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अशोकनगर में किसान परेशान और शिक्षा,स्वास्थ्य सेवा बदहाल

Created at - July 11, 2018, 4:53 pm
Modified at - July 11, 2018, 4:53 pm

अब बात मध्यप्रदेश की अशोकनगर विधानसभा की...सियासी बिसात और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर..

कुल मतदाता-1 लाख 90 हजार 542

पुरुष मतदाता-1 लाख 788

महिला मतदाता-89 हजार 748

SC और सामान्य मतदाता सबसे ज्यादा

वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा

गोपीलाल जाटव हैं बीजेपी विधायक

सियासत-

बीजेपी के मजूबत किलों में से एक मानी जाती है अशोकनगर विधानसभा...लेकिन इस बार कांग्रेस सेंध लगाने की पूरी तैयारी में है..जीत-हार के गुणा-भाग के बीच टिकट की दावेदारी भी शुरु हो गई है ।

बीजेपी का गढ़ मानी जाती है अशोकनगर विधानसभा वो इसलिए क्योंकि ज्यादातर बीजेपी ही इस सीट पर जीत का परचम लहराती आई है..बीते चुनाव में बीजेपी के गोपीलाल जाटव ने कांग्रेस के जजपाल सिंह को शिकस्त दी थी...इस बार के चुनावी समर में बीजेपी के लिए जीत आसान नहीं होगी..क्योंकि 2013 में कांग्रेस महज 2000 मतों से हारी थी..अब उसी हार का बदला लेने के इरादे से कांग्रेस मैदान में उतरेगी..चुनावी रणनीतियों के साथ टिकट की दावेदारी भी शुरु हो गई है..बात बीजेपी की करें तो वर्तमान विधायक गोपीलाल जाटव सबसे प्रबल दावेदार हैं..तो वहीं लड्डू राम कोरी, हरि बाबू राय और शीला जाटव भी टिकट की दौड़ में हैं..अब बात कांग्रेस की करें तो जजपाल सिंह का नाम सबसे आगे है..इसके अलावा अमित तावरे और त्रिलोक अहिरवार भी दावेदारों की लाइन में हैं ।

मुद्दे-

शरबति गेहूं के लिए मशूहर है अशोकनगर लेकिन इसके बाद भी किसान परेशान है..इसके अलावा शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मोर्चों पर भी फेल है ये विधानसभा ।

सियासी दौड़ में भले आगे हो अशोकनगर विधानसभा लेकिन विकास की दौड़ में पीछे है..शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार तीनों ही मोर्चों पर फेल नजर आती है ये विधानसभा..स्कूली शिक्षा की तो हालत खराब है ही..उच्च शिक्षा भी बदहाल नजर आती है..स्कूलों में शिक्षकों की कमी है तो उच्च शिक्षण संस्थानों की भी कमी है..स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं...अस्पताल संसाधनों और डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं ।बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है..क्योंकि उद्योग धंधे हैं ही नहीं..विधानसभा में सड़कों की हालत भी खराब है..अशोकनगर में पेयजल संकट से भी जूझ रही है जनता..विधानसभा का सरबति गेहूं प्रदेश ही नहीं देश भर में मशहूर है लेकिन इसके बाद भी किसान परेशान है..खेती बनेगी लाभ का धंधा ये वादे और दावे तो किए गए लेकिन सच तो यही है कि किसान लागत मूल्य तक के लिए तरस रहा है ।

 

वेब डेस्क, IBC24


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