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महाराजपुर के लिए योजनाएं तो कई बनीं ..लेकिन वो फाइलों से कभी बाहर नहीं निकली

Created at - July 12, 2018, 5:02 pm
Modified at - July 12, 2018, 5:02 pm

अब बात मध्यप्रदेश की महाराजपुर विधानसभा की..सियासी समीकरण और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर...

छतरपुर जिले में आती है विधानसभा सीट

उर्मिल और कुम्हाड़ प्रमुख नदियां

कुल मतदाता-2 लाख 74 हजार 52

पुरुष मतदाता-1 लाख 11 हजार 492

महिला मतदाता-95 हजार 960

वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा

मानवेंद्र सिंह हैं बीजेपी विधायक

सियासत-

महाराजपुर विधानसभा बीजेपी की गढ़ के तौर पर जानी जाती है..कांग्रेस की स्थिति क्या है ये इससे समझा जा सकता है कि बीते चुनाव में तीसरे नंबर पर रही थी..लेकिन इस बार कांग्रेस अभी से चुनावी तैयारियों में जुट गई है ।

बीजेपी की परंपरागत सीटों में से एक है महाराजपुर विधानसभा...इसी सीट से बीजेपी के रामदयाल अहिरवार लगातार पांच बार विधायक चुने गए...2008 में कांग्रेस छोड़ निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे मानवेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की..इसके बाद 2013 में बीजेपी का हाथ थाम चुनाव लड़ा और एक बार फिर जीत का परमच लहराया..बीते चुनाव में कांग्रेस को बुरी तरह हार का मुंह देखना पड़ा इस चुनाव में कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही है जबकि दूसरे नंबर पर बसपा रही..अब फिर चुनाव नजदीक हैं..तो चुनावी रंग में रंगने लगी है महाराजपुर विधानसभा..इसके साथ ही विधायक की टिकट के दावेदार भी ताल ठोकने लगे हैं।

बात बीजेपी की करें तो वर्तमान विधायक मानवेंद्र सिंह का नाम सबसे आगे है...क्योंकि मानवेंद्र सिंह की क्षेत्र में मजबूत पकड़ है इसका अंदाजा इस बात से लग जाता है की कांग्रेस का साथ छोड़ने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़े और जीते..इसके अलावा अभिनेंद्र पटेरिया ,महेश माटोल और हरसू महाराज भी दावेदारों में शामिल हैं..कांग्रेस में भी दावेदारों की फौज है..राजेश महतो और दौलत तिवारी टिकट की दौड़ में सबसे आगे हैं..तो वहीं नीरज दीक्षित भी दावेदार हैं ।

मुद्दे-

गरीबी और पिछड़ापन यही पहचान है महाराजपुर विधानसभा की..कहने को तो सरकारी योजनाएं बनती है लेकिन वो फाइलों से बाहर निकल ही नहीं पाती...अगर निकलती तो महाराजपुर समस्याओं से घिरा नजर नहीं आता ।

जो हाल पूरे बुंदेलखंड का है वही हाल महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र का भी है..सबसे बड़ी समस्या है पेयजल संकट..गर्मियों में हालात ये की बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करती दिखाई देती है जनता..शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं भी बेपटरी हैं...स्कूल भवन हैं तो शिक्षक नहीं, अगर शिक्षक हैं तो भवन नहीं ये हाल है स्कूली शिक्षा का..  उच्च शिक्षा भी बदहाल है..शिक्षा की तरह ही स्वास्थ्य सुविधाएं हैं।

अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के चलते मरीज जिला मुख्यालय जाने को मजबूर हैं..गांवों में स्थिति ये है कि इलाज के अभाव में मरीज दम तोड़ देते हैं..बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है..रोजगार के साधन हैं नहीं नतीजा पलायन के लिए मजबूर हैं लोग..कहने को तो पान की खेती के लिए जाना जाता महाराजपुर लेकिन फिर भी किसान लागत मूल्य तक के लिए तरस रहा है ।

 

 

वेब डेस्क, IBC24

 


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