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नाश्ते पर जुटे अमित शाह-नीतिश कुमार, मिशन 2019 पर सियासी जोड़तोड़

Reported By: Sanjeet Tripathi, Edited By: Sanjeet Tripathi

Published on 12 Jul 2018 02:48 PM, Updated On 12 Jul 2018 02:48 PM

पटना। मिशन 2019 के लिए जोड़तोड़ का सिलसिला तेज हो गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बिहार दौरे को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। दोनों नेताओं की नाश्ते पर 45 मिनट की मुलाकात हुई। चर्चा है कि इस दौरान दोनों पार्टियों के प्रमुखों ने सीट बंटवारे पर बात की है। नीतीश कुमार और अमित शाह के साथ बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी मौजूद थे। इस दौरान बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव, नित्यानंद राय भी उपस्थित थे। दोनों नेताओं के बीच रात डिनर में सियासी खिचड़ी पकने की उम्मीद की जा रही है।  

भारतीय जनता पार्टी संपर्क फॉर समर्थन चला रही है, इसी के तहत शाह पूरे देश का दौरा कर रहे हैं। अमित शाह और नीतीश कुमार ने खास नाश्तों के साथ राजनीति की बातें की। उन्हें बिहार का स्पेशल खाना परोसा गया। नाश्ते में पोहा, उपमा, सत्तू के पराठे, चना तोरई की सब्जी थी। इसके अलावा आलू की सब्जी, मट्ठा, फल का भी बंदोबस्त किया गया था। 

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लोकसभा चुनाव में अब करीब 8 महीने बचे हैं। लेकिन एनडीए के सभी घटक दलों ने बीजेपी पर सीटों के बंटवारे को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।  बीजेपी के रणनीतिकार चाहते हैं कि सीटों का बंटवारा 2014 लोकसभा चुनाव के अनुसार हो, जिसमें बीजेपी के हिस्से बिहार से 22 सीटों पर जीत मिली थी। 

रामविलास पासवान की लोजपा और उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा के साथ मिलकर गठबंधन में बीजेपी ने 30 सीटें लड़ी थी। बीजेपी करीब 22 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। दूसरी तरफ जेडीयू 2015 चुनावों का हवाला ज्यादा सीट चाहती है। 

उल्लेखनीय है कि बिहार में 40 लोकसभा की सीटें हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में इन 40 सीटों में से एनडीए को कुल 31 सीटों पर जीत हासिल हुई।  एनडीए की 31 सीटों में बीजेपी ने 22, लोजपा ने 6 और रालोसपा ने 3 सीटों पर कब्जा जमाया। तब जेडीयू अकेले चुनावी समर में उतरी थी तो चालीस सीटों में से दो सीटों पर ही जीत मिली थीं, लेकिन जेडीयू का मानना है कि बुरे हालात में भी 16-17 फीसदी वोट हासिल हुए।

सूत्रों की मानें तो जेडीयू चाहती है कि दोनो पार्टियां 17-17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़े हैं। बाक़ी की सीटें एलजेपी और आरएलएसपी को दे दी जाएं। जेडीयू इसके अलावा यूपी और झारखंड में 4 सीटें चाहती है। सियासी गलियारों में जेडीयू के आरजेडी और कांग्रेस नेताओं के साथ अंदरखाने बातचीत की खबरें भी सुर्खियों में है। सियासत के जानकार इसे जेडीयू की प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा मान रहे हैं।

2014 से 2018 तक देश की सियासत में काफी बदलाव आ चुके हैं। विपक्षी दलों को बीजेपी के विधानसभा चुनावों में बढ़ते प्रभाव से अपने वजूद बचाने की चिंता सताने लगी है, तो एनडीए के सहयोगी दलों के साथ पिछले 4 सालों में बीजेपी के साथ खट्टे-मीठे अनुभवों के मद्देनजर अब अपने फैसलों पर पुनर्विचार करने में लगे हुए हैं. लोकसभा चुनावों से पहले एनडीए में शामिल बीजेपी के कई सहयोगी एक-एक कर साथ छोड़ने लगे हैं।

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टीडीपी, जीतन राम मांझी की हम और पीडीपी एनडीए से बाहर निकल चुकी हैं. वहीं, शिवसेना ने 2019 में अलग चुनाव लड़ने का ऐलान कर एनडीए की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अकाली दल ने भी राज्य सभा के उप सभापति पद पर दावेदारी ठोक कर बीजेपी की मुश्किलों को बढ़ाने का काम किया है।

बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू के बीच सीटों के तालमेल और राज्य में कौन बड़ा भाई है, इन लेकर पिछले एक महीने से जमकर बयानबाजी हो रही है। हालांकि जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार ने साफ कहा कि लोकसभा चुनाव बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। इसके लिए उन्होंने सीटों का फॉर्मूला भी दिया है।

वेब डेस्क, IBC24

Web Title : Amit Shah In Patna:

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