहीं...अस्पताल हैं तो डॉक्टर नहीं...उद्योग हैं लेकिन रोजगार नहीं..यही हाल है भानुप्रतापपुर विधानसभा का..शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का तो हाल बुरा है...जहां स्कूलों में शिक्षकों की कमी है तो वहीं उच्च शिक्षण संस्थान ना होने की वजह से छात्र बड़े शहर जाने को मजबूर हैं..स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं क्योंकि अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं..कहने को तो पॉवर हब बन रहा है भानुप्रातपपुर लेकिन लोगों को रोजगार मिल नहीं पा रहा है..अगर मिल रहा है तो केवल प्रदूषण..हालत ये कि ना हवा शुद्ध है और ना ही पानी...बढ़ता ट्रैफिक और सड़क हादसों से भी लोग परेशान हैं...इन सब समस्याओं के बीच विधानसभा का अन्नदाता भी संकटों से घिरा नजर आता है...क्योंकि किसानों को ना तो सिंचाई के पर्याप्त साधन हैं और ना ही उपज का सही दाम मिल रहा है ।

 

वेब डेस्क, IBC24

 


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