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बीएसपी के नए ब्लास्ट फर्नेस पर ठप होने का खतरा,पीएम मोदी ने किया था उद्घाटन ..देखें वीडियो

Created at - July 11, 2018, 12:38 pm
Modified at - July 11, 2018, 12:48 pm

भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट की गिनती सेल यानी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ध्वजवाहक यूनिट के रूप में होती है । बीते 14 जून को देश के प्रधानमंत्री ने यहां महात्वाकांक्षी एक्पेंशन प्रोजेक्ट को लोकार्पित किया । इसके साथ ही बीएसपी को मिला अब तक का सबसे ज्यादा क्षमतावान ब्लास्ट फर्नेस । खुद पीएम ने जिस यूनिट की शान में कसीदे पढ़े..उसका यहां के टॉप मैनेजमेंट ने इस क़दर मखौल बना दिया है कि उद्घाटन के कुछ ही दिनों के बाद उसकी सांसें फूल गई..वो तमाम तकनीकी चुनौतियों से घिर गई । लोकार्पण को महीना भी नहीं बीता था कि यूनिट 8 में तमाम समस्याएं आने लगीं । साफ है पीएम को गुमराह किया गया । अब जानकार ये चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यहां हालात को संभाला नहीं गया तो नया ब्लास्ट फर्नेस कई महीनों के लिए ठप पड़ सकता है । अगर ऐसा हुआ तो ये सेल के लिए किसी डिजास्टर से कम नहीं होगा । देखिए हमारी ये स्पेशल रिपोर्ट ।

देखें वीडियो-

ये तस्वीर उस वक्त की है..जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भिलाई स्टील प्लांट की नई यूनिट का उद्धाटन करने आए थे । जिस यूनिट-8 का उद्घाटन कुछ हफ्तों पहले पीएम ने किया था..जिसे बीएसपी की सबसे ज्यादा क्षमता वाला ब्लास्ट फर्नेस का तमगा मिला था..जिसको हर रोज 8000 टन स्टील उत्पादन करने में सक्षम बताया गया था..उसकी हालत उद्घाटन के बाद ही डांवाडोल है । हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि बीते 6 जुलाई को इसे 12 घंटों के लिए बंद भी करना पड़ा था..इससे भिलाई स्टील प्लांट के प्रोडक्शन में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई । बीएसपी के एक्सपेंशन और मॉडर्नाइजेशन कार्यक्रम के तहत नया ब्लास्ट फर्नेस लगाया गया है । सूत्र बताते हैं कि पीएम को ज्यादा प्रोडक्शन दिखाने के चक्कर में स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोजिसर्स का ध्यान नहीं रखा गया । इससे तकनीकी दिक्कत बढ़ती गई और अब भी इसे लेकर मैनेजमेंट नींद में दिख रहा है । नए ब्लास्ट फर्नेस की इस स्थिति के लिए हायर मैनेजमेंट को सीधे तौर पर दोषी माना जा रहा है । कई कर्मचारी नेता खुलकर ये कह रहे हैं कि बीएसपी कुप्रबंधन का शिकार हो गया है ।

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बीएसपी के अधिकारी इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं जबकि अंदरुनी सूत्र ये बताते हैं कि ब्लास्ट फर्नेस को बनाने वाली कंपनी  ने पहले ये साफ कर दिया था कि फुल प्रोडक्शन और स्मूथ रनिंग के लिए फर्नेस में साइज ओर और सिंटर के साथ ही 11.75 फीसदी पैलेट मिला होना चाहिए जो कि नहीं मिलाया गया ऐसे में यूनिट पर लोड बढ़ रहा है और ट्यूअर जल रहे हैं । यहां लगे 36 ट्यूअर्स में से 16 जल चुके हैं। उनमें से 11 ट्यूटर ही रिप्लेस हुए हैं । अब भी 5 ट्यूअर रिप्लेस नहीं हुए हैं..। आने वाले दिनों में अगर सारे ट्यूअर जल गए, और भट्टी जाम हो गई तो ये नई यूनिट कम से कम 6 माह के लिए ठप हो जाएगी।ऐसे में सरकार को 5000 करोड़ से ज्यादा की चोट खानी पड़ेगी । अगर ये यूनिट ठप पड़ी तो सेल के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं होगी। साथ ही केंद्र की साख को भी इससे धक्का पहुंचना तय है । सवाल है बीएसपी की ऐसी स्थिति बनी क्यों आखिर कौन इसके लिए जिम्मेदार है..?

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भिलाई स्टील प्लांट के नए ब्लास्ट फर्नेस में ही दिक्कत हो ऐसा भी नहीं है, बल्कि बीते करीब एक साल में यहां प्रोडक्शन भी पाताल में पहुंच चुका है । कभी सेल में सबसे ज्यादा उत्पादन देने वाला ये प्लांट अब लापरवाह प्रबंधन का शिकार बन गया है । तमाम नाकामियों के लिए सीधे शीर्ष मैनेजमेंट पर उंगली उठ रही है । ये सवाल भी उठ रहा है। कि आखिर क्यों गर्त में जा रहा है भिलाई स्टील प्लांट?

भिलाई स्टील प्लांट कभी अपनी गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता के लिए जाना जाता था। पर अब उसकी वो धाक रही नहीं । यहां उत्पादन घट रहा है। दिक्कतें बढ़ रही हैं और बदइंतजामियों में लगातार इजाफा हो रहा है । हालात ये कि अब बदनामियों का नया टोकरा लेकर घूमने लगा है प्लांट । सेल की शान रहा ये संयंत्र अब जैसे परेशानियों का गढ़ बन गया है । कर्मचारी नेता सीधे ये आरोप लगाते हैं कि जबसे मैनेजमेंट में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। प्लांट का कबाड़ा होने लगा है । 

कर्मचारी नेताओं के आरोपों में यकीन न हो तो ताजा आंकड़ों पर गौर कर सकते हैं । ये आंकड़े हमारे नहीं बल्कि स्टील मंत्रालय की एक स्वतंत्र कमेटी की है । ये आंकड़े बताते हैं कि प्लांट की प्रोडक्टिविटी लगातार गिर रही है । स्टील मिनिस्ट्री की ज्वाइंट प्लांट कमेटी यानी जेपीसी ने एक रिपोर्ट जारी की है जो भिलाई स्टील प्लांट की अंदरुनी हालात की तस्वीर बयां करती है । जेपीसी बुलेटिन के अप्रैल एडिशन को देखिए ज़रा जो साफतौर पर ये बताता है कि देश में स्टील इंडस्ट्री ग्रोथ कर रही है पर भिलाई प्लांट की उत्पादकता घट रही है । साल 2017-18 में भिलाई स्टील प्लांट ने 4.072 मिलियन टन स्टील का उत्पादन किया। जबकि बीते साल यानी 2016-17 में 4.737 मिलियन टन स्टील का उत्पादन हुआ था ।

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इस तरह पिछले साल के मुकाबले इस साल उत्पादन 14 फीसदी घटा है । ये कोई मामूली कमी नहीं है। जबकि दूसरे प्लांट्स अपनी उत्पादकता बढ़ा रहे हैं..तो बीएसपी का इस तरह नीचे जाना एक ऐसी हकीकत है। जो हैरान करती है। डराती है और सवाल भी खड़े करती है । सवाल बीते एक साल में ऐसा क्या हुआ। कि उत्पादन घटने लगा है। बीएसपी प्रबंधन में गिरावट क्यों दिख रही। एक पेशेवर और दक्ष प्लांट को आखिर हुआ क्या..कि सेल के सबसे अव्वल प्लांट का उत्पादन 14 फीसदी तक घट गया है । अगर इसी तरह उत्पादन गिरता रहा तो हालात को संभालना मुश्किल हो जाएगा ।

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अब सवाल ये उठता है कि बीते एक साल में ही हालात क्यों इतने बिगड़े? शीर्ष प्रबंधन का मतलब होता है। मजबूत आधार..कुशल नेतृत्व, समझदारी भरे फैसले और जवाबदेह कार्यप्रणाली का निर्माण करने वाला।  आखिर शीर्ष प्रबंधन इस गिरावट को रोकने के लिए कदम क्यों नहीं उठा रहा है ? क्या ये मान लिया जाए कि पूरा सिस्टम ही लकवाग्रस्त हो गया है? अगर इसका जवाब हां में है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? क्या स्टील मिनिस्ट्री अपने इस ध्वजवाहक प्लांट को बचाने के लिए कोई एक्शन प्लान लेकर आएगी ? और क्या प्लांट का टॉप मैनेजमेंट समय रहते अपनी जिम्मेदारियों को समझेगा?

 

 

वेब डेस्क, IBC24


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