IBC-24

बोहरा समाज में बच्चियों के खतने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Reported By: Abhishek Mishra, Edited By: Abhishek Mishra

Published on 10 Jul 2018 03:24 PM, Updated On 10 Jul 2018 03:24 PM

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम बोहरा समाज में खतना प्रथा पर सख्त सवाल किया है। कोर्ट ने इस प्रथा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस तरह की धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ पॉस्को एक्ट है, जिसमें नाबालिग उम्र की लड़कियों के निजी अंगों को छूना अपराध है। इस प्रथा से बच्ची को ऐसा नुकसान पहुंचता है जिसे भरा नहीं जा सकता। उन्होंने आगे बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और अफ्रीका जैसे 27 देशों में ये प्रथा पूरी तरह प्रतिबंधित है।

पढ़ें- एसपी के दफ्तर केरोसीन लेकर पहुंची रेप पीड़िता और उसकी मां, आत्मदाह की चेतावनी

सुनवाई के दौरान वेणुगोपाल ने केंद्र के रुख को दोहरते हुए कहा कि इस प्रथा से बच्ची के कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है और इससे भी अधिक खतने का स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। सिंघवी ने दलील दी कि इस्लाम में पुरुषों का खतना सभी देशों में मान्य है। इसमें लड़की के निजी अंग का बहुत ही छोटे से हिस्से को काटा जाता है जो नुकसानदायक नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि यह मुस्लिम पुरुषों की ही तरह की परंपरा है।पीठ ने वकील सुनीता तिवारी की ओर से दायर जनहित याचिका स्वीकार कर ली और इस पर अब 16 जुलाई को सुनवाई की जाएगी। 

पढ़ें- जापान में बाढ़ से 141 लोगों की मौत, 11 हजार घरों में बिजली गुल

 इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि पुरुषों में निजी अंगों का खतना करने के कुछ लाभ हैं, जिसमें एचआईवी फैलने का खतरा कम होना शामिल है, लेकिन महिलाओं का खतना हर हाल में बंद होना चाहिए, क्योंकि इसके काफी दुष्परिणाम हैं।

 

वेब डेस्क, IBC24

Web Title : SC On Khatana:

ibc-24