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बदनावर में थमा विकास का पहिया, बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जनता

Created at - July 6, 2018, 5:02 pm
Modified at - July 6, 2018, 5:02 pm

अब बात मध्य प्रदेश की बदनावर विधानसभा की..सियासी बिसात और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर..

धार जिले में आती है विधानसभा सीट

कुल जनसंख्या करीब 2 लाख 50 हजार

कुल मतदाता-1 लाख 92 हजार 55

पुरुष मतदाता-96 हजार 848

महिला मतदाता-95 हजार 204

वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा

भंवर सिंह शेखावत हैं बीजेपी विधायक

सियासत-

बदनावर विधानसभा में जहां बीजेपी और कांग्रेस जीत-हार के गुणा-भाग में जुटे हैं.तो वहीं विधायक की टिकट के लिए दावेदारों की लाइन लगनी शुरु हो गई है. 2003 और 2008 में कांग्रेस के राजवर्धन सिंह ने जीत का परचम लहराया..लेकिन 2013 में कांग्रेस के किले में बीजेपी ने सेंध लगाई और भंवर सिंह शेखावत ने जीत दर्ज की... अब चुनाव की उल्टी गिनती शुरु होते ही चुनावी बिसात भी बिछनी शुरु हो गई है...जहां कांग्रेस पिछली हार का बदला लेने की तैयारी में है तो वहीं बीजेपी इस बार भी जीत की तलाश में है।

इन सब जीत-हार के गुणा-भाग के बीच टिकट के दावेदार भी सक्रिय दिखाई देने लगे हैं..बात बीजेपी की करें तो वर्तमान विधायक भंवर सिंह शेखावत सबसे प्रबल दावेदार हैं..इसके अलावा मनोज सोमानी और महेंद्र सिंह दावेदारों में शामिल हैं..अब बात कांग्रेस की करें तो पूर्व विधायक राजवर्धन सिंह का नाम सबसे आगे है..तो वहीं मनीष बोकड़ीया और गिरीश प्रताप सिंह भी दावेदार हैं..इसके अलावा अभिषेक सिंह भी टिकट के लिए ताल ठोक रहे हैं ।

मुद्दे-

बदनावर में योजनाएं तो बहुत बनी लेकिन धरातल पर नहीं उतरी..अगर उतरी होती है तो विधानसभा में विकास की तस्वीर कुछ और होती...हालत ये है कि बदहाल सड़कें..पानी के लिए तरसते लोग यही पहचान बन गई है इस विधानसभा सीट की..

जहां भी नजर डालिए केवल अभावों और समस्याओं के टापू ही दिखाई देंगे बदनावर विधानसभा में..चमचमती सड़कों का ढिढौरा तो पीटा जाता है लेकिन बदनावर का सच यही है कि सड़कें कम गड्डे ज्यादा हैं...स्वच्छता के मामले में भी फिसड्डी है विधानसभा.. हर तरफ कचरे का अंबार नजर आता है।

पेयजल संकट से भी जूझ रही है जनता ग्रामीण इलाकों की तो छोड़िए बदनावर के नलों में 3 से 4 दिन में एक बार पानी आता है...बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है क्योंकि रोजगार के साधन हैं नहीं नतीजा पलायन को मजबूर हैं लोग...स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा भी बदहाल है..कहीं स्कूल में शिक्षक हैं तो बिल्डिंग नहीं अगर बिल्डिंग हैं तो शिक्षक नहीं...उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी के चलते छात्र बड़े शहर जाने को मजबूर हैं । शिक्षा की तरह ही स्वास्थ्य सुविधाओं का भी बुरा हाल है ।

 

वेब डेस्क, IBC24


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