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IBC24 की चौपाल में बलौदाबाजार की जनता ने मुखर की आवाज

Created at - July 7, 2018, 4:42 pm
Modified at - July 7, 2018, 4:42 pm

जनता मांगे हिसाब के सफर की शुरुआत करते हैं छत्तीसगढ़ की कसडोल विधानसभा से..ये विधानसभा सियासी नजरिए से इसलिए अहम है क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल कसडोल से ही विधायक हैं...सियासी बिसात और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर एक नजर..

बलौदाबाजार जिले में आती है विधानसभा सीट

लव-कुश की जन्म स्थली के लिए प्रसिद्ध

कुल मतदाता-3 लाख 25 हजार  504

पुरुष मतदाता-1 लाख 64 हजार 986

महिला मतदाता-1 लाख 60 हजार 489

दो तहसील और तीन नगर पंचायत विधानसभा में शामिल

वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा

गौरीशंकर अग्रवाल हैं बीजेपी विधायक

सियासत-

कांग्रेस की परंपरागत सीटों में से एक है कसडोल विधानसभा...क्योंकि ज्यादातर इस सीट पर कांग्रेस ही जीत का परचम लहराती आई है..लेकिन वर्तमान में बीजेपी के कब्जे में है । कभी कांग्रेस के गढ़ के तौर पर जानी जाती थी कसडोल विधानसभा..

पूर्व मुख्यमंत्री रहे डीपी मिश्रा और कन्हैयालाल शर्मा जैसे दिगग्ज नेताओं की सियासी जमीन रही कसडोल...लेकिन अब इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है...बीते चुनाव में बीजेपी के गौरीशंकर अग्रवाल ने कांग्रेस के राजकमल सिंघानिया को शिकस्त दी थी..अब फिर चुनाव नजदीक हैं चुनावी शोरगुल भी सुनाई देने लगा है..इसके साथ ही विधायक की टिकट के दावेदार में सक्रिय हो गए हैं...कांग्रेस की बात करें तो दावेदारों की लंबी फौज है..जिसमें सबसे पहला नाम है महंत रामसुंदर दास का..तो वहीं मनीष मिश्रा,रित्विक मिश्रा और मानस सुमन पांडेय भी दावेदार हैं..इस विधानसभा सीट पर JCCJ भी चुनावी तैयारियों में जुट गई है...JCCJ में लेखराम साहू,मनिहार साहू और पारस नाथ साहू प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं..बीजेपी से अब तक सिर्फ एक ही नाम सामने आया है वो हैं वर्तमान विधायक गौरीशंकर अग्रवाल ।

देखें वीडियो-

मु्द्दे-

कसडोल विधानसभा में शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दे हर बार चुनाव में गूंजे लेकिन हालत नहीं बदले। आज भी स्थिति जस की तस है कसडोल विधान में विकास कार्य तो हुए लेकिन आज वो सवालों के घेरे में हैं..कहीं गुणवत्ता तो कहीं भ्रष्टाचार के आरोप। विधानसभा की जीवनदायनी महानदी में लगातार अवैध रेत उत्खनन जारी है लेकिन लगाम नहीं लग पा रही है।

मुख्य सड़कें तो ठीकठाक हैं लेकिन ग्रामीण इलाकों में सड़कों की हालत खराब है..कसडोल को अब तक रेल नक्शे पर भी जगह नहीं मिल पाई है..स्कूली और उच्च शिक्षा भी बदहाल है..ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में कहीं शिक्षक नहीं हैं तो कहीं बिल्डिंग नहीं हैं..कसडोल महाविद्यालय में आज भी स्टॉफ और संसाधनों की कमी है.. स्कूल और शिक्षा के साथ रोजगार की भी स्थिति ठीक नहीं है..बेरोजगारी के चलते लगातार पलायन जारी है..इन सब समस्याओं के बीच किसान भी परेशान है..फसल बीमा की राशि के लिए किसान भटक रहे हैं...सिंचाई की तो छोड़िए पीने तक तक के लिए संघर्ष कर रही है जनता ।

 

वेब डेस्क, IBC24


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